तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर करने वाले अभिनेता से नेता बने C. Joseph Vijay की मुख्यमंत्री पद की शपथ फिलहाल टल गई है। दरअसल, उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) विधानसभा में बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई है। ऐसे में राज्य में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
हालांकि TVK राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा अभी पार्टी के पास नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने समर्थन देने का फैसला किया है, फिर भी पार्टी बहुमत से कुछ सीटें दूर बताई जा रही है।
इसी बीच, तमिलनाडु के राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने विजय से बहुमत साबित करने के लिए पर्याप्त समर्थन पत्र और दस्तावेज पेश करने को कहा है। यही वजह है कि प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह पर अस्थायी रोक लग गई है।
ताज़ा अपडेट (7 मई 2026):
- शपथ ग्रहण पर सस्पेंस: बुधवार (6 मई) शाम तक TVK के पास बहुमत के लिए आवश्यक 118 विधायकों का आंकड़ा नहीं पहुंचा, जिससे उनका शपथ ग्रहण समारोह टल गया है।
- बहुमत से दूरी: विजय ने कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के साथ कुल 112 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी गवर्नर को सौंपी थी। चूँकि विजय खुद दो सीटों से जीते हैं, इसलिए TVK की संख्या 107 है। अब भी वे बहुमत से 6 सीटें पीछे हैं।
- गवर्नर का रुख: राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा बहुमत साबित करने की आवश्यकता जताने के बाद शपथ समारोह रुका है।
- सुरक्षा वापस: विजय को सरकार की ओर से दी गई कॉन्वॉय सुरक्षा वापस ले ली गई है।
- अन्य दलों का रुख:
अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन जुटाने की कोशिश
TVK लगातार अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, AIADMK और अन्य क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी अब काफी अहम मानी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कई पार्टियां फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द फैसला ले सकती हैं।
वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर विजय जरूरी समर्थन जुटाने में सफल हो जाते हैं, तो जल्द ही नई सरकार का रास्ता साफ हो सकता है। लेकिन यदि बहुमत साबित नहीं हो पाया, तो तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
गौरतलब है कि C. Joseph Vijay ने इस चुनाव में पहली बार पूरी ताकत से राजनीतिक मैदान में उतरकर राज्य की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका दिया है। उनकी पार्टी के प्रदर्शन ने DMK और AIADMK जैसी दिग्गज पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है।
राज्यपाल की भूमिका और बहुमत परीक्षण पर कानूनी विशेषज्ञों की राय
बीबीसी तमिल से बातचीत में सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरिपरंथमन ने कहा कि राज्यपाल सरकार गठन का दावा करने वाली पार्टी से बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं, लेकिन शपथ ग्रहण को पूरी संख्या दिखाने से जोड़ना सही नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, बहुमत साबित करने की असली जगह विधानसभा होती है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील करपका विनायगम ने कहा कि यदि राज्यपाल को दावेदार पार्टी पर भरोसा होता है, तो वह सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा लंबे समय तक खाली नहीं रखी जा सकती, इसलिए राज्यपाल को जल्द फैसला लेना चाहिए। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रियों का शपथ ग्रहण कराया जाएगा।
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