धर्म मध्य प्रदेश

करीला माता मंदिर (धाम), अशोकनगर – लव-कुश की जन्मस्थली और आस्था का अनोखा संगम

Mata janki mandir in Karila Dham picture

करीला धाम अशोकनगर: लव-कुश जन्मस्थली और रंगपंचमी मेला

करीला माता मंदिर मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक धाम है। यह स्थान लव-कुश की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है और इसे महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है।

विशेष रूप से रंगपंचमी के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। बुंदेलखंडी ‘राई’ नृत्य इस मेले की सबसे खास पहचान है।

करीला धाम कहाँ स्थित है?

करीला धाम, अशोकनगर से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ पहाड़ी पर विराजमान मां जानकी (सीता माता) का मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है।

मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने अयोध्या लौटने के बाद माता सीता का त्याग किया, तब माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली थी। इसी पावन भूमि पर लव-कुश का जन्म हुआ। यही कारण है कि यह स्थान लव-कुश की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर अशोक नगर जिले के करीला धाम में विभिन्न विकास कार्यों के भूमि-पूजन और लोकार्पण समारोह में प्रदर्शनी का अवलोकन किया।


करीला धाम का इतिहास

करीला धाम का इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना बताया जाता है।

कहा जाता है कि महंत तपसी महाराज को एक रात स्वप्न में माता जानकी के दर्शन हुए। स्वप्न में उन्हें संकेत मिला कि करीला गांव की पहाड़ी पर स्थित वाल्मीकि आश्रम वीरान पड़ा है, उसे पुनः जागृत किया जाए।

अगले ही दिन तपसी महाराज पहाड़ी की खोज में निकल पड़े और आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने वही आश्रम पाया, जैसा उन्होंने स्वप्न में देखा था।

इसके बाद उन्होंने स्वयं आश्रम की साफ-सफाई शुरू की। धीरे-धीरे ग्रामीणों ने भी सहयोग किया और यह स्थान पुनः जीवंत हो गया।

लोककथाओं के अनुसार, उस समय आश्रम में शेर और गाय एक साथ रहते थे, तथा बंदर भी आश्रम के कार्यों में सहयोग करते थे। यह कथा इस धाम की आध्यात्मिक महिमा को और भी बढ़ा देती है।

मंदिर की विशेषता – बिना राम के सीता की पूजा

करीला माता मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां भगवान राम की मूर्ति नहीं है, बल्कि केवल माता सीता, लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाएं स्थापित हैं। देश के गिने-चुने मंदिरों में से यह एक ऐसा मंदिर है जहाँ सीता माता की स्वतंत्र रूप से पूजा की जाती है।

मां के आशीर्वाद से शीघ्र विवाह

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां दर्शन करने से कुंवारों की शीघ्र शादी होती है।

इसी कारण देशभर से श्रद्धालु विवाह और संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर यहां आते हैं। अनेक भक्तों का विश्वास है कि मां जानकी के आशीर्वाद से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं।

रंगपंचमी मेला और राई नृत्य

हर वर्ष रंगपंचमी पर तीन दिवसीय विशाल मेला आयोजित होता है। इस मेले की सबसे बड़ी पहचान है बुंदेलखंडी राई नृत्य। जब किसी श्रद्धालु की मन्नत पूरी होती है, तो वे माता के दरबार में राई नृत्य का आयोजन कराते हैं।

इस दौरान पूरी पहाड़ी भक्तिमय वातावरण और लोकसंगीत की धुनों से गूंज उठती है।

करीला मेले की प्रसिद्ध “चमत्कारी कढ़ाही”

करीला मेले की एक और विशेष पहचान है यहाँ बिकने वाली लोहे की कढ़ाही

मान्यता है कि इस कढ़ाही में कम तेल में भोजन पक जाता है। यही कारण है कि मेले में हजारों की संख्या में कढ़ाही बिकती हैं और लाखों रुपये का व्यापार होता है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह कढ़ाही शुभ मानी जाती है और घर में समृद्धि लाती है।

करीला माता मंदिर का समय

मंदिर प्रतिदिन खुला रहता है:

  • सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
  • आरती: सुबह 6:30 बजे
  • आरती: शाम 6:30 बजे

शनिवार से शुक्रवार तक समय समान रहता है।

करीला माता मंदिर के पास घूमने योग्य स्थान

  • चंदेरी
    अशोकनगर से लगभग 60 किमी दूर स्थित चंदेरी अपने किले, ऐतिहासिक धरोहर और प्रसिद्ध चंदेरी साड़ियों के लिए जाना जाता है।
  • तुलसी सरोवर पार्क
    विशाल जलाशय और नौका विहार की सुविधा इसे पिकनिक के लिए आदर्श बनाती है।
  • अमही तालाब
    बरसात के समय यह तालाब अत्यंत सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है।
  • अखबेर धाम
    यहाँ राधा-कृष्ण मंदिर स्थित है, जो शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
  • ईसागढ़ किला
    ऊँची पहाड़ी पर बना यह किला ऐतिहासिक महत्व रखता है।

करीला माता मंदिर कैसे पहुँचे?

वायु मार्ग

निकटतम हवाई अड्डे:

  • भोपाल – लगभग 201 किमी
  • ग्वालियर – लगभग 236 किमी

रेल मार्ग

अशोकनगर कोटा-बीना रेल मार्ग पर स्थित है। यहां से भोपाल, ग्वालियर, दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी आदि के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग

अशोकनगर भोपाल, ग्वालियर, गुना, विदिशा और दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

निष्कर्ष

अंततः, करीला माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।

यदि आप मध्य प्रदेश में किसी पवित्र और शांत स्थल की यात्रा करना चाहते हैं, तो करीला धाम अवश्य जाएं। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, रंगपंचमी का मेला और राई नृत्य का अद्भुत अनुभव आपके जीवन में यादगार बन जाएगा।

|| जय मां जानकी ||

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