अपरा एकादशी 2026: कब रखा जाएगा व्रत?
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली अपरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस बार अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
अपरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ : 12 मई 2026 को दोपहर 09:56 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त : 13 मई 2026 को दोपहर तक
- व्रत रखने की तिथि : 13 मई 2026
- पारण का समय : 14 मई 2026 सुबह 06:00 बजे से 07:41 बजे तक
अपरा एकादशी पर इस विधि से करें श्रीहरि की पूजा
अपरा एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु को गंगाजल, पंचामृत, पीले फूल, तुलसी दल और मिठाई अर्पित करें। मान्यता है कि बिना तुलसी दल के भगवान विष्णु पूजा स्वीकार नहीं करते।
पूजा करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है।
अपरा एकादशी व्रत के नियम
- व्रत के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से दूरी बनाएं।
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें।
- अधिक से अधिक समय भगवान विष्णु के ध्यान और भजन में बिताएं।
- जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है।
अपरा एकादशी का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत हजारों यज्ञों और तीर्थ स्नान के बराबर पुण्य देने वाला माना गया है। कहा जाता है कि श्रद्धा से यह व्रत रखने पर व्यक्ति के जाने-अनजाने पाप समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
FAQ Schema के लिए सवाल
अपरा एकादशी 2026 कब है?
अपरा एकादशी 13 मई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
अपरा एकादशी का पारण कब करें?
14 मई 2026 को सुबह 06:00 बजे से 07:41 बजे के बीच पारण करना शुभ रहेगा।
अपरा एकादशी पर किस भगवान की पूजा की जाती है?
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
अपरा एकादशी में क्या नहीं खाना चाहिए?
चावल, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
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