क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) चर्चा में है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। भारत के लिए इसकी अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि देश के लगभग 40% कच्चे तेल का आयात इसी रास्ते से होता है।
यदि इस रास्ते पर खतरा बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
क्या ईरान भारतीय जहाजों को देगा सुरक्षित रास्ता
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार भारत और ईरान के बीच बातचीत के बाद ईरान भारतीय झंडे वाले टैंकरों को सुरक्षित मार्ग देने पर विचार कर सकता है। हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक समझौता सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति काफी संवेदनशील है और किसी भी समय बदल सकती है।
भारत और ईरान के बीच क्या बातचीत हुई
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल ही में कई दौर की बातचीत हुई। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर फोकस रहा:
- समुद्री व्यापार की सुरक्षा
- भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही
- भारत की ऊर्जा जरूरतें
भारत ने साफ किया है कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों और ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा है।
युद्ध के बाद भारत पहुंचा पहला तेल टैंकर
ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बाद मिडिल ईस्ट से भारत पहुंचने वाला पहला तेल टैंकर हाल ही में मुंबई पहुंचा। यह जहाज सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर आया था।
इससे यह संकेत मिलता है कि खतरे के बावजूद तेल सप्लाई पूरी तरह रुकी नहीं है, लेकिन जोखिम जरूर बढ़ गया है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी बड़ी चिंता
भारत सरकार के अनुसार होर्मुज के आसपास:
- 28 भारतीय जहाज सक्रिय हैं
- 778 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं
सरकार लगातार दूतावासों और शिपिंग कंपनियों के संपर्क में है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद दी जा सके।
भारत ने दिखाई मानवीय पहल
तनाव के बीच भारत ने मानवीय दृष्टिकोण भी दिखाया और 183 ईरानी नाविकों को सुरक्षित शरण दी। इससे दोनों देशों के संबंधों में सहयोग का संदेश भी गया।
अगर होर्मुज बंद हुआ तो भारत पर क्या असर पड़ेगा
अगर होर्मुज जलमार्ग बाधित होता है तो भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
संभावित प्रभाव:
- पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
- महंगाई बढ़ सकती है
- सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है
- सरकार को वैकल्पिक स्रोत ढूंढने पड़ सकते हैं
भारत के पास क्या विकल्प हैं
ऐसी स्थिति में भारत के पास कुछ विकल्प मौजूद हैं:
- रूस से अधिक तेल आयात
- अमेरिका और अफ्रीका से सप्लाई बढ़ाना
- रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग
- रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस
भारत पहले भी संकट के समय अपने आयात स्रोतों में विविधता लाता रहा है।
क्या कच्चा तेल 200 डॉलर तक जा सकता है
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति तभी बनेगी जब:
- होर्मुज पूरी तरह बंद हो जाए
- बड़े पैमाने पर सप्लाई रुक जाए
- युद्ध लंबा चले
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत की सबसे बड़ी चिंता अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखना है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन अगर संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत फिलहाल कूटनीति और वैकल्पिक सप्लाई दोनों पर काम कर रहा है ताकि किसी बड़े संकट से बचा जा सके।

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