मध्य प्रदेश

किसान कल्याण और शिक्षा सुधार से मध्यप्रदेश को नई दिशा दे रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए डॉ. मोहन यादव ने किसान समृद्धि और शिक्षा सुधार को विकास की दो प्रमुख आधारशिलाएं बताया है। ग्वालियर के कुलैथ में आयोजित विशाल किसान सम्मेलन और भोपाल में “कर्मयोगी बनें” कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कृषि, पशुपालन, दूध उत्पादन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

ग्वालियर में किसान सम्मेलन: पशुपालन और दूध उत्पादन पर जोर

ग्वालियर जिले के ग्राम कुलैथ में आयोजित किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए दृढ़संकल्पित है। विधानसभा में 4.38 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया गया है, जिसमें किसानों के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश लंबे समय से कृषि उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन अब किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को विशेष बढ़ावा दिया जाएगा। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के माध्यम से दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख घोषणाएं:

  • किसानों की पट्टों वाली जमीन की रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
  • सोलर पंप वितरण से किसानों को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
  • केन-बेतवा लिंक परियोजना से सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा।
  • पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों को सुपोषण हेतु नि:शुल्क दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
  • 87 करोड़ रुपये से अधिक के 41 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि-पूजन।

सम्मेलन में पारंपरिक लोकगीत, बैलगाड़ी दौड़ और ग्रामीण विकास की कई सौगातों की घोषणा भी की गई।

भोपाल में शिक्षा पर मंथन: कर्मयोगी शिक्षाविद् का संकल्प

भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “कर्मयोगी बनें” कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने शिक्षा को जीवन से जोड़ने और समयानुकूल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की कार्यशालाएं हैं।

प्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। शिक्षा व्यवस्था को सरल, रोजगारोन्मुख और सामाजिक उपयोगिता से जोड़ने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है।

शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख बिंदु:

  • विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय की शुरुआत।
  • स्थानीय उद्योगों की जरूरत के अनुसार इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और आईटीआई में नए कोर्स।
  • डिग्री और रोजगार के बीच की दूरी कम करने पर जोर।
  • पांच वर्षों में प्रदेश के बजट को दोगुना करने का लक्ष्य।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े 16 विभागों के समग्र लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प साकार होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार कृषि और शिक्षा—दोनों क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है। एक ओर किसान कल्याण वर्ष के तहत पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, सिंचाई और भूमि रजिस्ट्री जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर शिक्षा को रोजगार और राष्ट्र निर्माण से जोड़कर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है।

इन पहलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार समावेशी विकास के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

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