मध्य प्रदेश

Bharat Bhavan : भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है, अतीत हो रहा है पुन: जीवंत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

Bharat-Bhavan-CM-Mohan-Yadav-image

Bharat Bhavan is not Just Building, It is a Creation of Life

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत भवन सिर्फ एक भवन या मंच नहीं, यह जीवन की रचना है। इसका सुनहरा अतीत फिर से जीवंत हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कला समाज को हर तरह से जोड़ने का काम करती है। कला सामाजिक समरसता का सर्वकालिक और बड़ा माध्यम है।

भारत भवन कला, सृजन, साधना और संवाद का जीवंत केंद्र

कला से दूरियाँ मिटती है, मन का बोझ हल्का होता है और समाज में आपसी सौहार्द भी बढ़ता है। कला के जरिए एक संवेदनशील और सकारात्मक समाज का निर्माण संभव है। भारत भवन कला, सृजन, साधना और संवाद का जीवंत केंद्र है। यह बरसों से कला, कलाकारों और रचनाधर्मियों की पितृ संस्था की तरह काम कर रहा है।

इस प्रतिष्ठित बहुआयामी कला एवं संस्कृति केंद्र ने आज अपनी स्थापना के 44 साल पूरे कर लिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 44 साल तो तरूणाई है, भारत भवन की ख्याति अगले 440 साल तक भी ऐसी ही बनी रहे, हमारी यही कामना है। भारत भवन में हुए गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर 10 दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ किया। समारोह 22 फरवरी तक चलेगा। इसमें देश-प्रदेश के लब्ध प्रतिष्ठित कलाकार, साहित्यकार एवं सांस्कृतिक साधक सहभागिता कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थापना दिवस समारोह के लिए विशेष रूप से भोपाल आए पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया एवं भारत भवन की न्यासी सदस्या पद्मश्री श्रीमती भूरीबाई का शॉल एवं श्रीफल देकर सम्मान किया। पं. हरिप्रसाद चौरसिया के हाथों में आते ही काष्ठ की बांसुरी में भी प्राण आ जाते हैं। निर्जीव वस्तु भी सजीव हो जाती है। यही कला है, यही साधना है। इस अवसर पर भारत भवन के न्यासी सदस्य एवं वरिष्ठ रंगकर्मी श्री राजीव वर्मा, विधायक श्री उमाकांत शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाकार और कला प्रेमी उपस्थित थे।

भारत भवन ने नई और उभरती कला प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कला साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि कला और संस्कृति के संरक्षण में भारत भवन की भूमिका हमेशा ही सराहनीय रही है। बीते 44 सालों में भारत भवन ने जिस निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ कलाकारों को मंच दिया है, वह इसे देश के विशिष्ट सांस्कृतिक संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत भवन ने स्थापित कलाकारों को सम्मान देते हुए नई और उभरती कला प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया है। भारत भवन की गतिविधियों ने लोक परम्पराओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर भारतीय संस्कृति की जड़ों को और भी मजबूत किया है।

मुक्त और शिष्ट सांस्कृतिक प्रवाह का केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत भवन सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों के मुक्त और शिष्ट प्रवाह का पर्याय बन चुका है। भारत भवन में होने वाले कार्यक्रमों में विचारों की स्वतंत्रता, रचनात्मक प्रयोग और सौंदर्य बोध का संतुलित समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सुर-ताल, लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, नाट्य मंचन तथा विभिन्न ललित एवं रूपंकर कलाओं के प्रदर्शन के लिए भारत भवन जैसा सुंदर, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त मंच विरले ही उपलब्ध होता है।

भारत भवन ने भोपाल को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक पटल पर विशिष्ट स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत भवन के कार्यक्रमों ने देश-विदेश में मध्यप्रदेश की कला-संस्कृति सहित विरासतों के संरक्षण की कोशिशों को नई पहचान दिलाई है।

राज्य शासन कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत

भारत भवन के 44वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए आशा जताई कि भारत भवन अपनी शानदार प्रस्तुतियों, रचनात्मक प्रयोगों और सांस्कृतिक उपलब्धियों से भविष्य में भी देश-दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा को और अधिक समृद्ध करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य शासन कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। भारत भवन जैसे कला संस्थानों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित और सशक्त रूप में पहुंच सके।

भोपाल की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं गृह तथा भारत भवन के न्यासी सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि भारत भवन एक सांस्कृतिक परिसर ही नहीं, भोपाल शहर की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन चुका है। झीलों और खेलों की नगरी भोपाल का यह संस्थान प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम है। यहां आने वाला हर कला प्रेमी प्रस्तुतियों का आनंद लेने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की गहराई को भी अनुभव करता है।

उन्होंने स्थापना दिवस समारोह में आए देश-दुनिया से आए सभी कलाकारों, कला प्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि भारत भवन की स्थापना 13 फरवरी 1982 को हुई थी। भारत भवन को एक ऐसे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया, जहां भारतीय परम्परा, लोक जीवन और समकालीन कला सृजन – तीनों का समन्वय दिखाई दे। बीते 44 सालों में भारत भवन ने इस परिकल्पना को साकार करते हुए कला, साहित्य, संगीत, रंगमंच, दृश्य और रुपंकर कलाओं में अपनी विशेष पहचान स्थापित की है। संचालक संस्कृति श्री एन.पी नामदेव ने सभी का आभार व्यक्त किया।

दस दिवसीय स्थापना दिवस समारोह

44वें स्थापना दिवस पर प्रारंभ हुए 10 दिवसीय समारोह में शास्त्रीय एवं लोक संगीत की प्रस्तुतियां, लोक कलाओं का प्रदर्शन तथा युवा कलाकारों के लिए विशेष प्रस्तुतियां होंगी। इसमें वादन, गायन, नृत्य, कविता-कहानी, नाट्य मंचन, सिनेमा, विमर्श, कला प्रदर्शनी एवं कला शिविर भी होंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कला प्रदर्शन के साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों को कला और संस्कृति से जोड़ना भी है।

बीते दौर की सृजनात्मक यात्रा के बाद भारत भवन आज भी उतना ही जीवंत, प्रासंगिक और प्रेरणादायी है, जितना अपनी स्थापना के समय था। दस दिवसीय स्थापना दिवस समारोह के उद्घाटन में भारी संख्या में कला प्रेमियों की उपस्थिति इस तथ्य की साक्षी रही कि कला और संस्कृति के प्रति समाज की रुचि और आस्था निरंतर बढ़ रही है। भारत भवन भारतीय कला-संस्कृति के संवर्धन का दायित्व पूरी निष्ठा, शिष्टता और गरिमा के साथ निभा रहा है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News