मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष केवल बातचीत से खत्म नहीं होगा। उनके मुताबिक यह युद्ध तब तक जारी रह सकता है जब तक ईरान की सैन्य ताकत और उसके शासकों को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता।
हालांकि, इसी बीच तेहरान में एक बड़ा राजनीतिक फैसला होने वाला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान जल्द ही अपने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। यह फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है।
इज़राइल के नए हमले, ईरान के ठिकाने निशाने पर
दरअसल, एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल वे किसी भी तरह की शांति वार्ता के पक्ष में नहीं हैं। इसके तुरंत बाद अमेरिका के करीबी सहयोगी इज़राइल ने भी ईरान पर नए हवाई हमलों की घोषणा कर दी। इज़राइली सेना का दावा है कि इन हमलों में ईरान के महत्वपूर्ण ईंधन भंडारण केंद्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
खाड़ी देशों में भी ड्रोन हमलों से हड़कंप
दूसरी ओर, इस संघर्ष का असर अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई देने लगा है।
सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन की सरकारों ने बताया कि शनिवार और रविवार को उनके क्षेत्रों में ईरानी ड्रोन हमले हुए।
कुवैत में तो एक सरकारी कार्यालय की इमारत में भीषण आग लग गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इसी दौरान नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में स्थित अमेरिकी दूतावास के पास भी एक विस्फोट हुआ। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन धमाके की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है।
ईरान के राष्ट्रपति की माफी से देश में विवाद
तनाव कम करने की कोशिश में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने खाड़ी देशों से माफी भी मांगी।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के लिए उन्हें खेद है। हालांकि उन्होंने ट्रंप की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें अमेरिका ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की बात कही थी।
पेज़ेशकियन ने इसे “सिर्फ एक सपना” बताया।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान की अस्थायी नेतृत्व परिषद ने फैसला किया है कि पड़ोसी देशों पर हमले तब तक रोक दिए जाएंगे, जब तक उनके क्षेत्रों से ईरान पर हमले नहीं किए जाते।
हालांकि, उनके इस बयान की ईरान के कट्टरपंथी नेताओं ने आलोचना भी की। इसके बाद राष्ट्रपति कार्यालय को यह स्पष्ट करना पड़ा कि ईरान की सेना किसी भी हमले का कड़ा जवाब देगी।
नए सुप्रीम लीडर के चयन की तैयारी
इस बीच ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव होने वाला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नामक धार्मिक संस्था जल्द ही नए सुप्रीम लीडर के नाम पर फैसला कर सकती है।
बताया जा रहा है कि यह पद इसलिए खाली हुआ क्योंकि मौजूदा सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई युद्ध की शुरुआत में हुए हमले में मारे गए थे।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य आयतुल्लाह मोहम्मदमेहदी मिरबाकरी ने कहा है कि नए नेता के नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है।
लेबनान को इज़राइल की कड़ी चेतावनी
इधर, संघर्ष का दायरा लेबनान तक भी फैल गया है।
ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह द्वारा सीमा पार हमले किए जाने के बाद इज़राइल ने लेबनान में भी ताजा हमले शुरू कर दिए हैं।
इज़राइल ने चेतावनी दी है कि यदि लेबनान सरकार हिज़्बुल्लाह को नहीं रोकती, तो उसे “बहुत भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इज़राइल के हमलों में लेबनान में लगभग 300 लोगों की मौत हो चुकी है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस युद्ध का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है।
दरअसल, ईरान की रणनीति से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।
कुवैत की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने उत्पादन कम करने का फैसला किया है। वहीं इराक और कतर ने भी पहले ही तेल और गैस उत्पादन में कटौती की घोषणा की थी।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह संघर्ष हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावित कर रहा है, जो दुनिया के ते

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