उत्तर प्रदेश धर्म

आज खेलें होरी नव नागरी: ब्रज की दिव्य होली और प्रेम रस की अनुपम झांकी

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(राग परज)

आज खेलें होरी नव नागरी ।
सरस गुलाल डार प्रीतम पै,
सकल कला गुन आगरी ॥ [1]

श्रीवृषभान भवन में सजनी,
फैलि रह्यो अनुराग री ।
कीरति कुल कीरति गावति लखि,
गोविंदसरन बड़भाग री ॥ [2]

– श्री गोविंद शरण देवाचार्य,
श्री गोविंदशरण देवाचार्य जी की वाणी

आज खेलें होरी नव नागरी: ब्रज की दिव्य होली और प्रेम रस की अनुपम झांकी

ब्रजभूमि की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का महासागर है। “आज खेलें होरी नव नागरी” पद में श्री गोविंद शरण देवाचार्य जी ने राधा-कृष्ण की होली का ऐसा मनोहारी चित्र खींचा है, जिसमें रंग केवल गुलाल नहीं, बल्कि अनुराग, माधुर्य और दिव्य प्रेम के प्रतीक हैं।

यह पद आनंद और उत्सव की भावना को प्रकट करता है।

पद का सरल भावार्थ

✨ “आज खेलें होरी नव नागरी”

यहाँ “नव नागरी” से तात्पर्य श्री राधारानी से है। आज वे अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के साथ होली खेल रही हैं।

“सरस गुलाल डार प्रीतम पै”
राधा रानी प्रेमरस से भरा गुलाल अपने प्रियतम पर डालती हैं। यह केवल रंग नहीं, बल्कि प्रेम का अर्पण है।

“सकल कला गुन आगरी”
राधा जी सभी कलाओं और गुणों की अधिष्ठात्री हैं। उनकी प्रत्येक लीला में माधुर्य और सौंदर्य झलकता है।

“श्रीवृषभान भवन में सजनी”

वृषभानु महाराज के भवन में होली का उत्सव सजा है। सखियाँ उल्लास से भरी हैं।

“फैलि रह्यो अनुराग री”
चारों ओर प्रेम और अनुराग का वातावरण है। ब्रज में रंगों से अधिक प्रेम की वर्षा हो रही है।

“कीरति कुल कीरति गावति लखि”
राधा रानी के कुल की कीर्ति गाई जा रही है। यह केवल पारिवारिक गौरव नहीं, बल्कि दिव्य महिमा का वर्णन है।

“गोविंदसरन बड़भाग री”
कवि स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस लीला का दर्शन और वर्णन करने का अवसर मिला।

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ब्रज की होली का आध्यात्मिक महत्व

ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि:

  • आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक
  • अहंकार को त्यागकर प्रेम में रंग जाने का संदेश
  • भक्ति और माधुर्य रस की अनुभूति
  • जीवन में आनंद और सकारात्मकता का प्रसार

यह होली हमें सिखाती है कि सच्चा रंग वही है जो हृदय को प्रेम से रंग दे।

राग परज और होली

राग परज पारंपरिक रूप से उल्लास और उत्सव से जुड़ा है। जब यह पद गाया जाता है, तो वातावरण में एक दिव्य कंपन महसूस होता है।

भक्त जब इसे गाते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है मानो वे स्वयं ब्रज की गलियों में खड़े होकर राधा-कृष्ण की होली देख रहे हों

आज के समय में इस पद की प्रासंगिकता

आज जब जीवन तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरा है, यह पद हमें याद दिलाता है:

  • जीवन में प्रेम को प्राथमिकता दें
  • रिश्तों में मधुरता बनाए रखें
  • त्योहारों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भावना से मनाएँ
  • आध्यात्मिकता को जीवन का हिस्सा बनाएं

ब्रज की होली हमें बताती है कि रंग बाहर से नहीं, अंदर से खिलते हैं।

“आज खेलें होरी नव नागरी” केवल एक भजन नहीं, बल्कि प्रेम, सौंदर्य और भक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है।

जब हम इस पद को सुनते या पढ़ते हैं, तो ऐसा लगता है मानो हम भी उस दिव्य होली का हिस्सा बन गए हों, जहाँ रंगों से अधिक प्रेम की वर्षा हो रही है।

इस होली, केवल गुलाल ही नहीं —
अपने मन को भी प्रेम और भक्ति के रंग में रंग लीजिए।

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