जनवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में तेज़ गिरावट देखने को मिली। बड़े इंडेक्स में लगभग 1% तक की गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों में बेचैनी बनी रही।
मुख्य वजहें:
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों के कारण जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी।
- विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा भारत के शेयरों से धन निकालने की प्रवृत्ति जारी रही जिससे बाजार पर दबाव बना।
शेयर बाजार की गिरावट अक्सर “risk-off” माहौल का संकेत देती है, जब निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं।
सोना और चांदी: रिकॉर्ड ऊँचाई या उछाल के पीछे के कारण
वहीं जनवरी 2026 में सोने और चांदी दोनों की कीमतों ने ऐतिहासिक उच्च स्तर छू लिए। सोने की कीमत की बात करें तो घरेलू बाजार में 10 ग्राम का भाव 1,55,428 रूपये तक पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $5,000 प्रति औंस के करीब पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच अस्थिरता के समय की मांग को दर्शाता है। दूसरी ओर चांदी में रिकॉर्ड उछाल आया है। चांदी की कीमतें भी ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुँचीं, रूपये 3,18,960 प्रति किलो तक रेकॉर्ड दर्ज हुआ। चांदी की बढ़ती कीमतों में उद्योगिक मांग, सुरक्षा निवेश की भूमिका, और आपूर्ति घाटा जैसे कारक शामिल हैं।
बाजार में अस्थिरता और सुरक्षित निवेश का रुझान
जब शेयर बाजार गिरता है, निवेशक जोखिम कम करने के लिए सोने और चांदी जैसे सुरक्षित आश्रयों में निवेश करते हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी को safe haven के रूप में देखा जाता है। वैश्विक आर्थिक सन्दर्भ (जैसे ब्याज दरों में संभावित कटौती, डॉलर का कमजोर रुख) का प्रभाव इनकी कीमतों को और ऊपर ले जाता है।
ETF में उतार-चढ़ाव: निवेशकों के लिए संकेत
सोने और चांदी के ETF (Exchange Traded Funds) में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, यानी कागजी निवेश और भौतिक धातु के भाव में अंतर आया। कुछ ETF गिरावट के बाद तेजी भी दिखा रहे हैं। यह दर्शाता है कि निवेशक केवल रुझानों के आधार पर short-term निर्णय ले रहे हैं, जो बाजार की अस्थिरता को बढ़ा सकता है।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार अलग-अलग व्यवहार करते हैं — एक में गिरावट के दौरान दूसरे में उछाल सामान्य है। लंबी अवधि के निवेशकों को सोने/चांदी की स्पेकुलेटिव उछाल से बचना चाहिए, क्योंकि रिपोट-बुकिंग और corrections आम हैं। विविध पोर्टफोलियो बनाएं जहाँ इक्विटी, कमोडिटीज़ और नकदी संतुलित हों।
गिरते बाजार में पूरा पैसा एक बार में लगाने की बजाय SIP या चरणबद्ध निवेश बेहतर रणनीति है। इससे आप औसत कीमत कम कर सकते हैं।
ऐसे समय में आदर्श संतुलन कुछ ऐसा हो सकता है (उदाहरण):
- 50–60% इक्विटी (धीरे-धीरे जोड़ें)
- 15–20% सोना (ETF या SGB के जरिए)
- 10–15% चांदी या अन्य कमोडिटी
- बाकी नकद / लिक्विड फंड (मौके के लिए)
निष्कर्ष
जनवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और सोना-चांदी के रेकॉर्ड उच्च स्तर ने निवेशकों को जोखिम और अवसर दोनों दिखाए। शेयर बाजार की कमजोरी ने सुरक्षित निवेश की ओर रुझान बढ़ाया, जिससे precious metals की कीमतें उछलीं। समझदारी से निवेश, जोखिम प्रबंधन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण ही इस तरह की बाजार स्थितियों में सफलता की कुंजी है।

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