मध्य प्रदेश

उज्जैन रहा है प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान का वैश्विक केंद्र: CM डॉ. मोहन यादव

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‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन का हुआ भव्य शुभारंभ

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि विज्ञान और खगोल ज्ञान का भी प्राचीन वैश्विक केंद्र रहा है। उन्होंने बताया कि यहां सदियों पहले सूर्य की छाया के आधार पर समय मापने की तकनीक विकसित की गई थी।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत किया।

उज्जैन: जहां से होती थी काल गणना

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारतीय मान्यताओं के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का केंद्र बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच टाइम के अस्तित्व में आने से पहले शून्य देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती थी।

उन्होंने बताया कि जब पश्चिमी दुनिया खगोल विज्ञान से अनजान थी, तब उज्जैन के विद्वान नक्षत्रों की सटीक गणना कर रहे थे।

विज्ञान और अध्यात्म का संगम है उज्जैन

डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है, लेकिन भगवान शिव ‘महाकाल’ के रूप में समय के भी स्वामी हैं। उन्होंने बताया कि हमारे शास्त्रों में समय और अंतरिक्ष की एकता का सिद्धांत पहले से मौजूद रहा है।

उज्जैन साइंस सेंटर और तारामंडल का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन में साइंस सेंटर का लोकार्पण किया और तारामंडल में विज्ञान प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।

इसके साथ ही सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत:

  • 4 लेन उज्जैन बायपास का भूमि-पूजन
  • ‘सम्राट विक्रमादित्य – द हेरिटेज’ परियोजना की शुरुआत

भी की गई।

डोंगला बनेगा नया खगोलीय अध्ययन केंद्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के पास स्थित डोंगला को खगोल अध्ययन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है, जो इसे विशेष बनाती है।

उज्जैन को बनाया जा रहा है साइंस सिटी

राज्य सरकार उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में विकसित कर रही है। इसी दिशा में 15 करोड़ रुपए से अधिक लागत से विज्ञान केंद्र का निर्माण किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भारत की वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने का बड़ा प्रयास है।

सिंहस्थ 2028: वैश्विक पहचान का अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ 2028 उज्जैन को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का सुनहरा मौका है। उन्होंने बताया कि:

  • 700 करोड़ रुपए से बायपास रोड बनेगा
  • श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार होंगी
  • धार्मिक के साथ वैज्ञानिक महत्व भी बताया जाएगा

उन्होंने सभी को सिंहस्थ 2028 में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहां विज्ञान और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिलता है। उन्होंने इसे “जीती-जागती प्रयोगशाला” बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि:

  • विज्ञान बिना अध्यात्म के अधूरा है
  • महाकाल मंदिर की परंपराएं वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं
  • पर्यावरण और जीवनशैली में संतुलन भारतीय ज्ञान परंपरा की पहचान है

शिक्षा में बदलाव और AI पर जोर

धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए कहा कि अब शिक्षा को रटने की बजाय क्रिटिकल और क्रिएटिव थिंकिंग की ओर ले जाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि:

  • स्कूल स्तर पर AI और आधुनिक तकनीक शामिल की जा रही है
  • शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है

सोशल मीडिया युवाओं की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी में आयोजित मध्यप्रदेश टूरिज्म इंफ्लुएंसर मीट में कहा कि सोशल मीडिया आज युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि:

  • प्राचीन परंपराओं पर गर्व जरूरी है
  • विकास और विरासत साथ-साथ चलनी चाहिए

सिंहस्थ 2028 में बनेंगे नए कीर्तिमान

उज्जैन में 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ ऐतिहासिक होगा। इसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे और नए रिकॉर्ड बनेंगे।

सरकार इस आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियों में जुटी है।

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