आज की दुनिया में डिग्री, पैसा और स्टेटस होने के बाद भी लोग रिश्तों में असफल क्यों हो रहे हैं?
क्यों परिवार टूट रहे हैं?
क्यों ऑफिस में तनाव और टकराव बढ़ रहे हैं?
इसका जवाब अक्सर Emotional Intelligence (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) में छुपा होता है।
Emotional intelligence हमारे रिश्तों की दुनिया में एक ऐसे कम्पास की तरह काम करती है जो हमें सही दिशा दिखाता है। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है—यानी पहले अपनी भावनाओं को पहचानना और समझना, ताकि हम दूसरों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
सहानुभूति (Empathy) हमें गहरे संबंध बनाने में मदद करती है, जिससे हम जल्दबाज़ी में प्रतिक्रिया देने के बजाय समझदारी से उत्तर दे पाते हैं। प्रभावी संवाद (Effective Communication) दूरियों को कम करता है और विश्वास तथा सम्मान की नींव मजबूत करता है।
जब हम इन भावनात्मक कौशलों को विकसित करते हैं, तो हम केवल शब्दों का नहीं, बल्कि भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं—और यही वह आधार है जिस पर रिश्ते लंबे समय तक फलते-फूलते और मजबूत होते हैं।

“जब गुस्सा संवाद पर हावी हो जाता है,
तो रिश्ते सच बोलने से पहले ही टूटने लगते हैं।
भावनात्मक बुद्धिमत्ता की कमी
हमें सही होने से ज़्यादा ज़ोर से बोलना सिखा देती है, और इंसान भूल जाता है
कि सामने वाला भी महसूस करता है।”
Emotional Intelligence (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) क्या है?
Emotional Intelligence (EI) या भावनात्मक बुद्धिमत्ता वह क्षमता है जिससे हम अपनी और दूसरों की भावनाओं को पहचानते, समझते और सही तरीके से संभालते हैं।
अगर IQ दिमाग की ताकत है, तो EI दिल और दिमाग के संतुलन की ताकत है।
सबसे पहले इस शब्द को लोकप्रिय बनाया था Daniel Goleman ने। उनके अनुसार EI के पाँच मुख्य तत्व होते हैं:
- Self-Awareness (आत्म-जागरूकता) – अपनी भावनाओं को पहचानना।
- Self-Regulation (आत्म-नियंत्रण) – गुस्सा, तनाव या दुख को संतुलित रखना।
- Motivation (प्रेरणा) – अंदर से आगे बढ़ने की इच्छा।
- Empathy (सहानुभूति) – दूसरों की भावनाओं को महसूस करना।
- Social Skills (सामाजिक कौशल) – अच्छे संबंध बनाना और निभाना।
क्या Emotional Intelligence सबमें होती है?
हाँ, हर इंसान में कुछ न कुछ स्तर की भावनात्मक बुद्धिमत्ता होती है।
लेकिन फर्क यह है कि:
- कुछ लोग भावनाओं को समझते हैं
- कुछ लोग भावनाओं में बह जाते हैं
अच्छी बात यह है कि Emotional Intelligence को किसी भी उम्र में बेहतर बनाया जा सकता है।
Emotional Intelligence क्यों जरूरी है?
रिश्तों में
- गलतफहमियाँ कम होती हैं
- संवाद बेहतर होता है
- अहंकार की जगह समझ बढ़ती है
Emotional Intelligence: क्या यही है रिश्ते बचाने का असली मंत्र?
