Digital Learning Day (#DLDay) के प्रमुख पहलू
- उद्देश्य: नवीन, उच्च-गुणवत्ता वाली और न्यायसंगत डिजिटल शिक्षण और अधिगम पद्धतियों को प्रदर्शित करना, जो केवल गैजेट्स के उपयोग से आगे बढ़कर सृजन, सहयोग और संचार को बढ़ावा देती हैं।
- उत्पत्ति: स्कूलों में प्रौद्योगिकी के एकीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए एलायंस फॉर एक्सीलेंट एजुकेशन (ऑल4एड) द्वारा 2012 में इसकी शुरुआत की गई थी।
- महत्व: यह शिक्षा में समानता को बढ़ावा देता है, व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव प्रदान करता है और छात्रों को 21वीं सदी के आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद करता है।
- गतिविधियाँ: शिक्षक और विद्यालय सफलता की कहानियाँ साझा करके, वेबिनार आयोजित करके, सोशल मीडिया पर #DLDay का उपयोग करके और कक्षाओं में नई तकनीकों का प्रदर्शन करके जश्न मनाते हैं।
- वैश्विक मान्यता: यूनेस्को ने आपात स्थितियों और समग्र शिक्षण संवर्धन में डिजिटल शिक्षा की भूमिका को उजागर करने के लिए 19 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षा दिवस के रूप में नामित किया है।
डिजिटल लर्निंग डे (Digital Learning Day) मुख्य रूप से शिक्षा में तकनीक के बेहतर उपयोग और innovation को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
इसके दो प्रमुख रूप हैं:
1. डिजिटल लर्निंग डे (All4Ed द्वारा)
यह अमेरिका में 12 फरवरी, 2026 से शुरू हुआ एक global campaign है जो शिक्षकों द्वारा क्लासरूम में डिजिटल टूल्स के इस्तेमाल का जश्न मनाता है। इसका उद्देश्य छात्रों के लिए सीखने के अनुभव को व्यक्तिगत और मजेदार बनाना।
2. अंतर्राष्ट्रीय डिजिटल लर्निंग दिवस (UNESCO द्वारा)
इसे UNESCO द्वारा वैश्विक स्तर पर मान्यता दी गई है। ये हर साल 19 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में digital skills और inclusive education को बढ़ावा देना, ताकि तकनीक का लाभ हर बच्चे तक पहुँच सके।
All4Ed और UNESCO क्या हैं?
ऑल4एड (All4Ed) या ‘एलायंस फॉर एक्सीलेंट एजुकेशन’ (Alliance for Excellent Education) एक अमेरिकी राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य अश्वेत, कम आय वाले और हाशिए पर पड़े छात्रों के लिए समान शैक्षिक अवसरों की वकालत करना है।
यूनेस्को (UNESCO) – United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) है। 16 नवंबर 1945 को स्थापित यह यूएन की एक विशेष एजेंसी है, जिसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर दुनिया में शांति, सुरक्षा और टिकाऊ विकास स्थापित करना है।
डिजिटल लर्निंग दिवस क्यों है खास?
डिजिटल लर्निंग दिवस सिर्फ़ एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है जो तकनीक (Technology) ने हमारी शिक्षा व्यवस्था में लाया है। आज पढ़ाई केवल किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रही। मोबाइल, टैबलेट, ऑनलाइन क्लास, e-books और learning apps ने सीखने का तरीका ही बदल दिया है।
यह दिन हमें यह सोचने का मौका देता है कि डिजिटल शिक्षा ने हमें क्या दिया, और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसमें कितनी संभावनाएं छिपी हैं।
लेकिन इसी के साथ यह दिन हमें एक सच्चाई भी याद दिलाता है—
👉 डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) यानी आज भी बहुत से लोग तकनीक से दूर हैं।
डिजिटल लर्निंग दिवस कैसे मनाएं?
