Vodafone Idea के Q3 नतीजे: घाटा घटा, राजस्व और ARPU में बढ़ोतरी
Vodafone Idea ने Q3FY26 में अपने समेकित घाटे (Consolidated Loss) को साल-दर-साल आधार पर घटाकर ₹5,286 करोड़ कर लिया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही (Q3FY25) में यह घाटा ₹6,609 करोड़ था। कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व इस तिमाही में ₹11,323 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹11,117 करोड़ की तुलना में 2% की बढ़ोतरी दर्शाता है।
इस दौरान एवरेज रेवेन्यू पर यूज़र (ARPU) बढ़कर ₹186 हो गया, जो Q3FY25 में ₹173 था। यानी सालाना आधार पर 7.3% की वृद्धि, जो मुख्य रूप से ग्राहकों द्वारा उच्च प्लान में अपग्रेड करने के कारण संभव हुई। कंपनी का कुल सब्सक्राइबर बेस Q3FY26 के अंत में 192.9 मिलियन रहा। Vodafone Idea के 4G/5G सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर 128.5 मिलियन हो गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 126.0 मिलियन थी।
कंपनी की EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय) Q3FY26 में ₹4,816 करोड़ रही, जो Q3FY25 में ₹4,712 करोड़ थी। इस तरह इसमें 2.2% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, EBITDA मार्जिन बढ़कर 42.5% हो गया, जो पिछले साल 42.4% था, यानी इसमें 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई।
Ind AS 116 के प्रभाव को छोड़कर कैश EBITDA Q3FY26 में ₹2,358 करोड़ रहा, जबकि Q3FY25 में यह ₹2,450 करोड़ था।
वित्तीय लागत
तीसरी तिमाही में कंपनी का : मूल्यह्रास और अमोर्टाइजेशन खर्च करीब ₹5,550 करोड़ रहा, शुद्ध वित्तीय लागत करीब ₹5,632 करोड़ रही अगर Ind AS 116 के असर को हटा दें, तो मूल्यह्रास और अमोर्टाइजेशन खर्च ₹3,975 करोड़ रहा, शुद्ध वित्तीय लागत ₹4,617 करोड़ रही
कैपेक्स और कर्ज : तीसरी तिमाही में कंपनी ने नेटवर्क और अन्य जरूरतों पर ₹2,252 करोड़ खर्च किए। वहीं, पूरे वित्त वर्ष FY26 के पहले 9 महीनों में यह खर्च ₹6,448 करोड़ रहा।
31 दिसंबर 2025 तक: बैंकों से लिया गया कर्ज ₹1,126 करोड़ था इसके अलावा, कंपनी ने NCD (नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर) के जरिए ₹3,300 करोड़ जुटाए, कंपनी के पास इस समय नकद और बैंक बैलेंस मिलाकर ₹6,963 करोड़ मौजूद थे।
AGR देनदारी
कंपनी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक उसकी AGR बकाया राशि ₹87,695 करोड़ पर स्थिर (फ्रीज) कर दी गई है और अब इसका दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। अगले 6 साल (FY26 से FY31) तक हर साल करीब ₹124 करोड़ का भुगतान होगा, इसके बाद अगले 4 साल (FY32 से FY35) तक हर साल करीब ₹100 करोड़ चुकाने होंगे.

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