What is Women’s Freedom in Modern Society?
कभी-कभी मैं खुद से एक सवाल पूछती हूँ — क्या महिला की आज़ादी सच में आज़ादी है? या उसके साथ एक अदृश्य guilt free में आता है? मैं एक महिला हूँ, और मैं अपने फैसले खुद लेना चाहती हूँ। मैं अपने सपनों को जीना चाहती हूँ, career चुनना चाहती हूँ, “ना” कहना चाहती हूँ, अपने लिए time निकालना चाहती हूँ। लेकिन हर बार जब मैं ऐसा करती हूँ, भीतर कहीं एक आवाज़ उठती है — “क्या मैं selfish हो रही हूँ?” यही वह emotional conflict है, जो शायद सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि दुनिया भर की लाखों महिलाओं का सच है।
मैं एक महिला हूँ।
मैं अपने फैसले खुद लेना चाहती हूँ।
लेकिन जब भी मैं अपने लिए खड़ी होती हूँ — भीतर एक हल्की-सी आवाज़ उठती है:
“क्या मैं स्वार्थी हो रही हूँ?”
यही है वह अदृश्य बोझ — Guilt।
हाल के global discussions में “Emotional Labor” और “Mental Load” जैसे terms सोशल मीडिया और research papers में तेजी से उभरे हैं। यह दिखाता है कि guilt सिर्फ personal issue नहीं, बल्कि structural issue है। आज दुनिया भर में “Women Empowerment” की बात हो रही है। Gender Equality पर कानून बन रहे हैं। लेकिन क्या महिला सच में guilt-free जीवन जी पा रही है?
आज Women Empowerment और Gender Equality की बातें global level पर हो रही हैं। Laws बन रहे हैं, campaigns चल रहे हैं, hashtags ट्रेंड कर रहे हैं। लेकिन empowerment सिर्फ policies से नहीं आता। असली empowerment तब आता है जब एक महिला बिना अपराधबोध के अपने लिए जी सके। भारत में हमें बचपन से सिखाया जाता है कि “अच्छी लड़की त्याग करती है”, “पहले परिवार, फिर तुम”, “ज़्यादा ambition ठीक नहीं।” लेकिन यह conditioning सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। America, UK और Australia में भी Mom Guilt और Work-Life Balance जैसे शब्द रोज़ discuss होते हैं। यानी guilt एक global emotional reality है।
“Mom guilt isn’t a natural instinct — it’s learned behavior in response to unrealistic expectations.” — (from an international blog)
अगर आप एक कामयाब महिला हैं जो मदरहुड, करियर और कभी न खत्म होने वाले मेंटल बोझ को संभाल रही हैं, तो हो सकता है कि आपने “मॉम गिल्ट” महसूस किया हो – वो परेशान करने वाली भावना कि आप कभी भी काफी नहीं कर रही हैं।
माँ की ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपनी आज़ादी बचाना मुश्किल ज़रूर है, नामुमकिन नहीं।

