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लुढ़का सोने का भाव, 22K और 24K गोल्ड हुआ सस्ता – जानें आपके शहर का रेट

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होली से ठीक एक दिन पहले सराफा बाजार से राहत की खबर आई है। 3 मार्च 2026 को देशभर में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से 2 मार्च को सोने के दाम में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन आज बाजार में मामूली नरमी आई है। ऐसे में जो लोग होली पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह अच्छा मौका माना जा रहा है। हालांकि चांदी की कीमतों में आज तेजी देखने को मिल रही है।

क्यों आई कीमतों में गिरावट?

पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद हालात और बिगड़ गए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए। खबरों के अनुसार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की चर्चा से वैश्विक बाजार में घबराहट बढ़ी, जिसके चलते निवेशकों ने सोने को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी तेज कर दी थी।

इसी वजह से 2 मार्च को सोने में उछाल आया, लेकिन 3 मार्च को बाजार में थोड़ी मुनाफावसूली होने से दाम में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

24 कैरेट सोने का ताजा रेट (प्रति 10 ग्राम)

  • दिल्ली: ₹1,70,650
  • मुंबई: ₹1,70,650
  • कोलकाता: ₹1,70,650
  • जयपुर: ₹1,70,650
  • चेन्नई: ₹1,70,830
  • हैदराबाद: ₹1,70,830
  • अहमदाबाद, भोपाल, लखनऊ, चंडीगढ़: लगभग ₹1,70,650

चेन्नई और हैदराबाद में रेट थोड़ा ज्यादा देखने को मिल रहा है, जबकि बाकी प्रमुख शहरों में कीमत लगभग समान है।

22 कैरेट सोने का रेट (प्रति 10 ग्राम)

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक:

  • दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, जयपुर: ₹1,56,290
  • चेन्नई और हैदराबाद: ₹1,56,590
  • अन्य ज्यादातर शहरों में भी रेट ₹1,56,290 के आसपास है।

18 कैरेट सोना आमतौर पर 22 और 24 कैरेट से सस्ता होता है, हालांकि उसके ताजा रेट में ज्यादा बदलाव की जानकारी सामने नहीं आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है हाल?

वैश्विक स्तर पर तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों में तेजी देखी जा रही है।

  • कॉमेक्स पर सोना 1.04% बढ़कर 5366.60 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
  • चांदी 0.91% बढ़कर 89.66 डॉलर प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है।

भारत में एमसीएक्स पर सोने के फ्यूचर्स 2.53% की तेजी के साथ 1,66,199 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं चांदी में हल्की कमजोरी देखी गई और यह 0.9% नीचे आई।

आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इजराइल-ईरान तनाव लंबा खिंचता है तो अनिश्चितता बढ़ेगी और सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है।

हालांकि फिलहाल आई यह हल्की गिरावट होली के मौके पर खरीदारी करने वालों के लिए राहत भरी खबर है। अगर आप निवेश या ज्वेलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी है।

डॉलर की मजबूती का असर, सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव

सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती एक बड़ा कारण मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के बावजूद अमेरिकी डॉलर एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग कुछ समय के लिए कमजोर पड़ सकती है और कीमतों पर दबाव आता है।

हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका से वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिससे मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) का जोखिम बढ़ गया है। अगर महंगाई बढ़ती है, तो निवेशक फिर से सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देख सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी और सोने-चांदी की कीमतों में आगे चलकर फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। बीच-बीच में मामूली गिरावट जरूर आ सकती है, लेकिन जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बड़ी गिरावट की संभावना कम ही मानी जा रही है।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी नजर

निवेशकों की नजर अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की अगली बैठक पर है। 18 मार्च को समाप्त होने वाली दो दिवसीय बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना जताई जा रही है।

सीएमई ग्रुप के फेडवॉच टूल के अनुसार, जून महीने में भी ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने की संभावना 60% से ज्यादा है। यदि ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो सोने के लिए यह सहारा साबित हो सकता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने की चमक को कम करती हैं।

कुल मिलाकर, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने-चांदी का बाजार फिलहाल संवेदनशील स्थिति में है और आने वाले हफ्तों में इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, इन 13 शेयरों पर रहेगी खास नजर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी बाजार में तेज हलचल का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखने लगा है। कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, प्राकृतिक गैस में उछाल है और डिफेंस सेक्टर में नई दिलचस्पी देखने को मिल रही है। ऐसे माहौल में 4 मार्च को बाजार में चुनिंदा शेयरों में खास मूवमेंट देखने को मिल सकता है। आइए सेक्टर दर सेक्टर समझते हैं कि निवेशकों की नजर किन कंपनियों पर टिकी रह सकती है।

1. ऑयल स्टॉक्स: किसे फायदा, किस पर दबाव?

