मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले स्थित करीला धाम लंबे समय से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यही वजह है कि राज्य सरकार अब इस पवित्र स्थल के समग्र विकास की योजना बनाने जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रंगपंचमी मेला महोत्सव में शामिल होने के लिए करीला धाम पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए इस ऐतिहासिक स्थल के विकास का ऐलान किया।
जानिए संपूर्ण जानकारी करीला धाम के बारे में- करीला माता मंदिर (धाम), अशोकनगर

हर वर्ष रंगपंचमी पर तीन दिवसीय विशाल मेला आयोजित होता है। इस मेले की सबसे बड़ी पहचान है बुंदेलखंडी राई नृत्य। जब किसी श्रद्धालु की मन्नत पूरी होती है, तो वे माता के दरबार में राई नृत्य का आयोजन कराते हैं।
देश का अनोखा मंदिर, जहां सीता माता लव-कुश के साथ विराजमान
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीला धाम देश का एक अद्वितीय मंदिर है, क्योंकि यहां माता सीता अपने दोनों पुत्रों लव और कुश के साथ विराजमान हैं। आमतौर पर देश के अधिकांश मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित हैं, लेकिन करीला धाम का महत्व अलग है।
दरअसल, मान्यता है कि यही स्थान लव-कुश की जन्मस्थली है और उनकी बाल लीलाओं का साक्षी भी रहा है। इसलिए यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
अशोकनगर जिले को 115.35 करोड़ रुपये के विकास कार्य
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अशोकनगर जिले को 115 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से होने वाले 50 विकास कार्यों की सौगात दी।
- 57 करोड़ 3 लाख रुपये की लागत के 11 कार्यों का लोकार्पण
- 58 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत के 39 कार्यों का भूमि पूजन
इसके साथ ही उन्होंने दीपनाखेड़ा गांव से करीला धाम तक 10 किलोमीटर सड़क बनाने की घोषणा भी की, जिससे श्रद्धालुओं को आने-जाने में सुविधा मिलेगी।
माता सीता नारी शक्ति और आत्म-सम्मान का प्रतीक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि माता सीता धैर्य, साहस और आत्म-सम्मान की प्रतीक हैं। जब भी नारी शक्ति की बात होती है, तब माता सीता का उदाहरण सामने आता है।
उन्होंने बताया कि माता सीता ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि नारी का आत्म-सम्मान ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
राम वन गमन पथ का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश को भगवान श्रीराम का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है। उदाहरण के लिए, चित्रकूट में उन्होंने वनवास के दौरान लगभग 11 वर्ष बिताए थे।
इसी विरासत को सहेजने के लिए राज्य सरकार राम वन गमन पथ का विकास कर रही है, ताकि जहां-जहां भगवान राम के चरण पड़े हैं, उन स्थानों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।
जानकी मंदिर में पूजा और श्रद्धालुओं के साथ फूलों की होली
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने करीला धाम स्थित जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में ढोल बजाकर शंखनाद किया।
यही नहीं, रंगपंचमी के उत्साह के बीच मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं के साथ फूलों की होली भी खेली, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवमय बन गया।
महिला दिवस पर महिलाओं का सम्मान
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले की सात महिलाओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित भी किया। इनमें शिक्षा, खेल, पर्यावरण, स्वास्थ्य और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाएं शामिल थीं।
सम्मानित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं:
- डॉ. अमिता सेठी (शिक्षा)
- श्रीमती नैना शर्मा (धार्मिक क्षेत्र)
- सुश्री पूनम रघुवंशी (खेल)
- श्रीमती विनीता साहू (पर्यावरण)
- श्रीमती गायत्री शर्मा (स्वयं सहायता)
- श्रीमती छाया बैस (स्वास्थ्य)
- श्रीमती कुलविंदर कौर (समाजसेवा)
भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति का सर्वोच्च स्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को हमेशा प्रथम स्थान दिया गया है। इसी भावना के साथ केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश की लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हो सके।

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