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कामदगिरि परिक्रमा का महत्व और नियम: चित्रकूट की आध्यात्मिक यात्रा

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जब भी मैं चित्रकूट पहुंचता हूं, सबसे पहले जो ऊर्जा महसूस होती है, वह कामदगिरि पर्वत के चारों ओर घूमती श्रद्धा की होती है। दरअसल, कामदगिरि केवल एक पहाड़ नहीं है — यह आस्था का जीवंत केंद्र है।

यही कारण है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां परिक्रमा करने आते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि कामदगिरि परिक्रमा इतनी महत्वपूर्ण क्यों मानी जाती है?

कामदगिरि पर्वत का पौराणिक महत्व

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “कामदगिरि” शब्द का अर्थ क्या है।
संस्कृत में “कामद” का अर्थ होता है — इच्छाओं को पूर्ण करने वाला, और “गिरि” का अर्थ है पर्वत।

मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का एक लंबा समय चित्रकूट में बिताया। विशेष रूप से कामदगिरि पर्वत को उनका निवास स्थान माना जाता है। इसलिए यह पर्वत स्वयं भगवान राम का स्वरूप माना जाता है।

यही वजह है कि भक्त इस पर्वत की परिक्रमा करते हैं — क्योंकि वे मानते हैं कि यह सीधे भगवान की परिक्रमा है।

कामदगिरि परिक्रमा की दूरी और मार्ग

अब यदि व्यावहारिक जानकारी की बात करें तो:

  • परिक्रमा की कुल दूरी लगभग 5 किलोमीटर है
  • मार्ग पूरी तरह पक्का बना हुआ है
  • रास्ते में छोटे-छोटे मंदिर और आश्रम पड़ते हैं
  • परिक्रमा की शुरुआत मुख्य द्वार से की जाती है

हालांकि, सुबह के समय परिक्रमा करना अधिक शुभ और सुविधाजनक माना जाता है, क्योंकि उस समय वातावरण शांत और शीतल होता है।

कामदगिरि परिक्रमा का आध्यात्मिक महत्व

  1. माना जाता है कि परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  2. विशेष रूप से अमावस्या के दिन यहां भारी भीड़ रहती है।
  3. कई श्रद्धालु 108 बार परिक्रमा करने का संकल्प भी लेते हैं।
  4. यह परिक्रमा मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करती है।

इसके अतिरिक्त, स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई परिक्रमा जीवन की बाधाओं को दूर करती है।

कामदगिरि परिक्रमा के नियम

हालांकि यहां कोई कठोर नियम नहीं हैं, फिर भी कुछ परंपराएं अवश्य निभाई जाती हैं:

  • परिक्रमा नंगे पांव की जाती है
  • पर्वत पर चढ़ना वर्जित माना जाता है
  • शालीन वस्त्र पहनना उचित है
  • मार्ग में स्वच्छता बनाए रखें
  • भगवान का नाम स्मरण करते हुए परिक्रमा करें

इसके अलावा, कई भक्त परिक्रमा से पहले स्नान कर रामघाट पर दर्शन करते हैं।

परिक्रमा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

यात्रा के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • गर्मी के मौसम में पानी साथ रखें
  • भीड़ वाले दिनों में सुबह जल्दी पहुंचें
  • बुजुर्गों के लिए आरामदायक गति से चलना बेहतर है
  • स्थानीय दुकानदारों से पूजा सामग्री आसानी से मिल जाती है

इस प्रकार, थोड़ी तैयारी आपकी यात्रा को अधिक सुखद बना सकती है।

एक यात्री के रूप में मेरा अनुभव

जब मैंने पहली बार कामदगिरि की परिक्रमा की, तो मुझे केवल धार्मिक भाव ही नहीं बल्कि एक गहरा आंतरिक संतुलन भी महसूस हुआ।

शुरुआत में भीड़ और हलचल दिखाई देती है, लेकिन जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, मन स्वतः शांत होने लगता है। ऐसा लगता है जैसे हर कदम के साथ मन का बोझ हल्का हो रहा हो।

यही कामदगिरि की असली शक्ति है — यह केवल पैरों की यात्रा नहीं, बल्कि मन की यात्रा है।

Chitrakoot Dham: Shri Kamta Nath Mandir story कामदगिरी चित्रकूट धाम का मुख्य पवित्र स्थान है। संस्कृत शब्द ‘कामदगिरी’ का अर्थ ऐसा पर्वत है, जो सभी इच्छाओं और कामनाओं को पूरा करता है। माना जाता है कि यह स्थान अपने वनवास काल के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी का निवास स्थल रहा है। उनके नामों में से एक भगवान कामतानाथ, न केवल कामदगिरी पर्वत के बल्कि पूरे चित्रकूट के प्रमुख देवता हैं।

चित्रकूट कैसे पहुंचे?

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्रकूट धाम करवी
  • निकटतम एयरपोर्ट: प्रयागराज / खजुराहो
  • सड़क मार्ग से: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों ओर से पहुंचा जा सकता है

इसलिए, यात्रा की योजना बनाना भी आसान है।

FAQ (People Also Ask)

प्रश्न: कामदगिरि परिक्रमा कितनी लंबी है?
उत्तर: लगभग 5 किलोमीटर।

प्रश्न: क्या महिलाएं परिक्रमा कर सकती हैं?
उत्तर: हां, कोई प्रतिबंध नहीं है।

प्रश्न: परिक्रमा में कितना समय लगता है?
उत्तर: सामान्य गति से 1.5 से 2 घंटे।

प्रश्न: कामदगिरि किस राज्य में स्थित है?
उत्तर: चित्रकूट, जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है।

अंततः, कामदगिरि परिक्रमा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। यदि आप चित्रकूट जा रहे हैं, तो इस परिक्रमा को अवश्य करें — क्योंकि यहीं आपको आस्था, इतिहास और आत्मिक शांति तीनों एक साथ मिलेंगे।

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