अमेरिका-इजराइल हमलों के बीच बड़ा दावा
मिडिल ईस्ट में तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Khamenei की मौत का दावा सामने आया। हालांकि, इस खबर ने पूरे क्षेत्र में भूचाल ला दिया है और स्थिति लगातार बदल रही है।
बताया जा रहा है कि हमलों के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की। इतना ही नहीं, इस घोषणा के दौरान स्टेट टीवी की एंकर लाइव प्रसारण में भावुक होकर रो पड़ीं। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें तेहरान के अलग-अलग इलाकों में लोगों की प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं।
किन शहरों पर हुए हमले?
ताजा घटनाक्रम के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई प्रमुख शहरों को निशाना बनाया। इनमें राजधानी तेहरान, खोर्रमाबाद, कौम और इस्फहान शामिल बताए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल के हाइफा, तेल अवीव और गैलिली जैसे क्षेत्रों पर मिसाइलें दागने का दावा किया है।
इस बीच, क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं।
ईरान में शोक और सैन्य चेतावनी
खामेनेई की मौत के दावे के बाद ईरान में 40 दिन के राजकीय शोक और सात दिन की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की खबर सामने आई है।
साथ ही, ईरान की प्रमुख सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि देश ने एक महान नेता खो दिया है।
इसी क्रम में ईरानी सेना ने “सबसे खतरनाक अभियान” शुरू करने की चेतावनी दी है। सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाएगी।
अमेरिकी प्रतिक्रिया क्या रही?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बयान जारी कर खामेनेई की मौत का दावा किया। उन्होंने इसे “न्याय” बताया और कहा कि यह दुनिया के लिए राहत की खबर है।
हालांकि, आधिकारिक अमेरिकी स्रोतों की ओर से विस्तृत सैन्य विवरण सामने नहीं आया है।
हताहतों के आंकड़े और मानवीय संकट
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत और 740 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से कई छात्राओं की मौत की खबर भी सामने आई है, जिसने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है।
इससे स्पष्ट है कि संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नागरिक आबादी भी इसकी चपेट में आ रही है।
ईरान-इजराइल विवाद की जड़ क्या है?
1. परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका और इजराइल को लंबे समय से आशंका है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार निर्माण की दिशा में बढ़ सकता है। हालांकि, ईरान बार-बार कहता रहा है कि उसका कार्यक्रम केवल ऊर्जा और रिसर्च के लिए है।
2. बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दा
ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा मानता है और इसे “रेड लाइन” घोषित कर चुका है। यही मुद्दा परमाणु समझौतों में बाधा बना हुआ है।
3. इजराइल के साथ टकराव
ईरान खुलकर इजराइल का विरोध करता है, जबकि अमेरिका इजराइल का प्रमुख सहयोगी है। यही समीकरण क्षेत्रीय तनाव को और गहरा करता है।
4. मिडिल ईस्ट में प्रभाव
अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में अपने समर्थक गुटों के जरिए प्रभाव बढ़ा रहा है। वहीं ईरान इसे अपने हितों की रक्षा बताता है।
5. आर्थिक प्रतिबंध
अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इसके जवाब में ईरान समय-समय पर कड़े रुख अपनाता रहा है।
फिलहाल, हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यदि सैन्य कार्रवाई और तेज होती है, तो यह संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट को व्यापक युद्ध की ओर धकेल सकता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। आने वाले घंटे और दिन यह तय करेंगे कि यह टकराव सीमित रहेगा या बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेगा।

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