टेक्नोलॉजी मेला (Technology Fair)
स्कूल या कॉलेज में एक छोटा-सा टेक मेला आयोजित किया जा सकता है, जहाँ छात्र अपने digital projects, apps, presentations या videos दिखा सकें। इससे बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और creativity भी।
डिजिटल साक्षरता वर्कशॉप (Digital Literacy Workshops)
आज भी कई लोग basic computer skills, email, online safety या cyber security से अनजान हैं।
ऐसी workshops में ये बातें सिखाई जा सकती हैं:
- Computer & Mobile basics
- Internet safe use
- Online fraud से बचाव
- AI tools और learning platforms का इस्तेमाल
Tech Experts से बातचीत
IT professionals, content creators, software developers या digital marketers को बुलाकर students से interaction कराया जा सकता है। इससे बच्चों को future careers की real-life understanding मिलती है।
Digital Resources को Promote करें
- E-books
- Online courses (Coursera, SWAYAM, Udemy)
- Educational apps
- YouTube learning channels
ये resources हर student की learning style के हिसाब से मदद करते हैं।
Tech Challenges & Competitions
- Coding marathon
- Digital art competition
- Quiz on AI & Technology
- Online presentation challenge
इससे पढ़ाई बोझ नहीं, मज़ेदार बन जाती है।
डिजिटल लर्निंग दिवस का इतिहास
डिजिटल लर्निंग डे की शुरुआत 2012 में Alliance for Excellent Education द्वारा की गई थी। इसका मकसद सिर्फ़ नए gadgets को लाना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि technology का सही इस्तेमाल शिक्षा को ज्यादा engaging, inclusive और effective बना सकता है।
पिछले एक दशक में यह दिन दुनियाभर में लोकप्रिय हुआ है। आज शिक्षक, छात्र, parents और policy makers मिलकर technology-based education को आगे बढ़ाने की बात करते हैं।
डिजिटल डिवाइड: एक बड़ी चुनौती
आज भी तकनीक सब तक नहीं पहुँची है।
Research बताती है कि:
- ब्रिटेन में हर 5 में से 1 व्यक्ति basic digital skills से वंचित है
- Lloyds Bank की रिपोर्ट के अनुसार 1 करोड़ से ज्यादा लोग डिजिटल सुविधाओं से दूर हैं
- आने वाले समय में 90% नौकरियों के लिए digital skills जरूरी होंगी
यानी अगर यह gap नहीं भरा गया, तो बेरोज़गारी और असमानता और बढ़ सकती है।
Digital Poverty Alliance की पहल
UK की संस्था Digital Poverty Alliance इस दिशा में अच्छा काम कर रही है।
इनकी योजनाएँ:
- Tech4Teachers
- Tech4Schools
इनका मकसद teachers और schools को technology resources देना है ताकि quality digital education दी जा सके।
डिजिटल लर्निंग का भविष्य
कोरोना महामारी ने यह साफ़ कर दिया कि digital education अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है।
जब स्कूल बंद हुए, तब:
- Online classes
- Zoom / Google Meet
- Digital homework
- Learning apps
ने शिक्षा को ज़िंदा रखा।
लेकिन इस दौर ने यह भी दिखाया कि जिनके पास device या internet नहीं था, वे पीछे रह गए।
आगे क्या ज़रूरी है?
- हर छात्र तक device और internet पहुँचाना
- Teachers की digital training
- Regional language content
- Affordable technology solutions
ताकि हर बच्चा, चाहे वह गाँव से हो या शहर से, digital learning का बराबर लाभ उठा सके।
डिजिटल लर्निंग दिवस हमें याद दिलाता है कि अगर तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो यह शिक्षा की दुनिया में क्रांति ला सकती है।
ज़रूरत है बस:
- सही नीति
- समान अवसर
- और इंसानियत के साथ technology को अपनाने की
तभी डिजिटल शिक्षा सच में सबके लिए होगी।

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