भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट का असर अब देश की बड़ी कंपनियों पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की टॉप 100 सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में अब कोई भी भारतीय कंपनी शामिल नहीं है। हाल ही में आई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
दरअसल, साल 2025 की शुरुआत में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank और TCS जैसी कंपनियां इस ग्लोबल सूची का हिस्सा थीं। हालांकि, बाजार में लगातार गिरावट के कारण इन कंपनियों की रैंकिंग नीचे खिसक गई।
दुनिया की टॉप 100 कंपनियों से बाहर हुईं भारतीय कंपनियां, बाजार में गिरावट का बड़ा असर
रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। कंपनी पहले 57वें स्थान पर थी। अब यह करीब 106वें नंबर पर पहुंच गई है। वहीं, HDFC Bank भी 97वें स्थान से फिसलकर 190वें नंबर तक पहुंच गया है।
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी TCS की स्थिति भी कमजोर हुई है। कंपनी अब 314वें स्थान पर पहुंच गई है। इसके अलावा, Infosys की रैंकिंग में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
वहीं, Bharti Airtel, ICICI Bank और SBI जैसी कंपनियों की वैश्विक स्थिति भी कमजोर हुई है। लगातार बिकवाली और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर इन कंपनियों पर दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे वैल्यूएशन, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया है। दूसरी ओर, अमेरिकी टेक और AI कंपनियों में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। इसी वजह से ग्लोबल निवेशकों का फोकस दूसरे बाजारों की ओर शिफ्ट हो रहा है।
इसके अलावा, भारत की उन कंपनियों की संख्या भी कम हुई है जिनका मार्केट कैप 100 अरब डॉलर से ज्यादा है। फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank और भारती एयरटेल ही इस सूची में बनी हुई हैं।
जानिए 20 मई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। शुरुआती बढ़त के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी आखिरकार लाल निशान में बंद हुए। बाजार पर वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता का असर साफ दिखाई दिया।
कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रही थी। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा था। हालांकि, दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली बढ़ गई और बाजार अपनी शुरुआती बढ़त कायम नहीं रख सका।
वहीं, रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इसका असर बाजार की धारणा पर पड़ा और निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो मेटल, PSU बैंक, ऑयल एंड गैस और रियल्टी शेयरों में दबाव देखने को मिला। दूसरी ओर, कुछ आईटी शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। हालांकि, कुल मिलाकर बाजार का रुख कमजोर बना रहा।
इसी बीच, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने मुख्य इंडेक्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि अभी भी चुनिंदा शेयरों में बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 20 मई के कारोबार में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय तनाव भी निवेशकों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए निकट भविष्य में कुछ अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर बाजार पर दबाव जारी रहता है, तो अगले कारोबारी सत्र में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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