रिलेशनशिप

Seen पर Reply न आने की Psychology: जब वह Message देख कर भी चुप रह जाता है

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“मैं हर बार Message भेजती हूँ… और वह Seen करके चुप रह जाता है”

मैं यह सब किसी से शिकायत करने के लिए नहीं लिख रही हूँ,
बस इसलिए लिख रही हूँ क्योंकि मन भारी हो जाता है।

मैं उसे message भेजती हूँ —
कभी Good Morning,
कभी बस हाल पूछने के लिए।

कुछ देर बाद notification आता है — Seen
दिल खुश हो जाता है कि उसने देखा।

लेकिन फिर…
इंतज़ार शुरू हो जाता है।

5 मिनट…
10 मिनट…
1 घंटा…
कभी-कभी पूरा दिन।

Reply नहीं आता।

Seen पर Reply न आना सबसे पहले दिल को चोट देता है

शायद यह छोटी बात लगे,
लेकिन जब कोई अपना seen करके जवाब नहीं देता,
तो सबसे पहले दिल सवाल करता है—

क्या अब मैं ज़रूरी नहीं रही?
क्या मेरी बातें अब बोझ लगने लगी हैं?

लड़की होने के नाते हम message को शब्द नहीं,
feelings की तरह पढ़ते हैं।

Seen उम्मीद देता है,
और reply न आना उसी उम्मीद को तोड़ देता है।

जब मैंने उससे कारण पूछा… तो उसका जवाब और चुभ गया

एक दिन मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया—

“तुम message देख लेते हो, लेकिन reply क्यों नहीं देते?”

उसने बहुत casually कहा—

“जब call पर बात हो ही जाती है,
तो message का reply देने की क्या ज़रूरत है?”

वह मुस्कुरा रहा था…
और मैं चुप हो गई।

लेकिन सच कहूँ,
उसका जवाब मुझे सही नहीं लगा।

Call पर बात हो जाना क्या Message का जवाब न देने की वजह हो सकती है?

शायद उसकी नज़र में यह तर्क ठीक हो,
लेकिन मेरे दिल को यह बात समझ नहीं आई।

क्योंकि सवाल बात होने का नहीं था,
सवाल respect का था।

Message का reply कोई लंबी बातचीत नहीं माँगता—
बस यह एहसास दिलाता है कि—

“हाँ, तुम मायने रखती हो।”

यहीं से मन में शक ने जगह बना ली

उसके जवाब के बाद मेरे सवाल और गहरे हो गए—

  • क्या अब उसे मेरी बातें ज़्यादा लगने लगी हैं?
  • क्या वह सिर्फ तब बात करता है जब उसे सुविधा हो?
  • या फिर…
    क्या उसकी ज़िंदगी में कोई और आ गई है?

मैं जानती हूँ,
यह सोचना गलत भी हो सकता है।

लेकिन जब जवाब नहीं मिलता,
तो दिमाग खुद ही कहानी बना लेता है।

Psychology क्या कहती है? हर Seen धोखे का संकेत नहीं होता

यह समझना ज़रूरी है कि—

1. कुछ लोग emotions को हल्के में लेते हैं

उन्हें लगता है कि call पर बात हो गई,
तो रिश्ता निभ गया।

वे यह नहीं समझते कि
छोटे replies भी रिश्ते को ज़िंदा रखते हैं।

2. Convenience-based प्यार

कुछ लोग प्यार को अपनी सुविधा से जीते हैं—
जब मन हुआ call,
जब मन नहीं हुआ silence।

यह शायद उनकी आदत हो,
लेकिन यह बराबरी का रिश्ता नहीं होता।

3. अगर कोई और होता, तो व्यवहार और बदलता

अगर सच में कोई तीसरा होता,
तो सिर्फ message नहीं,
उसका समय, ध्यान और अपनापन भी बदल जाता।

लेकिन सवाल अब भी वही है — “क्या वह सही है?”

नहीं।
पूरी तरह से नहीं।

Call पर बात होना अच्छी बात है,
लेकिन यह message का reply न देने का बहाना नहीं हो सकता।

क्योंकि रिश्ता logic से नहीं,
effort से चलता है।

Seen पर Reply न आने से लड़की खुद पर शक करने लगती है

धीरे-धीरे सवाल बदलने लगते हैं—

  • क्या मैं ज़्यादा message करती हूँ?
  • क्या मुझे खुद को रोक लेना चाहिए?
  • क्या मैं clingy लग रही हूँ?

और यहीं से
self-respect और self-doubt की लड़ाई शुरू हो जाती है।

अब सवाल है — मैं क्या करूँ?

अगर आप भी मेरी तरह इस स्थिति में हैं, तो—

  • खुद को दोषी मानना बंद करें
  • बार-बार समझाने की कोशिश न करें
  • एक बार शांति से साफ कहें—
    “Reply न आना मुझे hurt करता है”

अगर इसके बाद भी कोई बदलाव न आए,
तो यह समझना ज़रूरी है—

वह इंसान शायद बुरा नहीं है,
लेकिन वह आपकी emotional ज़रूरतों के लिए सही भी नहीं है।

Conclusion:

Seen पर reply न आना कभी psychology है, कभी आदत, और कभी एक साफ संकेत।

जो आपको सच में चाहता है, वह यह नहीं पूछेगा कि—“Reply क्यों देना है?”

वह खुद समझेगा कि—आपका इंतज़ार भी मायने रखता है।

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