मुख्यमंत्री डॉ. यादव आलीराजपुर जिले के उदयगढ़ में आयोजित भगोरिया पर्व में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि फाल्गुन मास के रंग, मांदल की थाप और जीवन के प्रति उत्साह से भरा भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति का जीवंत उत्सव है। इस पर्व को वास्तव में समझने के लिए इसमें शामिल होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उदयगढ़ में पारंपरिक लोकधुनों, नृत्य और उल्लासपूर्ण माहौल ने पूरे क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। भगोरिया पर्व जनजातीय संस्कृति, प्रेम और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। राज्य सरकार जनजातीय परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विरासत को विकास से जोड़ने के संकल्प के साथ इस पर्व को गरिमा और भव्यता से मनाया गया। यह आयोजन जनजातीय संस्कृति की मजबूत पहचान और सरकार की संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री का जनजातीय समाज और स्थानीय नागरिकों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया। उन्हें जनजातीय संस्कृति के प्रतीक के रूप में तीर-कमान भेंट किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। मंच से सभी को भगोरिया पर्व की शुभकामनाएं दी गईं।
भगोरिया महोत्सव क्या है?

अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति से उत्सव का उत्साह और बढ़ गया। बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग इस आयोजन में शामिल हुए।
भगोरिया उत्सव में युवक-युवतियां रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। पुरुषों ने धोती, अंगोछा और साफा पहना। महिलाओं ने कांचली, घाघरा और ओढ़नी के साथ पारंपरिक आभूषण धारण किए। चांदी के हार, हांसली, कड़े, पायल और बिछिया ने पर्व की शोभा बढ़ाई।
मांदल, ढोल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। सामूहिक उत्साह और आपसी मेल-जोल ने माहौल को जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर पूर्व जनप्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे क्षेत्र में उत्सव और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण रहा।

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