आज रिश्ते इसलिए नहीं टूटते कि लोग एक-दूसरे से प्यार नहीं करते, बल्कि इसलिए टूटते हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे को समझ नहीं पाते। Emotional Intelligence हमें सिखाती है कि सामने वाला क्या कह रहा है, उससे पहले यह समझें कि वह कैसा महसूस कर रहा है। जब हम गुस्से में जवाब देने के बजाय ठहरकर सोचते हैं, जब हम आरोप लगाने की जगह अपनी भावना व्यक्त करते हैं, और जब हम “मैं सही हूँ” की जगह “मैं तुम्हें समझना चाहता हूँ” कहते हैं—तभी रिश्ते मजबूत होते हैं। भावनात्मक बुद्धिमत्ता रिश्तों में सम्मान, धैर्य और संवाद को जन्म देती है। इसलिए हाँ, यह सच में रिश्ते बचाने का एक बड़ा मंत्र बन सकती है।
परिवार में
- पति-पत्नी के बीच सम्मान बढ़ता है
- बच्चों को भावनात्मक सुरक्षा मिलती है
- टूटते रिश्तों को संभाला जा सकता है
आज परिवारों में सबसे बड़ी कमी संवाद की है। लोग एक घर में रहते हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं। काम का दबाव, आर्थिक तनाव, और डिजिटल दुनिया की व्यस्तता ने दिलों के बीच दूरी बढ़ा दी है। Emotional Intelligence इस दूरी को कम कर सकती है, क्योंकि यह हमें सुनना सिखाती है—सिर्फ शब्द नहीं, भावनाएँ भी। जब पति-पत्नी एक-दूसरे के संघर्ष को समझने लगते हैं, जब माता-पिता बच्चों की बात को गंभीरता से लेते हैं, तब घर में विश्वास लौटता है। परिवार तब टूटता है जब लोग एक-दूसरे को जज करने लगते हैं; और जुड़ता है जब लोग एक-दूसरे को समझने लगते हैं।
ऑफिस में
- टीमवर्क बेहतर होता है
- लीडरशिप मजबूत होती है
- तनाव और कॉन्फ्लिक्ट कम होते हैं
आज कंपनियाँ सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि व्यवहार भी देखती हैं। Emotional Intelligence करियर ग्रोथ का बड़ा फैक्टर बन चुकी है।
ऑफिस में केवल टैलेंट ही काफी नहीं होता, व्यवहार भी मायने रखता है। कई बार बहुत होशियार लोग इसलिए आगे नहीं बढ़ पाते क्योंकि वे टीम के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते। Emotional Intelligence व्यक्ति को यह समझने की क्षमता देती है कि कब बोलना है, कैसे बोलना है और कब शांत रहना है। एक अच्छा लीडर वही होता है जो टीम के तनाव को समझे, उनकी मेहनत की सराहना करे और मुश्किल समय में संयम बनाए रखे। कार्यस्थल पर कॉन्फ्लिक्ट को संभालना, फीडबैक को सकारात्मक ढंग से देना और दबाव में भी संतुलित रहना—ये सब EI के गुण हैं। यही कारण है कि आज कंपनियाँ सिर्फ IQ नहीं, बल्कि Emotional Intelligence को भी सफलता का मापदंड मानती हैं।

बच्चों की परवरिश में Emotional Intelligence क्यों जरूरी है?
बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। अगर वे माता-पिता को गुस्से में चिल्लाते देखते हैं, तो वे भी वैसा ही व्यवहार सीखते हैं। लेकिन अगर वे देखते हैं कि मतभेद होने पर भी शांति से बात की जा सकती है, तो वे भावनात्मक संतुलन सीखते हैं। Emotional Intelligence बच्चों को अपनी भावनाएँ पहचानने और व्यक्त करने की ताकत देती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, वे मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं और भविष्य में स्वस्थ रिश्ते बना पाते हैं। एक भावनात्मक रूप से सुरक्षित बचपन, पूरे जीवन की नींव बन जाता है।
क्या Emotional Intelligence एक बिखरते परिवार को बचा सकती है?
जब लोग सुनना बंद कर देते हैं, तब परिवार टूटता है।
EI हमें सुनना, समझना और प्रतिक्रिया देने से पहले रुकना सिखाती है।
- “तुम हमेशा गलत हो” की जगह
- “जब ऐसा होता है तो मुझे दुख होता है”
बस इतना सा बदलाव रिश्तों की दिशा बदल सकता है।
चलो इसे आसान तरीके से समझते हैं 👇
पहले खुद को समझना (Self-Awareness)
अक्सर पति-पत्नी झगड़े में कहते हैं — “तुम हमेशा ऐसा करते हो”।
लेकिन Emotional Intelligence सिखाती है कि पहले खुद से पूछें —
“मुझे सच में किस बात से चोट लगी?”