सबसे पहले बात करें कच्चे तेल की। जब ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के ऊपर जाता है, तो यह तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए आमतौर पर सकारात्मक संकेत होता है। ऐसे में ONGC और Oil India को ऊंची कीमतों का सीधा फायदा मिल सकता है, क्योंकि वे महंगे दाम पर तेल बेच पाती हैं।

हालांकि, दूसरी ओर रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। HPCL, BPCL और IOC जैसी कंपनियों को महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ता है, जिससे उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, पेंट और टायर कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है, क्योंकि इनके लिए कच्चा माल तेल आधारित होता है। इसलिए इस सेक्टर में निवेशकों को सावधानी के साथ कदम बढ़ाने की जरूरत है।

2. गैस स्टॉक्स: यूरोप से आई खबर का असर

वहीं, यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। इसकी वजह कतर के एक बड़े एलएनजी सप्लायर के बंद होने की खबर बताई जा रही है। ऐसे में गैस वितरण और एलएनजी कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल संभव है।

यदि यह स्थिति लंबी चलती है, तो गैस कंपनियों के मार्जिन और मांग दोनों पर असर पड़ सकता है, जिससे शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

3. टूरिज्म सेक्टर: तनाव का सीधा असर

दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर पर साफ दिखाई दे रहा है। एयरलाइन कंपनी IndiGo के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही लगेज निर्माता Safari Industries भी दबाव में रहा।

अगर इजरायल-ईरान तनाव लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर असर पड़ सकता है। नतीजतन होटल और एविएशन इंडस्ट्री में कमजोरी बनी रह सकती है।

4. डिफेंस स्टॉक्स: बढ़ती दिलचस्पी

इसके विपरीत, रक्षा क्षेत्र की कंपनियों में निवेशकों की रुचि बढ़ती दिख रही है। बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच डिफेंस सेक्टर को मजबूत ऑर्डर बुक और सरकारी समर्थन का फायदा मिल सकता है।

इस कड़ी में Paras Defence, Bharat Electronics और ideaForge जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई है। यदि भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं, तो इस सेक्टर में तेजी बरकरार रह सकती है।

5. ऑटो सेक्टर: Tata Motors और M&M का बयान

इंडोनेशिया द्वारा कमर्शियल व्हीकल एक्सपोर्ट ऑर्डर रोकने की खबरों के बाद Tata Motors ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा ऑर्डर पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

इसी तरह Mahindra & Mahindra ने भी कहा है कि उन्हें अग्रिम भुगतान मिल चुका है और ऑर्डर रोकने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। इससे निवेशकों को कुछ राहत मिली है, हालांकि बाजार की नजर आगे की आधिकारिक घोषणाओं पर रहेगी।

6. Adani Ports: मजबूत प्रदर्शन

आखिर में बात करें पोर्ट सेक्टर की। Adani Ports ने जानकारी दी है कि फरवरी में उसकी कुल कार्गो हैंडलिंग में सालाना आधार पर 16% की वृद्धि दर्ज हुई है। कंटेनर और ड्राई कार्गो दोनों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।

ऐसे में, भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन मजबूत ऑपरेशनल आंकड़े इस शेयर को सपोर्ट दे सकते हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण बाजार में सेक्टर-विशेष हलचल बनी हुई है। इसलिए निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल खबरों के आधार पर नहीं, बल्कि कंपनियों की बुनियादी स्थिति और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर निर्णय लें।

आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन सही सेक्टर और सही समय का चुनाव निवेशकों के लिए अवसर भी साबित हो सकता है।

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