मध्य प्रदेश

ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा, आर्थिक तंगी से बन गईं आत्मनिर्भर महिला

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम

आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक: सरूपी मीणा की प्रेरणादायक शुरुआत

Raisen जिले के सांची विकासखंड के ग्राम रतनपुर गिरधारी की रहने वाली सरूपी मीणा आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। एक समय ऐसा था जब उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था।

सरूपी मीणा ने 10वीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। उनके पति कृषि कार्य करते थे, लेकिन इससे परिवार का खर्च ठीक से नहीं चल पाता था। इसके बावजूद उनके मन में आगे बढ़ने और कुछ नया करने की इच्छा हमेशा बनी रही।

आजीविका मिशन से मिली नई दिशा

सरूपी मीणा के जीवन में बदलाव तब आया, जब गांव में आजीविका मिशन के कर्मचारियों ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने हिम्मत दिखाई और समूह से जुड़ने का फैसला किया।

समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की और समूह से ऋण लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की। साथ ही, उन्होंने कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) के रूप में काम करना शुरू किया, जिससे उन्हें मानदेय मिलने लगा।

धीरे-धीरे उन्होंने एक छोटी किराना दुकान शुरू की। इसके बाद बैंक सखी के रूप में काम करने का अवसर मिला, जिससे उनकी मासिक आय 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच गई। आगे चलकर उन्होंने सीएससी सेंटर भी शुरू किया, जिससे आय में और वृद्धि हुई।

लगातार मेहनत और लगन के बल पर सरूपी मीणा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। यह उनके आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय का बड़ा उदाहरण है।

ड्रोन तकनीक ने बदल दी जिंदगी

सरूपी मीणा की मेहनत और लगन को देखते हुए उन्हें सांची में रूरल मार्ट संचालित करने का अवसर मिला। यहां वह स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री करती हैं।

इसके बाद वर्ष 2023–24 में उन्हें नमो ड्रोन योजना के तहत चयनित किया गया। इस योजना के अंतर्गत उन्हें Gwalior में ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें निःशुल्क ड्रोन उपलब्ध कराया गया। अब वह खेतों में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं। इस कार्य से उन्हें हर वर्ष लगभग 3 लाख रुपये तक की आय होने लगी है।

इसी उपलब्धि के कारण आज लोग उन्हें “ड्रोन दीदी” के नाम से पहचानने लगे हैं।

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

सरूपी मीणा की सफलता कहानी यह साबित करती है कि यदि मेहनत और हौसला मजबूत हो, तो कठिन परिस्थितियों को भी बदला जा सकता है।

आज वह न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक मजबूत मिसाल बन गई है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम

सरूपी मीणा का कहना है कि आजीविका मिशन और ड्रोन तकनीक ने उनके जीवन को नई पहचान दी है। इससे महिलाओं को न केवल रोजगार मिला है, बल्कि समाज में उनका सम्मान भी बढ़ा है।

उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा बताती है कि सही अवसर और मेहनत के साथ कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है।

निष्कर्ष

सरूपी मीणा की सफलता कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने जीवन में बदलाव लाना चाहती है। आर्थिक तंगी से निकलकर ड्रोन तकनीक तक पहुंचने का उनका सफर यह दिखाता है कि मजबूत इरादों से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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