“क्या मैं गुस्से में हूँ या आहत हूँ?”
जब व्यक्ति अपनी भावना पहचान लेता है, तो वह आरोप नहीं, अपनी ज़रूरत व्यक्त करता है।
प्रतिक्रिया नहीं, उत्तर देना (Self-Regulation)
गुस्से में बोले गए शब्द रिश्तों को सालों तक घायल कर देते हैं।
उच्च EI वाला व्यक्ति तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता। वह रुकता है, साँस लेता है, और फिर जवाब देता है।
कभी-कभी 10 सेकंड की चुप्पी 10 साल के रिश्ते बचा सकती है।
संवाद का तरीका बदलना
“तुम कभी मेरी बात नहीं सुनते”
की जगह
“जब मेरी बात नहीं सुनी जाती, तो मुझे अकेलापन महसूस होता है”
बस इतना सा बदलाव रिश्ते को आक्रमण से समझ में बदल देता है।
क्या Emotional Intelligence की कमी से बढ़ रहे हैं तलाक?
तलाक के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन भावनात्मक असंतुलन एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। जब लोग अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं कर पाते, जब वे एक-दूसरे की जरूरतों को नजरअंदाज करते हैं, और जब हर बातचीत बहस में बदल जाती है—तो दूरी बढ़ने लगती है। Emotional Intelligence की कमी से लोग छोटी-छोटी बातों को भी बड़ा बना लेते हैं, और अहंकार समझ पर हावी हो जाता है। अगर पति-पत्नी एक-दूसरे के दर्द, तनाव और उम्मीदों को समझने की कोशिश करें, तो कई रिश्ते टूटने से बच सकते हैं। EI तलाक को पूरी तरह रोक नहीं सकती, लेकिन कई गलतफहमियों को खत्म जरूर कर सकती है।
Emotional Intelligence समाज में क्या बदलाव ला सकती है?
अगर समाज में लोग भावनात्मक रूप से परिपक्व हों:
- घरेलू हिंसा कम होगी
- Gender equality को मजबूती मिलेगी
- बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा
- कार्यस्थलों पर Toxic culture घटेगा
Emotional Intelligence सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक बदलाव का भी आधार है।
क्या Emotional Intelligence एक मानसिक समस्या है?
सीधा जवाब: नहीं। Emotional Intelligence (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) कोई बीमारी या मानसिक विकार नहीं है। यह एक कौशल (skill) है — जैसे बोलना, सुनना या तर्क करना। इसे लोकप्रिय बनाया था मनोवैज्ञानिक Daniel Goleman ने। उन्होंने इसे मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ा, लेकिन इसे बीमारी नहीं, बल्कि जीवन कौशल बताया।
क्या Emotional Intelligence के लिए therapy लेनी चाहिए?
हर किसी को therapy की जरूरत नहीं होती सिर्फ EI बढ़ाने के लिए।
Emotional Intelligence कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक skill है — जिसे पढ़कर, अभ्यास से और self-awareness से बेहतर किया जा सकता है।
डॉक्टर और psychiatrist क्या कहते हैं?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ Emotional Intelligence को एक “protective factor” मानते हैं — यानी यह मानसिक समस्याओं से बचाव में मदद कर सकती है।
Psychologists का मानना है:
- जो व्यक्ति अपनी भावनाएँ पहचान सकता है, वह stress को बेहतर संभालता है
- Empathy रखने वाले लोगों के रिश्ते ज़्यादा स्थिर होते हैं
- Self-regulation anxiety और impulsive behavior को कम करती है
Psychiatrist आमतौर पर therapy तब सुझाते हैं जब:
- गुस्सा कंट्रोल से बाहर हो
- बार-बार रिश्ते टूट रहे हों
- बहुत ज्यादा anxiety या depression महसूस हो
- भावनाएँ समझना मुश्किल हो रहा हो
ऐसी स्थिति में Cognitive Behavioral Therapy (CBT) या counseling EI सुधारने में मदद कर सकती है।
कब therapy लेना फायदेमंद हो सकता है?
