मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपना संपूर्ण जीवन समाज के लिए समर्पित कर देता है, तो वह केवल इंसान नहीं बल्कि एक विचारधारा बन जाता है। स्वर्गीय भगवत शरण माथुर इसी सोच का जीवंत उदाहरण थे।
समाज सेवा ही सच्ची साधना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि स्व. माथुर ने अपने जीवन से यह साबित किया कि समाज सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत सुखों का त्याग कर वंचित वर्ग के उत्थान के लिए जो कार्य किए, वे आज भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।
राजगढ़ से अमरकंटक तक सेवा का सफर
राजगढ़ जिले के सीका गांव में जन्मे स्व. माथुर ने शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रयास किए। उन्होंने पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए कई प्रकल्प स्थापित किए, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आया।
अमरकंटक में श्रद्धांजलि सभा
मुख्यमंत्री मोहन यादव अमरकंटक स्थित ‘श्री नर्मदे हर सेवा न्यास’ में आयोजित जयंती समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्व. माथुर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
अमरकंटक, जहां से नर्मदा नदी, सोन और जोहिला नदियां निकलती हैं, को उन्होंने एक दिव्य और पुण्य स्थल बताया।
नर्मदा संरक्षण और पर्यावरण पर जोर
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कई अहम घोषणाएं कीं:
- अमरकंटक की गौशाला के लिए अनुदान
- कथा-प्रवचन हेतु पर्यावरण अनुकूल भवन
- नर्मदा किनारों पर पौधारोपण अभियान
उन्होंने बताया कि “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत राज्य में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पंच परिवर्तन का संदेश
सभा में ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने समाज को पाँच प्रमुख संकल्प अपनाने का आह्वान किया:
- परिवार में संस्कार विकसित करना
- सामाजिक समरसता बढ़ाना
- पर्यावरण संरक्षण
- स्वदेशी और आत्मनिर्भरता
- नागरिक कर्तव्यों का पालन
सामाजिक समानता पर जोर
उन्होंने कहा कि समाज में जातिवाद और भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से समाज में समानता की भावना मजबूत हुई।
परिवार और संस्कारों की अहमियत
मुख्यमंत्री ने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता जताते हुए कहा कि परिवार के साथ समय बिताना, बच्चों को संस्कार देना और उन्हें महान व्यक्तियों की कहानियां सुनाना जरूरी है। इससे राष्ट्र निर्माण की भावना मजबूत होती है।
पर्यावरण और बदलता मौसम
उन्होंने चेतावनी दी कि प्लास्टिक और रसायनों के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। मौसम में हो रहे बदलाव, जैसे अप्रैल में ओलावृष्टि, इसका संकेत हैं। ऐसे में प्रकृति से जुड़ना और उसकी रक्षा करना जरूरी है।
स्वदेशी और राष्ट्र निर्माण
मुख्यमंत्री ने स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूती से खड़ा है और इसका श्रेय देश के नेतृत्व और योजनाओं को जाता है।
निष्कर्ष
स्व. भगवत शरण माथुर का जीवन समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही एक बेहतर और समरस समाज का निर्माण संभव है।

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