सबसे पहले यह मानना ज़रूरी है कि माँ बनना “ख़ुद को मिटा देना” नहीं है। आप एक इंसान हैं, आपकी पहचान, सपने और इच्छाएँ भी उतनी ही अहम हैं जितनी बच्चे की ज़रूरतें।
- Self-Guilt छोड़िए
- छोटे-छोटे boundaries बनाइए
- अपनी पहचान ज़िंदा रखिए
- बच्चे को dependency नहीं, confidence दीजिए
Read also : माँ होना कमजोरी नहीं, सबसे बड़ी ताक़त है
यह लेख भारतीय महिला के संदर्भ में माँ की उस ताक़त को उजागर करता है, जो घर की चारदीवारी से निकलकर समाज, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों को आकार देती है।
आज़ादी का मतलब क्या है?
मेरे लिए आज़ादी का मतलब सिर्फ बाहर निकलने की छूट नहीं है।
यह है —
- अपने सपनों को चुनने की छूट
- अपने शरीर और मन पर अधिकार
- रिश्तों में सम्मान
- और सबसे जरूरी — बिना डर और अपराधबोध के जीना
लेकिन समाज ने आज़ादी को अक्सर “बगावत” बना दिया है।
अगर मैं अपनी खुशी चुनूँ, तो कहा जाता है — “स्वार्थी है।”
अगर मैं परिवार से पहले करियर चुनूँ, तो कहा जाता है — “घर नहीं संभाल पाई।”
अगर मैं अपनी बात खुलकर रखूँ, तो कहा जाता है — “ज़्यादा बोलती है।”
Gender Equality और Double Standards
Gender Equality का मतलब सिर्फ equal salary नहीं है।
यह equal respect और equal freedom भी है।
अगर पुरुष देर तक काम करे — ambitious।
अगर महिला करे — घर पर ध्यान नहीं।
अगर पुरुष assertive हो — confident।
अगर महिला assertive हो — arrogant।
यही double standard guilt को जन्म देता है।
यह गिल्ट आता कहाँ से है?
यह गिल्ट जन्म से नहीं होता।
यह हमें सिखाया जाता है।
बचपन से हमें बताया जाता है:
- “लड़कियाँ त्याग करती हैं।”
- “पहले घर, फिर तुम।”
- “ज़्यादा चाहोगी तो लोग क्या कहेंगे?”
धीरे-धीरे हम अपने ही सपनों से माफी मांगने लगती हैं।
मैंने महसूस किया है — जब मैं अपने लिए खड़ी होती हूँ, तो भीतर एक आवाज़ कहती है,
“क्या मैं गलत हूँ?”
पर सच तो यह है —
गलत मैं नहीं, वह सोच है जो औरत को सिर्फ दूसरों के लिए जीना सिखाती है।
गिल्ट और जिम्मेदारी में फर्क
एक औरत जिम्मेदार हो सकती है —
लेकिन जिम्मेदारी का मतलब यह नहीं कि वह अपनी पहचान मिटा दे।
गिल्ट तब पैदा होता है जब:
- हम खुद को हर किसी की खुशी का ठेकेदार समझ लेते हैं
- हम “ना” कहने को अपराध मान लेते हैं
- हम अपनी जरूरतों को आखिरी नंबर पर रख देते हैं
मैंने सीखा है —
अपना ख्याल रखना स्वार्थ नहीं है।
थक जाना कमजोरी नहीं है।
और अपनी इच्छा जताना बदतमीज़ी नहीं है।
Work-Life Balance: क्या संतुलन सिर्फ महिला की जिम्मेदारी है?
Corporate culture में “Work-Life Balance” एक बड़ा discussion topic है।
लेकिन असल में यह balance अक्सर महिला के कंधों पर ही क्यों होता है?
- ऑफिस में prove करना
- घर में perfect होना
- समाज में आदर्श दिखना
यह constant performance pressure मानसिक तनाव बढ़ाता है।
Boundaries: “ना” कहना सीखना
International self-growth movements में एक शब्द बहुत popular है — Boundaries।
Boundaries का मतलब है:
- अपनी limits तय करना
- emotional exploitation से बचना
- खुद को respect देना
जब महिला boundaries बनाती है,
तो उसे selfish कहा जाता है।
लेकिन सच यह है —
Boundaries self-respect का दूसरा नाम हैं।
यहां मुझे ये अर्टिकल बहुत अच्छा लगा आप भी पढ़ सकते हैं:
Ayesha Curry ने एक इंटरव्यू में कहा: Ayesha Curry says mom guilt is real — but so is her need to keep her own identity

एक औरत की दूसरी औरतों से बात
अगर आप भी कभी अपनी खुशी चुनने पर गिल्ट महसूस करती हैं,
तो याद रखिए —
आप गलत नहीं हैं।
आप बस इंसान हैं।
आपको भी आराम चाहिए।
आपको भी सम्मान चाहिए।
आपको भी अपने सपनों का हक है।
और सबसे जरूरी —
आपको अपनी आज़ादी के लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं है।
चाहे आप India में हों, New York में हों या London में, अगर आप एक महिला हैं, तो आपने कभी न कभी guilt और freedom के बीच का संघर्ष जरूर महसूस किया होगा।
Women’s Freedom is not a rebellion, it is a basic human right.
निष्कर्ष: खुद को माफ करना ही पहली आज़ादी है
मैं आज भी सीख रही हूँ, अपने लिए खड़े होने पर guilt महसूस न करना। अगर आप भी कभी अपनी खुशी चुनने पर अपराधबोध महसूस करती हैं, तो याद रखिए – आप गलत नहीं हैं, आप इंसान हैं।
महिला की आज़ादी परिवार के खिलाफ नहीं है, यह खुद के पक्ष में है और शायद यही Women Empowerment की असली शुरुआत है।
Read Also : Therapy insight: Experts explain that mom guilt affects even working moms and it’s a global emotional challenge.
FAQs (Google Discover Friendly Section)
Q1: Mom Guilt क्या होता है?
Mom Guilt वह अपराधबोध है जो माँ अपने बच्चों या परिवार को पर्याप्त समय न दे पाने पर महसूस करती है।
Q2: Emotional Labor क्या है?
Emotional Labor वह भावनात्मक ज़िम्मेदारी है जो अक्सर महिलाएँ रिश्तों को संभालने के लिए निभाती हैं।
Q3: Women Empowerment का असली मतलब क्या है?
सिर्फ अधिकार मिलना नहीं, बल्कि बिना guilt के अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता।
Q4: क्या महिला की आज़ादी परिवार के खिलाफ है?
नहीं। यह self-respect और equality के पक्ष में है।
Q5: क्या महिला की आज़ादी भारतीय समाज तक सीमित मुद्दा है?
नहीं। USA, UK और अन्य देशों में भी Mom Guilt और Gender Pressure पर खुली चर्चा हो रही है।
Q6: गिल्ट से बाहर कैसे निकला जाए?
- Self-Care को प्राथमिकता दें
- Boundaries बनाएं
- अपने फैसलों के लिए खुद को दोषी न मानें
- जरूरत हो तो professional help लें

Comments