77वां गणतंत्र दिवस 2026: देशभक्ति, शक्ति और संस्कृति का भव्य उत्सव
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर इस साल 77वां गणतंत्र दिवस बेहद खास अंदाज़ में मनाया गया। परेड में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक सैन्य ताकत और जवानों की शानदार कदमताल ने हर किसी का दिल जीत लिया। इस बार समारोह की थीम थी —
“स्वतंत्रता के मंत्र – वंदे मातरम” और “समृद्धि के मंत्र – आत्मनिर्भर भारत”।
समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन से हुई। सबसे पहले वे राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंचे और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। वहां दो मिनट का मौन रखने के बाद वे कर्तव्य पथ पहुंचे।
कर्तव्य पथ पर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और समारोह के मुख्य अतिथि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा तथा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का स्वागत किया।
पहली बार यूरोपीय संघ के दो बड़े नेता बने मुख्य अतिथि
इस साल गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि बनाया गया, जो अपने आप में ऐतिहासिक रहा। यह समारोह ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने को भी समर्पित था। परेड की झांकियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रस्तुतियों में यही भाव साफ दिखाई दिया।
अशोक चक्र से सम्मानित हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
परेड शुरू होने से पहले राष्ट्रपति ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को शांति काल के सबसे बड़े वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। पूरा कर्तव्य पथ तालियों से गूंज उठा।
परेड में दिखी सेना की नई युद्ध रणनीति
इस साल की गणतंत्र दिवस परेड 2026 में पारंपरिक मार्चिंग दस्तों के साथ-साथ पहली बार भारतीय सेना की युद्ध व्यूह रचना (Battle Formation) भी दिखाई गई। इससे देश की आधुनिक सैन्य तैयारी की झलक मिली।
सैनिकों का अनुशासन, बैंड की धुन और टुकड़ियों की एक जैसी चाल देखकर लोग गर्व से भर उठे।
30 झांकियों ने दिखाई भारत की विविधता
इस बार परेड में राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां शामिल हुईं। हर झांकी में किसी न किसी राज्य की संस्कृति, परंपरा, कला या विकास की कहानी दिखाई गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगभग 2500 कलाकारों ने हिस्सा लिया और भारत की लोक कलाओं की खूबसूरत झलक पेश की।
10,000 खास मेहमानों को मिला निमंत्रण
सरकार ने इस बार देशभर से करीब 10,000 विशेष अतिथियों को बुलाया। इनमें किसान, वैज्ञानिक, छात्र, महिला उद्यमी, खिलाड़ी, नवाचार करने वाले लोग और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल थे। यह कदम “जन भागीदारी” को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया।
दर्शक दीर्घाओं को दिए गए नदियों के नाम
इस साल एक अनोखी पहल की गई। दर्शकों के बैठने वाली दीर्घाओं (गैलरी) के नाम पहली बार देश की प्रमुख नदियों के नाम पर रखे गए।
इनमें गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, ब्रह्मपुत्र, कावेरी समेत कई नदियों के नाम शामिल थे। पहले इन दीर्घाओं को सिर्फ नंबरों से पहचाना जाता था।
सरकार के अनुसार, नदियां हमारी सभ्यता और संस्कृति की जीवन रेखा हैं, इसलिए लोगों को उनकी अहमियत समझाने के लिए यह पहल की गई।
युवाओं के लिए प्रतियोगिताएं भी हुईं
गणतंत्र दिवस 2026 को खास बनाने के लिए सरकार ने ‘माई भारत’ और ‘माई गाँव’ प्लेटफॉर्म के जरिए कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं आयोजित कीं। इनमें शामिल थीं:
- वंदे मातरम विषय पर निबंध प्रतियोगिता
- आत्मनिर्भर भारत पर पेंटिंग प्रतियोगिता
- वंदे मातरम गायन प्रतियोगिता
- अंतरिक्ष, खेल और भारत की उपलब्धियों पर क्विज
इनका उद्देश्य युवाओं और रचनात्मक लोगों को देशभक्ति से जोड़ना था।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतज़ाम
परेड के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जगह-जगह सुरक्षाकर्मी तैनात थे और सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी, ताकि समारोह सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
निष्कर्ष
गणतंत्र दिवस परेड 2026 सिर्फ एक सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह भारत की एकता, विविधता, संस्कृति, तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प का शानदार प्रदर्शन था। कर्तव्य पथ पर दिखा यह नज़ारा हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की नई ऊर्जा भर गया।

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