गर्भावस्था (Pregnancy) एक महिला के जीवन का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान शरीर, हार्मोन, मन और दिनचर्या – सब कुछ बदल जाता है। जब मेरी पहली बेटी के लिए गर्भवती थी, तो मुझे काफी कुछ झेलना पड़ा था, खासकर मेरी नींद पूरी नहीं होती थी नींद आती तो थी मगर बार-बार टूटती थी। रात में बार-बार नींद टूट जाती है या फिर सोने में बहुत परेशानी होती है।
एक माँ के रूप में यह समझना ज़रूरी है कि Pregnancy में कम सोना केवल थकान नहीं, बल्कि माँ और गर्भ में पल रहे शिशु – दोनों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। नींद की कमी लंबे समय तक रहे तो यह गर्भावस्था की जटिलताओं को बढ़ा सकती है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:
- Pregnancy में कम सोने के कारण
- सही और गलत तरीके से सोने के असर
- सोने की सही पोज़िशन
- क्या खाकर सोना चाहिए और क्या नहीं
- बार-बार नींद टूटने पर क्या करें
- और अंत में डॉक्टर की सलाह के अनुसार FAQ
गर्भावस्था में कम सोने के मुख्य कारण
जब मैं गर्भवती थी तो कम नींद के कारण मुझे काफी परेशानी होती थी, इस कारण में अपने चिकित्सक से जाकर मिली जिससे मुझे पता चला कि गर्भावस्था के तीनों ट्राइमेस्टर (पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही) में नींद से जुड़ी समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं। तो मैं गर्भावस्था में कम नींद के कारण क्या हैं आपके साथ शेयर करूंगी जैसा कि मेरी चिकित्सक ने मुझे बताया।
1. हार्मोनल बदलाव
प्रेगनेंसी में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है, जिससे दिन में सुस्ती आती है लेकिन रात की नींद गहरी नहीं हो पाती।
2. बार-बार पेशाब आना
बढ़ता हुआ गर्भाशय मूत्राशय पर दबाव डालता है, जिससे रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ता है।
3. पीठ और कमर दर्द
वजन बढ़ने और शरीर के संतुलन में बदलाव से पीठ, कमर और पैरों में दर्द होने लगता है, जिससे नींद टूटती है।
4. एसिडिटी और हार्टबर्न
खासकर दूसरी और तीसरी तिमाही में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ जाती है, जिससे लेटते ही जलन और बेचैनी होती है।
5. चिंता और भावनात्मक तनाव
डिलीवरी, बच्चे की सेहत और भविष्य को लेकर सोच-विचार भी नींद में बाधा बनता है।
Pregnancy में कम नींद: माँ और बच्चे के लिए खतरा?
माँ पर प्रभाव
अत्यधिक थकान और चिड़चिड़ापन : नींद पूरी न होने से शरीर और दिमाग को आराम नहीं मिलता, जिससे गर्भवती महिला जल्दी थक जाती है और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। यह रोज़मर्रा की गतिविधियों को भी प्रभावित करता है।
हाई ब्लड प्रेशर और प्रीक्लेम्पसिया का खतरा : लगातार नींद की कमी से हार्मोनल असंतुलन होता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इससे प्रीक्लेम्पसिया जैसी गंभीर समस्या का जोखिम बढ़ जाता है, जो माँ और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है।
इम्यून सिस्टम कमजोर होना : नींद की कमी से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, जिससे गर्भवती महिला को बार-बार इंफेक्शन, सर्दी-खांसी या अन्य बीमारियाँ होने की संभावना बढ़ जाती है।
डिप्रेशन और एंग्जायटी की संभावना : नींद पूरी न होने पर दिमाग पर लगातार तनाव बना रहता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान डिप्रेशन, घबराहट और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याएँ बढ़ सकती हैं।
बच्चे पर प्रभाव
बच्चे का वजन कम होना : माँ की नींद खराब होने से बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषण की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे जन्म के समय बच्चे का वजन सामान्य से कम हो सकता है।
प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा : कम नींद के कारण शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो समय से पहले डिलीवरी (Preterm Birth) का कारण बन सकते हैं।
गर्भ में विकास पर नकारात्मक असर : लगातार नींद की कमी बच्चे के ब्रेन और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

Pregnancy में सोने का सही तरीका (Correct Sleeping Positions)
अब हम गर्भावस्था में सोने के सही तरीके के बारे में जानेंगे जिससे हम सही और भरपूरी नींद मिल सके। गर्भावस्था में हम उन पोजिशन को जानेंगे जिससे माँ और बच्चे दोनों को सुरक्षा मिले।
1. बाईं करवट सोना (Left Side Sleeping)
यह गर्भावस्था में सबसे सुरक्षित और डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई पोज़िशन है।
फायदे:
- बच्चे तक ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है
- किडनी सही से काम करती हैं, सूजन कम होती है
- हार्ट पर दबाव कम पड़ता है
2. तकिए का सही उपयोग
- पैरों के बीच तकिया रखें
- पेट के नीचे सपोर्ट के लिए छोटा तकिया
- पीठ के पीछे तकिया ताकि पलट न सकें
3. पीठ के बल सोने से क्यों बचें?
