कोरबा, छत्तीसगढ़: जिले के झाबू गांव में रविवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब HTPP (हसदेव ताप विद्युत परियोजना) का राखड़ डैम अचानक फूट गया। इस दर्दनाक घटना में मौके पर काम कर रहा एक जेसीबी ऑपरेटर राख के तेज बहाव में दबकर अपनी जान गंवा बैठा।
कुछ ही सेकंड में बदला मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डैम के एक हिस्से में अचानक दबाव बढ़ा और देखते ही देखते राख का सैलाब टूट पड़ा। जेसीबी चला रहा ऑपरेटर कुछ समझ पाता, उससे पहले ही वह राख के दलदल में फंस गया।
मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन राख का बहाव और दबाव इतना ज्यादा था कि ऑपरेटर मशीन समेत उसमें समा गया। पूरा हादसा महज कुछ सेकंड में हुआ और लोगों के सामने एक जिंदगी खत्म हो गई।
मौके पर मची अफरा-तफरी
हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मजदूरों में चीख-पुकार मच गई और हर कोई अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागता नजर आया।
सूचना मिलते ही प्रबंधन और सुरक्षा दल मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी। प्रशासन को भी तत्काल इसकी जानकारी दी गई और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।
राहत-बचाव में देरी पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मदद देर से पहुंची, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। लोगों का कहना है कि अगर समय पर और बेहतर सुरक्षा इंतजाम होते, तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे के बाद एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राखड़ डैम की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज किया।
यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि सुरक्षा में जरा सी लापरवाही कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है।
प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
कोरबा का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन जरूरी है। हर बार हादसे के बाद सवाल उठते हैं, लेकिन जरूरी है कि अब जवाबदेही भी तय हो।

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