प्राण की गति क्या होती है?
योग और आयुर्वेद में प्राण को जीवन ऊर्जा कहा गया है। हमारी सांसों की गति ही प्राण की गति को दर्शाती है। जब हम तनाव, डर या चिंता में होते हैं तो सांस तेज हो जाती है, और जब मन शांत होता है तो प्राण की गति स्वतः धीमी हो जाती है।
प्राण की गति तेज होने के लक्षण
- बार-बार गहरी सांस लेने की इच्छा
- बेचैनी और घबराहट
- दिल की धड़कन तेज होना
- ध्यान में मन न लगना
- नींद का ठीक से न आना
प्राण की गति कम क्यों करनी चाहिए?
प्राण की गति कम करने से—
- मन शांत और स्थिर होता है
- तनाव और चिंता कम होती है
- हार्ट रेट संतुलित रहती है
- ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है
- नींद की गुणवत्ता सुधरती है
5 मिनट का प्राण-संतुलन योगिक रूटीन
1. गहरी सांस (Deep Breathing – 4:6 विधि)
- 4 सेकंड में नाक से सांस लें
- 6 सेकंड में धीरे-धीरे सांस छोड़ें
- 1 मिनट तक अभ्यास करें
👉 यह तरीका तुरंत सांस की गति कम करता है।
2. अनुलोम-विलोम प्राणायाम
- दाहिनी नासिका बंद कर बाईं से सांस लें
- बाईं बंद कर दाईं से सांस छोड़ें
- फिर दाईं से लें और बाईं से छोड़ें
👉 2 मिनट तक करने से प्राण प्रवाह संतुलित होता है।
3. भ्रामरी प्राणायाम
- नाक से गहरी सांस लें
- सांस छोड़ते समय “ंम्म्म” की मधुर ध्वनि निकालें
- 4–5 बार दोहराएं
👉 मस्तिष्क को तुरंत शांति मिलती है।
4. शांत बैठकर सांस को देखना (Mindful Breathing)
- कुछ न करें
- बस सांस को आते-जाते देखें
- 30 सेकंड तक
👉 सांस अपने आप धीमी और गहरी हो जाती है।
Reducing the Speed of Breath : प्राण की गति कम करने के अतिरिक्त उपाय
- मोबाइल और स्क्रीन समय कम करें
- देर रात भारी भोजन न करें
- सुबह खाली पेट हल्का योग करें
- रोज़ 7–8 घंटे की नींद लें
किसे सावधानी रखनी चाहिए?
अगर आपको—
- अस्थमा
- बहुत कम BP
- चक्कर आने की समस्या
- हार्ट डिज़ीज़
हो, तो सांस रोकने वाले प्राणायाम कम करें और योग विशेषज्ञ से सलाह लें।
निष्कर्ष
प्राण की गति कम करना कोई कठिन साधना नहीं है। रोज़ सिर्फ 5 मिनट का सही प्राणायाम अभ्यास आपकी सांस, मन और जीवन — तीनों को संतुलित कर सकता है। निरंतर अभ्यास से शरीर और मस्तिष्क दोनों स्वस्थ रहते हैं।

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