चुलबुली लाजो की होली पर पहली मुलाक़ात – एक रोमांटिक हिंदी प्रेम कहानी
फागुन की हवा में जैसे शरारत घुली हुई थी।
होली से एक दिन पहले ही लाजो की आँखों में चमक और भी बढ़ जाती थी।

लाजो…
एक चुलबुली, नटखट, मगर मन से बेहद साफ लड़की।
ना कोई बनावटीपन, ना कोई छल।
पीली कुर्ती, गुलाबी दुपट्टा, माथे पर छोटी सी बिंदी और मुस्कान ऐसी कि जैसे हर ग़म को रंग लगा दे।
अब तक उसकी ज़िंदगी में कोई लड़का नहीं आया था।
वो अपने घर, अपनी छत, अपनी सहेलियों और अपनी मस्ती की दुनिया में ही खुश थी।
होली की सुबह
सुबह होते ही गली में ढोल की थाप गूँज उठी —
“होली है…!”
लाजो ने चोटी कसकर बाँधी, कलाई में रंग-बिरंगी चूड़ियाँ खनकाईं और पिचकारी उठाकर बाहर आ गई।
गली के हर दरवाज़े पर उसकी हँसी की दस्तक थी।
इसी शोर-शराबे के बीच उसकी नज़र गली के कोने पर खड़े एक अनजान चेहरे पर पड़ी।
सफेद कुर्ता-पायजामा पहने, थोड़ा सा संकोची…
हाथ में गुलाल की छोटी सी थैली…
और आँखों में जैसे पहली बार किसी नई जगह का संकोच।

वो था — प्रेम।
अभी-अभी अपने मामा के घर रहने आया था।
लाजो ने उसे कुछ पल गौर से देखा।
उसकी शरारती मुस्कान धीरे-धीरे फैल गई।
वो धीरे-धीरे उसके पास पहुँची…
और बिना कुछ कहे उसके गाल पर गुलाल लगा दिया।
प्रेम एक पल को जैसे ठहर गया।
उसके चेहरे पर हल्की सी हैरानी, फिर धीमी मुस्कान।
लाजो खिलखिलाकर बोली —
“अरे… होली है! ऐसे खड़े रहोगे तो रंग तो लगेगा ही।”
प्रेम ने पहली बार किसी लड़की को इतनी बेफिक्री से हँसते देखा था।
उसकी आँखों की चमक और आवाज़ की मिठास जैसे सीधे दिल में उतर गई।

“मैं… प्रेम,”
उसने हल्की झिझक के साथ कहा।
लाजो ने दुपट्टे की ओट से मुस्कुराते हुए जवाब दिया —
“तो स्वागत है प्रेम जी… हमारे रंगों वाले मोहल्ले में।”
और फिर वो अचानक भाग गई…
पीछे रह गया प्रेम…
जिसके सफेद कुर्ते पर जितना रंग लगा था, उससे कहीं ज्यादा रंग उसके दिल पर चढ़ चुका था।
उस दिन प्रेम ने पहली बार महसूस किया—
कभी-कभी मोहब्बत की शुरुआत बड़े इज़हार से नहीं,
बस एक चुटकी गुलाल और एक मासूम हँसी से होती है।

और लाजो?
उसे अभी तक ज़रा सा भी अंदाज़ा नहीं था कि उसकी चुलबुली शरारत किसी के दिल में पहली धड़कन बन चुकी है…
🌸 Lajo – Episode 2
क्या प्रेम फिर लाजो से मिलेगा?
या कहानी में आएगा नया मोड़?
क्या ये मोहब्बत की शुरुआत है? ❤️
Follow करें और इंतज़ार करें… 💛

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