भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश ने कई अहम बदलाव देखे हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में ऐसे कई निर्णय लिए गए, जिन्होंने भारत की पहचान और आत्मविश्वास को मजबूत किया है।
यह अवसर ‘इंडिया से भारत : एक प्रवास’ पुस्तक के विमोचन का था, जिसका आयोजन प्रज्ञा प्रवाह द्वारा किया गया। इस पुस्तक की भूमिका Mohan Bhagwat ने लिखी है। कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
“देश के लिए स्वर्णिम दौर रहा हाल का समय”
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि वर्ष 2014 से 2026 तक के दौर को देखा जाए, तो यह समय देश के लिए एक स्वर्णिम काल के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण न्यायपालिका के फैसले के बाद शांतिपूर्ण तरीके से संभव हुआ, जो भारत की लोकतांत्रिक ताकत को दर्शाता है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को फिर से सम्मान दिलाने, वैश्विक स्तर पर भारत की ताकत दिखाने और कोरोना काल में अन्य देशों की मदद करने जैसे कदमों ने देश की छवि को मजबूत किया है।
लोकतंत्र और न्यायपालिका की भूमिका पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को न्यायपालिका से मजबूती मिलती है। उन्होंने राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे देश ने इस निर्णय का स्वागत किया। दिलचस्प बात यह रही कि कार्यक्रम में वे लोग भी शामिल हुए, जिन्होंने पहले इस मुद्दे पर आपत्तियां जताई थीं।
उन्होंने कहा कि यही भारत की खासियत है, जहां मतभेद के बावजूद सामाजिक समरसता बनी रहती है।
लेखक के प्रयास की सराहना
पुस्तक के लेखक Prashant Pol की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लेखन जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि लेखक ने गहन अध्ययन और परिश्रम के साथ इस पुस्तक को तैयार किया है।
इसी बीच, लेखक प्रशांत पोल ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उन्होंने पुस्तक के जरिए यह दिखाने की कोशिश की है कि भारत कभी भी कमजोर या असहाय राष्ट्र नहीं रहा। उन्होंने इतिहास के कई उदाहरण देते हुए बताया कि देश में समय-समय पर बड़े बदलाव हुए हैं।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर भी चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे Hemant Sharma ने कहा कि केवल किताबें लिखने से ही बदलाव नहीं आता, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में हो रहे सांस्कृतिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य इस दिशा में एक उदाहरण बन रहा है।
मुख्यमंत्री को भेंट किए गए अध्ययन ग्रंथ
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को दो महत्वपूर्ण अध्ययन ग्रंथ भी भेंट किए गए। इनमें एक सुशासन और सूचना के अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ा है, जबकि दूसरा ‘युवा मंथन: सोच, सरोकार और संभावनाएं’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है।
इस मौके पर प्रज्ञा प्रवाह, विद्या भारती और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम न केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित रहा, बल्कि इसमें देश की वर्तमान दिशा, सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली।
जानकारी म.प्र. सरकार की जनसंपर्क वेबसाईट mpinfo पर आधारित
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