तीसरी तिमाही में पीठ के बल सोने से Vena Cava नस दब सकती है, जिससे:
- चक्कर आना
- ब्लड प्रेशर गिरना
- बच्चे तक ऑक्सीजन कम पहुंचना
4. पेट के बल सोना – कब तक?
लेकिन ध्यान रखें पहली तिमाही तक कुछ महिलाओं को आराम मिलता है, लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, यह पोज़िशन असुरक्षित हो जाती है। इसलिए पेट के बल सोने का कम ही सोचें।
क्या खा कर सोना चाहिए और क्या नहीं?
सोने से पहले क्या खाएं?
- गुनगुना दूध – कैल्शियम और ट्रिप्टोफैन नींद में मदद करता है
- केला – मैग्नीशियम से मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं
- भीगे बादाम (2-3) – दिमाग को शांत करते हैं
- ओट्स या हल्का दलिया – पेट भरा रहता है, एसिडिटी नहीं होती
क्या नहीं खाना चाहिए?
- मसालेदार और तला हुआ भोजन
- चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक (कैफीन)
- बहुत ज्यादा मीठा
- बहुत अधिक पानी एक साथ
बार-बार नींद टूटती हो तो क्या करें?
1. सोने का एक तय समय बनाएं
रोज़ एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
2. सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी
ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है। यह दिमाग को बताती है कि अभी दिन हैं इसलिए नींद नहीं आती, हालांकि यह मैंने कहीं पढ़ा था, इसलिए इस बात पर मैं जोर नहीं दे रही हूं। क्योंकि जो अनुभव होगा वहीं मैं लिखती हूं न कि सुनी सुनाई बात।
3. हल्की एक्सरसाइज या प्रेगनेंसी योग
डॉक्टर की सलाह से हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग करें।
4. रिलैक्सेशन तकनीक
- गहरी सांस लेना
- हल्का मेडिटेशन
- शांत संगीत
5. दिन में झपकी सीमित रखें
दिन में बहुत देर सोने से रात की नींद प्रभावित होती है।
विशेष सलाह
- अगर नींद की समस्या बहुत ज़्यादा हो तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. अपने चिकित्सक को जरूर दिखायें केवल किसी लेख या विचारों से काम नहीं चलता।
- बिना डॉक्टर की सलाह के स्लीपिंग पिल्स बिल्कुल न लें.
- आयरन, कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी भी नींद खराब कर सकती है – टेस्ट कराएं.
FAQ: Pregnancy में कम सोना – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. प्रेगनेंसी में कितने घंटे सोना जरूरी है?
उत्तर: 7–9 घंटे की नींद आदर्श मानी जाती है।
Q2. क्या दिन में सोना नुकसानदायक है?
उत्तर: नहीं, लेकिन बहुत ज्यादा दिन में सोने से रात की नींद खराब हो सकती है।
Q3. तीसरी तिमाही में नींद क्यों ज्यादा खराब हो जाती है?
उत्तर: पेट का बढ़ना, हार्टबर्न, मूवमेंट और चिंता इसके मुख्य कारण हैं।
Q4. क्या तकिया लगाकर पीठ के बल सो सकते हैं?
उत्तर: पूरी तरह पीठ के बल सोना सुरक्षित नहीं है, हल्का साइड सपोर्ट बेहतर है।
Q5. कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
उत्तर: जब लगातार नींद न आए, सांस फूलने लगे, घबराहट या चक्कर आएं।

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