दिल्ली

E-Cigarette Ban : भारत में ई-सिगरेट और हीट-नॉट-बर्न उत्पादों पर प्रतिबंध बरकरार

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भारत सरकार ने ई-सिगरेट और हीट-नॉट-बर्न तंबाकू उत्पादों पर लगे प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया है। Reuters के मुताबिक Philip Morris की लॉबिंग नाकाम रही। पढ़िए पूरी खबर।

नई दिल्ली:
भारत सरकार ने ई-सिगरेट और हीट-नॉट-बर्न (Heat-Not-Burn) तंबाकू उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंध में किसी भी तरह की ढील देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले से दुनिया की सबसे मूल्यवान तंबाकू कंपनियों में शामिल Philip Morris International को बड़ा झटका लगा है, जो भारत में अपने हीटेड तंबाकू डिवाइस IQOS को बेचने की कोशिश कर रही थी।

समाचार एजेंसी Reuters के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार न तो ई-सिगरेट प्रतिबंध कानून में कोई संशोधन करने जा रही है और न ही उसे वापस लेने पर विचार कर रही है।

Reuters ने सबसे पहले भारत सरकार के इस फैसले और Philip Morris की वर्षों चली निजी लॉबिंग से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक किया है।

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Philip Morris ek badi international tobacco (तंबाकू) company hai, jo duniya bhar me cigarettes aur naye tobacco products banati aur bechti hai।

Philip Morris (Philip Morris International) सिगरेट और तंबाकू उत्पाद बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी है।

2019 से लागू है प्रतिबंध

भारत में वर्ष 2019 में ई-सिगरेट, वेपिंग डिवाइस और हीट-नॉट-बर्न तंबाकू उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इस कानून के तहत ऐसे सभी उपकरणों के उत्पादन, आयात, बिक्री, वितरण और विज्ञापन पर रोक है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने Reuters को दिए बयान में कहा,

“भारत सरकार इस प्रतिबंध को न तो रद्द कर रही है, न संशोधित कर रही है और न ही इसमें किसी तरह की छूट देने पर विचार कर रही है। भारत तंबाकू नियंत्रण और नशा मुक्ति के लिए प्रमाण-आधारित नीतियों के प्रति प्रतिबद्ध है।”

मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि मौजूदा कानून में हीट-नॉट-बर्न उत्पाद भी स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित हैं और यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी।

भारत: दुनिया का बड़ा सिगरेट बाजार

भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा सिगरेट बाजार है, जहां हर साल 100 अरब से अधिक सिगरेट बेची जाती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू के सेवन से देश में हर साल 10 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है।

इसी बड़े बाजार को देखते हुए Philip Morris ने भारत को अपने “स्मोक-फ्री” उत्पादों के लिए एक संभावित अहम बाजार माना था।

IQOS को लेकर Philip Morris का दावा

Philip Morris का दावा है कि उसका उत्पाद IQOS, पारंपरिक सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदायक है, क्योंकि इसमें तंबाकू जलाया नहीं जाता बल्कि गर्म किया जाता है।

हालांकि, भारत सरकार का मानना है कि ऐसे उत्पादों को अनुमति देना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है और इससे तंबाकू नियंत्रण की वर्षों की कोशिशें कमजोर पड़ सकती हैं।

वर्षों तक चली लॉबिंग

Reuters द्वारा 2021 से 2025 के बीच के गोपनीय कंपनी पत्रों की समीक्षा में सामने आया है कि Philip Morris ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और एक संसदीय समिति के समक्ष लगातार लॉबिंग की।

इन पत्रों में कंपनी ने:

  • IQOS जैसे उत्पादों के “विज्ञान” पर शोध की मांग
  • हीट-नॉट-बर्न उत्पादों को ई-सिगरेट प्रतिबंध से बाहर रखने की अपील
  • वैकल्पिक तंबाकू उत्पादों को अनुमति देने पर विचार करने का अनुरोध

इसके अलावा, कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी जनवरी में दावोस में कई भारतीय राज्यों के अधिकारियों से भी मिले। LinkedIn पर साझा की गई तस्वीरों के अनुसार, इन बैठकों में तंबाकू सेक्टर में दीर्घकालिक निवेश और मूल्य सृजन पर चर्चा हुई।

CEO का बयान: “प्रतिबंध अव्यावहारिक”

Philip Morris के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैसेक ओल्चाक (Jacek Olczak) ने Reuters को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत में सिगरेट की अनुमति है, लेकिन उनके अनुसार कम नुकसानदायक विकल्पों पर प्रतिबंध लगाना “अव्यावहारिक” है।

उन्होंने कहा,

“यह तर्कसंगत नहीं है कि सिगरेट खुले तौर पर बिकती रहे, लेकिन स्मोकिंग के विकल्प जैसे हीटेड तंबाकू और वेप्स पर रोक हो।”

हालांकि, कंपनी के प्रवक्ता ने स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन यह जरूर कहा कि Philip Morris दुनिया भर की सरकारों के साथ “स्मोक-फ्री उत्पादों के जरिए सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने” पर चर्चा करती रहती है।

भारत सरकार के इस फैसले से साफ है कि देश सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तंबाकू नियंत्रण पर सख्त रुख बनाए रखना चाहता है। वहीं, Philip Morris जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए भारत में अपने वैकल्पिक तंबाकू उत्पादों को लॉन्च करने की राह फिलहाल पूरी तरह बंद नजर आ रही है।

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