मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्य जीव संरक्षण, वन विभाग की भूमिका और सह-अस्तित्व मॉडल की सराहना की। साथ ही मध्यप्रदेश के पुष्प उत्पादन, किसानों की आय वृद्धि और फूलों के निर्यात को लेकर बड़ी घोषणाएँ कीं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्य जीव संरक्षण, वन विभाग की उपलब्धियों और राज्य में तेजी से बढ़ रहे पुष्प उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही हैं। उन्होंने वन विभाग की भूमिका को मानव और वन्य जीवों के बीच सह-अस्तित्व विकसित करने में सराहनीय बताया। वहीं पुष्प महोत्सव के अवसर पर किसानों की आय बढ़ाने में फूलों की खेती को बड़ा माध्यम बताया।
दो अलग कार्यक्रमों में दिए गए अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण से लेकर पुष्प निर्यात तक राज्य की प्रगति को रेखांकित किया।
वन्य जीव और मनुष्य के सह-अस्तित्व में वन विभाग की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का वन विभाग जल, थल और नभ—तीनों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की पुनर्स्थापना वन विभाग की दक्षता का बड़ा उदाहरण है। चंबल में घड़ियाल और नर्मदा में मगरमच्छों को स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ना भी उल्लेखनीय उपलब्धि रही है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग ने वन्य जीवों और स्थानीय रहवासियों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत किया है। राज्य सरकार असम से भी वन्य जीव लाने के प्रयास कर रही है।
आईएफएस मीट और वानिकी सम्मेलन का शुभारंभ
भोपाल स्थित आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित वानिकी सम्मेलन एवं IFS मीट-2026 का मुख्यमंत्री ने शुभारंभ किया। इस अवसर पर IFS थीम सॉन्ग और वीडियो का लोकार्पण भी किया गया।
पूर्व पीसीसीएफ डॉ. पी.बी. गंगोपाध्याय को वनों की सुरक्षा और सुधार में योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड-2026 प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजनों से वरिष्ठ और वर्तमान अधिकारियों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होता है।
वनग्रामों और ग्रामीणों के लिए सहयोगी बन रहा वन विभाग
मुख्यमंत्री ने बताया कि वन अधिकारी और कर्मचारी जंगलों के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए मार्गदर्शक और सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। कोर एरिया और बफर जोन के बीच तार फेंसिंग की शुरुआत से वन्य जीव और ग्रामीण दोनों को सुरक्षा मिलेगी।
नर्मदा बेसिन में अविरल नर्मदा योजना के तहत बड़े स्तर पर नदी पुनर्भरण और पौधारोपण कार्य जारी हैं। हर साल 5 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं।
मध्यप्रदेश में पुष्प उत्पादन से बढ़ रही किसानों की आय
राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के अग्रणी पुष्प उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां के फूल अब पेरिस और लंदन तक निर्यात हो रहे हैं।
उन्होंने पुष्प महोत्सव की अवधि एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन करने की घोषणा भी की। प्रदर्शनी में किसानों, नर्सरी संचालकों और खरीदारों ने भाग लिया।
40 हजार से अधिक किसान जुड़े पुष्प खेती से
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लगभग 40 हजार किसान पुष्प उत्पादन से जुड़े हैं और 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है। वर्ष 2021-22 में यह क्षेत्र 37 हजार हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 44 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है।
प्रदेश का पुष्प उत्पादन 86 लाख टन तक पहुंच चुका है। राज्य सरकार किसानों को प्रशिक्षण, अनुदान, पॉलीहाउस और सेडनेट हाउस स्थापना में सहायता दे रही है।
किसानों के लिए मूल्य और अनुदान योजनाओं की घोषणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को गेहूं का 2600 रुपये प्रति क्विंटल भाव दिया जा रहा है। वर्ष 2026 में यह बढ़कर 2700 रुपये और 2030 तक 3000 रुपये प्रति क्विंटल होने की संभावना है।
सूक्ष्म सिंचाई योजना, पीएमएफएमई योजना और अन्य कृषि योजनाओं के माध्यम से किसानों को सब्सिडी और तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। कृषि कल्याण वर्ष के तहत 16 विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं।

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