मध्य प्रदेश

जल गंगा संवर्धन अभियान: हर बूंद बचाने का संकल्प, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा संदेश

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जल संरक्षण को मिला नया संकल्प

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि यह अभियान सनातन संस्कृति की पवित्र धारा से जुड़ा हुआ है। दरअसल, पानी का महत्व जीवन के हर पहलू में है और इसके बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है।

साथ ही, उन्होंने प्रदेशवासियों को गुड़ी पड़वा, विक्रम संवत्, चेटीचंड और चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

तीन महीने तक चलेगा विशेष अभियान

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष जल गंगा संवर्धन अभियान तीसरे चरण में प्रवेश कर चुका है।

  • पहले वर्ष यह अभियान 30 दिनों तक चला
  • दूसरे वर्ष इसे 120 दिनों तक बढ़ाया गया
  • वहीं, इस बार यह अभियान 139 दिनों तक चलेगा

इतना ही नहीं, इस दौरान लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण और संचय के कार्य प्रदेशभर में किए जाएंगे।

मध्यप्रदेश: नदियों का मायका

मुख्यमंत्री ने खासतौर पर कहा कि मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है, क्योंकि यहां से 250 से अधिक नदियां निकलती हैं।

उदाहरण के तौर पर, मां नर्मदा का जल न केवल प्रदेश बल्कि गुजरात तक जीवन और समृद्धि पहुंचाता है। इसके अलावा, नदी जोड़ो परियोजनाओं से राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी लाभ मिल रहा है।


इंदौर को मिली विकास कार्यों की सौगात

इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कई विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी किया।

  • बिलावली तालाब
  • लिम्बोदी तालाब
  • छोटा सिरपुर तालाब

इन सभी के जीर्णोद्धार सहित करीब 22 करोड़ रुपये के कार्यों की सौगात दी गई।

“जल है तो कल है” का संदेश

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि “जल है तो कल है” केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है।

इसके साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील की कि जल का अपव्यय रोकें और हर बूंद को सहेजने का प्रयास करें।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय अभियान

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण एक राष्ट्रीय अभियान बन चुका है।

इसी क्रम में, मध्यप्रदेश में लाखों जल संरचनाओं का निर्माण और पुनरुद्धार किया जा चुका है। खासकर इंदौर में बावड़ियों, कुओं और तालाबों के पुनर्जीवन का कार्य उल्लेखनीय रहा है।

नदियां हैं जीवन की धमनियां

मुख्यमंत्री ने नदियों की तुलना शरीर की रक्त धमनियों से करते हुए कहा कि ये पृथ्वी को जीवन देती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्राचीन समय में सम्राट विक्रमादित्य, अहिल्याबाई होल्कर और अन्य शासकों द्वारा बनाए गए जल स्रोत आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

संस्कृति और प्रकृति का गहरा संबंध

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति को पराक्रम, पुरुषार्थ और उत्सव की संस्कृति बताया।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में ऋतुओं और तिथियों के अनुसार त्योहार मनाए जाते हैं, जो प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को दर्शाते हैं।

आधुनिक जीवन में सावधानी भी जरूरी

हालांकि, मुख्यमंत्री ने आधुनिक संसाधनों के उपयोग में सावधानी बरतने की भी सलाह दी।

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग में सतर्कता
  • बिजली के सर्किट की नियमित जांच
  • घरों में सुरक्षा के उपाय

इन सभी बातों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

अंततः, जल गंगा संवर्धन अभियान केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

इसलिए, यदि हम सभी मिलकर जल संरक्षण का संकल्प लें, तो न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित किया जा सकता है।

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