उत्तर प्रदेश

मथुरा में गौ-रक्षक ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत पर बवाल, 10 किमी हाईवे जाम; पथराव-लाठीचार्ज में कई घायल

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मथुरा में हादसे के बाद भड़की हिंसा, हालात बेकाबू

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में गौ-रक्षक चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। गुस्साए लोगों ने दिल्ली-मथुरा हाईवे पर करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लगा दिया। पुलिस को खदेड़ने के साथ पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया।

अपडेट: प्रशासन का बयान—हर एंगल से होगी जांच, हादसे की वजह बताई

मथुरा घटना को लेकर प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कई अहम तथ्य सामने रखे हैं। प्रशासन के अनुसार, सुबह करीब 4 बजे हरियाणा सीमा से लगे कोसी थाना क्षेत्र में एक वाहन में गोवंश होने की सूचना मिली थी।

बताया गया कि चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ अपने शिष्यों के साथ मौके पर पहुंचे और नगालैंड नंबर के एक कंटेनर को रोककर उसकी जांच कर रहे थे। जांच के दौरान कंटेनर में साबुन, फिनाइल और शैम्पू जैसे सामान पाए गए।

प्रशासन के मुताबिक, उसी दौरान घने कोहरे की वजह से पीछे से आ रहे राजस्थान नंबर के एक ट्रक (जिसमें तार लदा था) ने टक्कर मार दी। इस हादसे में बाबा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ट्रक चालक घायल हो गया। ट्रक भी क्षतिग्रस्त हुआ है।

खबर के मुताबिक DIG शैलेश पांडे ने बताया – बाबा ने शक के आधार पर एक ट्रक को रोका था। यह लोग उसे चेक कर रहे थे। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम थी। पीछे से एक और ट्रक आया। उसने खड़े ट्रक में धक्का मारा। इससे बाबा की मौत हो गई।

अधिकारियों का कहना है कि भ्रामक सूचनाओं के चलते लोगों में आक्रोश फैला, जिसके कारण हाईवे जाम और पथराव जैसी घटनाएं हुईं। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं और लोगों को समझाया जा रहा है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी। साथ ही, स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

ट्रक से कुचलकर हत्या का आरोप

घटना शुक्रवार देर रात की बताई जा रही है। बरसाना के आजनौख गांव में गौशाला चलाने वाले बाबा को सूचना मिली थी कि कोसी क्षेत्र में एक ट्रक में अवैध रूप से गौवंश ले जाया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि बाबा अपने दो साथियों के साथ बाइक से ट्रक का पीछा करते हुए करीब 7 किलोमीटर तक गए। कोटवन चौकी क्षेत्र के नवीपुर गांव के पास उन्होंने ट्रक को ओवरटेक कर रोकने की कोशिश की।

आरोप है कि ट्रक चालक ने रफ्तार बढ़ाकर उन्हें कुचल दिया और मौके से फरार हो गया। घटना में बाबा की मौके पर ही मौत हो गई।

भीड़ का उग्र प्रदर्शन, पुलिस पर हमला

घटना की खबर फैलते ही हजारों लोग मौके पर जुट गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग करते हुए हाईवे जाम कर दिया।

पुलिस के पहुंचने पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया और 5 से 6 पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की। कुछ जगहों पर फायरिंग की भी खबर सामने आई है। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने बल प्रयोग किया।

CM योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

गुस्साए लोगों का आरोप है कि यह घटना साजिश के तहत की गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों को मौके पर लाकर सख्त सजा देने की मांग की।

बताया जा रहा है कि जिस समय यह बवाल हो रहा था, उससे करीब 25 किलोमीटर दूर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर रही थीं।

कौन थे ‘फरसा वाले बाबा’

चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा इलाके में एक सक्रिय गौ-रक्षक के रूप में जाने जाते थे। वे गौशाला चलाते थे और बीमार गायों की सेवा के साथ गौ-तस्करी के खिलाफ लगातार आवाज उठाते थे।

फरसा वाले बाबा का असली नाम चंद्रशेखर था. वह अपने साथ कुल्हाड़ी जैसा शस्त्र फरसा रखते थे. इसी खास अंदाज की वजह से उन्हें ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता था. वो मुख्य रूप से मथुरा के कोसीकलां और आसपास के इलाकों में अवैध गौ तस्करी को रोकने के लिए सक्रिय रहते थे. बाबा कुछ हिंदूवादी संगठनों से भी जुड़े हुए थे. 

कैसे पड़ा बाबा का नाम फरसा?

चंद्रशेखर अपने खास अंदाज और हमेशा साथ रखी कुल्हाड़ी की वजह से इलाके में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थे. उनकी हत्या की खबर के बाद पूरे इलाके में शोक और गुस्से की लहर फैल गई. आगरा-दिल्ली हाईवे पर लोगों के गुस्से में पथराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया.

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