अगर आपको लगता है कि:
- आप छोटी बात पर बहुत react कर देते हैं
- बार-बार guilt, shame या anger dominate करते हैं
- रिश्तों में communication टूट रहा है
- बचपन के emotional trauma का असर अभी भी है
तो therapy सिर्फ EI नहीं, पूरे emotional health को मजबूत कर सकती है। Emotional Intelligence की कमी = हमेशा मानसिक बीमारी नहीं लेकिन अगर emotional struggles बहुत गहरे और लंबे समय से चल रहे हैं → तो professional help लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है।
Emotional Intelligence कैसे बढ़ाएँ?
- रोज 5 मिनट अपनी भावनाएँ लिखें
- प्रतिक्रिया देने से पहले 10 सेकंड रुकें
- सामने वाले की बात पूरी सुनें
- Meditation या Self-reflection करें
- “मैं सही हूँ” की जगह “मैं समझना चाहता हूँ” सोचें
धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है।
अंत में एक बात समझना जरूरी है—
Emotional Intelligence कोई किताब का सिद्धांत नहीं, बल्कि जीने का तरीका है।
जब हम अपनी और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सीख लेते हैं, तो रिश्ते भी सुधरते हैं, परिवार भी मजबूत होते हैं और जीवन भी संतुलित हो जाता है।
Emotional Intelligence पर 5 Best Books जो आपकी जिंदगी बदल सकती हैं

यहाँ 5 बेहतरीन किताबें हैं जो Emotional Intelligence (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) सीखने और बढ़ाने में आपकी मदद करेंगी — चाहे आप रिश्तों, परिवार, करियर या खुद की मानसिक समझ पर काम करना चाहते हों
- Emotional Intelligence – Daniel Goleman
- Emotional Intelligence 2.0 – Travis Bradberry & Jean Greaves
- Working with Emotional Intelligence – Daniel Goleman
- Emotional Intelligence in Hindi – बी. डी. शर्मा
- EQ Applied – Justin Bariso
क्यों पढ़ें?
यह Emotional Intelligence पर सबसे प्रभावशाली किताब मानी जाती है। इसमें बताया गया है कि IQ से ज़्यादा EI जीवन की सफलता तय करती है।
मुख्य सीख:
- Self-awareness हर बदलाव की शुरुआत है
- गुस्सा और आवेग को नियंत्रित करना सफलता की कुंजी है
- Empathy रिश्तों की असली ताकत है
याद रखने वाला विचार:
“अगर आप अपनी भावनाओं को नहीं समझते, तो वे आपको नियंत्रित करेंगी।”
किसके लिए कौन सी किताब?
- रिश्तों के लिए → Goleman
- ऑफिस/लीडरशिप → Working with EI
- Self-improvement → EI 2.0
- हिंदी पाठक → Emotional Intelligence in Hindi
FAQ Section
Q1. क्या Emotional Intelligence मानसिक बीमारी है?
नहीं, यह एक कौशल है जिसे सीखा और विकसित किया जा सकता है।
Q2. क्या Emotional Intelligence जन्म से होती है?
कुछ हद तक स्वभाव से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इसे अभ्यास से बढ़ाया जा सकता है।
Q3. क्या Emotional Intelligence से शादीशुदा जीवन सुधर सकता है?
हाँ, बेहतर संवाद और सहानुभूति रिश्तों को मजबूत बनाते हैं।
Q4. क्या Emotional Intelligence करियर में मदद करती है?
हाँ, खासकर लीडरशिप और टीमवर्क में।
Q5. Emotional Intelligence और IQ में क्या अंतर है?
IQ बौद्धिक क्षमता है, जबकि EI भावनात्मक समझ और व्यवहार से जुड़ी है।

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