दिल्ली

Strait of Hormuz संकट के बीच भी जारी है ईरान का तेल निर्यात, जानिए वैश्विक बाजार पर क्या पड़ेगा असर

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Strait of Hormuz संकट के बावजूद ईरान का तेल निर्यात जारी

इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद ईरान का कच्चे तेल का निर्यात लगभग सामान्य गति से जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार 28 फरवरी के बाद ईरान ने लगभग 13.7 मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया है।

टैंकर ट्रैकिंग एजेंसी TankerTrackers.com के विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। वहीं जहाज ट्रैकिंग सर्विस Kpler के अनुसार मार्च के पहले 11 दिनों में ही ईरान का निर्यात लगभग 16.5 मिलियन बैरल तक पहुंच गया।

अन्य देशों के जहाजों की आवाजाही हुई प्रभावित

जहां ईरान का निर्यात जारी है, वहीं Strait of Hormuz से गुजरने वाले कई अन्य देशों के तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है। सुरक्षा जोखिम और हालिया हमलों के कारण कई गैर-ईरानी कंपनियों ने अपने उत्पादन में कटौती कर दी है।

युद्ध की आशंका से पहले ही बढ़ाया था निर्यात

संभावित सैन्य संघर्ष को देखते हुए ईरान ने फरवरी में ही अपने तेल निर्यात को बढ़ा दिया था। उस समय निर्यात लगभग 2.17 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था।

28 फरवरी के बाद ट्रैक किए गए डेटा के अनुसार:

  • 6 बड़े तेल टैंकर ईरान से रवाना हुए
  • इनमें अमेरिकी प्रतिबंधित जहाज Cuma भी शामिल था
  • कुछ टैंकर सिंगापुर के पास के समुद्री क्षेत्र तक पहुंच चुके हैं

मार्च में निर्यात की औसत दर

डेटा के अनुसार फरवरी के अंत से ईरान का तेल निर्यात लगभग 1.1 से 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बीच रहा है। यह 2023 के औसत 1.69 मिलियन बैरल प्रतिदिन से थोड़ा कम है।

फिलहाल Kharg Island पर कई बड़े तेल टैंकर अभी भी लोडिंग कर रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि निर्यात आगे भी जारी रह सकता है।

Strait of Hormuz खुला रखना ईरान के हित में

समुद्री व्यापार विशेषज्ञ James Lightbourn के अनुसार:

जब तक ईरान अपने तेल जहाज इस क्षेत्र से निकाल रहा है, तब तक उसके लिए Strait of Hormuz को पूरी तरह बंद करना फायदेमंद नहीं होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने जहाजों को अपने समुद्री क्षेत्र के भीतर रखकर अतिरिक्त सुरक्षा भी प्रदान कर रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां व्यवधान आता है तो:

  • वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं
  • सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
  • ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है

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