अब तक लाजो की कहानी में…
लाजो… एक चुलबुली, नटखट और मन से बिल्कुल साफ लड़की, जिसकी जिंदगी में होली के दिन एक नया रंग आया जब उसकी मुलाक़ात प्रेम से हुई।
एक छोटी सी शरारत से शुरू हुई यह मुलाक़ात धीरे-धीरे दोस्ती में बदलने लगी।
प्रेम की खामोशी और लाजो की चुलबुली बातें कब एक दूसरे को अच्छा लगने लगीं, उन्हें खुद भी पता नहीं चला।
Episode 3 में उनकी मुलाक़ातें और बढ़ीं, बातें गहरी हुईं और दोनों के दिलों में एक अनकही मोहब्बत जन्म लेने लगी।
अब कहानी उस मोड़ पर है जहाँ दिल की धड़कनें सिर्फ महसूस नहीं होंगी…
बल्कि शायद पहली बार इज़हार भी होगा।
अगर आपने पहले के एपिसोड नहीं पढ़े हैं तो यहाँ से शुरू करें:
Laajo (Episode 01): लाजो की रंगों वाली पहली मुलाक़ात

एक चुलबुली, नटखट, मगर मन से बेहद साफ लड़की।
ना कोई बनावटीपन, ना कोई छल।
पीली कुर्ती, गुलाबी दुपट्टा, माथे पर छोटी सी बिंदी और मुस्कान ऐसी कि जैसे हर ग़म को रंग लगा दे। अब तक उसकी ज़िंदगी में कोई लड़का नहीं आया था।
Laajo (Episode 02): प्रेम की तलाश और लाजो की शरारत

उसके सफेद कुर्ते पर लगा गुलाल अब हल्का पड़ने लगा था, मगर लाजो की मुस्कान की छाप उसके मन से मिटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
उसने धीरे-धीरे गली में कदम बढ़ाए। प्रेम की नज़र हर दरवाज़े पर जाती…
शायद कहीं लाजो फिर से दिख जाए।
Laajo (Episode 03): शुरू हुई चुलबुली छेड़खानी

आज लाजो का मूड पूरी तरह शरारती था। दोनों अब गली के किनारे खड़े थे।
हवा में रातरानी के फूलों की खुशबू घुल रही थी।
लाजो ने अचानक पूछा —
“तुम हमेशा इतने शांत रहते हो?”
प्रेम बोला —
“और तुम हमेशा इतनी बोलती रहती हो?”
इस एपिसोड में क्या खास है
आज के एपिसोड में आप पढ़ेंगे:
- प्रेम और लाजो की खास मुलाक़ात
- दिल की बातें और बढ़ती नजदीकियां
- एक ऐसा पल जो उनकी कहानी बदल देगा
एपिसोड 4: नदी किनारे दिल की धड़कनें
शाम का समय था।
सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था और उसकी सुनहरी रोशनी नदी के पानी पर चमक रही थी।
हल्की हवा चल रही थी… और दूर कहीं मंदिर की घंटी की आवाज़ आ रही थी।
प्रेम पहले से ही नदी किनारे खड़ा था।
उसकी नज़र हर आने वाले रास्ते पर थी।
और तभी…
पीछे से एक जानी-पहचानी आवाज आई —
“इतनी जल्दी आ गए?”
प्रेम पलटा।
वो थी… लाजो।

इंतज़ार में भी एक अजीब सी मिठास होती है,
हर पल में बस तुम्हारी ही आस होती है।
वक़्त ठहर सा जाता है तुम्हें सोचते हुए,
और दिल को तुम्हारे आने की प्यास होती है।
आज प्रेम लाजो का बेसब्री से इंतजार कर रहा था, हालांकि अभी लाजो को देर नहीं हुई थी आने में मगर मोहब्बत में थोड़ी इंतजार भी सदियों सा लगता है।
आज वो हल्के नीले रंग के सूट में थी। हवा से उसका दुपट्टा हल्का-हल्का उड़ रहा था।
कुछ पल के लिए प्रेम बस उसे देखता रह गया।
लाजो ने हँसते हुए कहा —
“ऐसे क्या देख रहे हो?
पहली बार देख रहे हो क्या?”
प्रेम धीरे से बोला —
“नहीं…
पर आज कुछ अलग लग रही हो।”
लाजो ने शरारत से पूछा —
“अच्छा? क्या अलग है?”
प्रेम मुस्कुराया —
“आज तुम्हें देखकर दिल थोड़ा ज्यादा खुश हो रहा है।”
लाजो पहली बार थोड़ी चुप हो गई।

जब मोहब्बत करीब आ जाती है, तो सांसें भी उसका नाम लेने लगती हैं,
धड़कनों में एक मीठा सा शोर बसने लगता है।
उसके पास होते ही जैसे दुनिया थम जाती है,
और दिल को पहली बार “घर” जैसा सुकून मिलने लगता है।
आज लाजो इतने करीब से देखना उसका इतना पास होना प्रेम को एक अलग ही एहसास दे रहा था जैसे खुद खो रहा हो, पूरे बदन में एक अलग ही एहसास था आज उसको अपने बदन का एक-एक रूंआ महसूस हो रहा था।
चुलबुली बातें… और दिल की धड़कन
दोनों नदी के किनारे-किनारे चलते रहे।
लाजो पत्थरों को पैर से हल्का सा धक्का देती जा रही थी।
“तुम हमेशा इतने serious क्यों रहते हो?”
उसने पूछा।
प्रेम बोला —
“क्योंकि मेरी ज़िंदगी में तुम्हारे जैसी हँसी पहले नहीं थी।”
लाजो ने उसकी तरफ देखा।
“मतलब?”
प्रेम ने कहा —
“मतलब…
जब से तुम मिली हो…
लगता है जैसे जिंदगी थोड़ी आसान हो गई है।”
लाजो ने नजरें झुका लीं।

अनकही नजदीकियाँ
चलते-चलते अचानक लाजो का पैर फिसलने लगा।
प्रेम ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
कुछ सेकंड…
दोनों एकदम पास खड़े थे।
इतने पास कि दोनों की धड़कनें जैसे एक दूसरे को सुन रही थीं।
लाजो ने धीरे से कहा —
“छोड़ो… कोई देख लेगा।”
लेकिन उसकी आवाज़ में ना विरोध था… ना जल्दी।
प्रेम ने धीरे से कहा —
“अगर छोड़ दूँ… तो गिर जाओगी।”
लाजो बोली —
“और अगर नहीं छोड़ा… तो?”
प्रेम ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा —
“तो शायद मैं खुद गिर जाऊँगा…”
लाजो की साँसें तेज हो गईं।
उसने धीरे से कहा —
“प्रेम… बस…”
दोनों कुछ पल खामोश हो गए।

जब दो मोहब्बत करने वाले मिलते हैं,
तो लफ़्ज़ कहीं खो जाते हैं, खामोशी ही गुनगुनाने लगती है।
नज़रें ही सारी बातें कह देती हैं चुपके से,
और दिल बिना बोले एक-दूजे को समझ जाने लगता है।
खामोशी में छुपी मोहब्बत
हवा चल रही थी, नदी की लहरों की आवाज थी।
और उन दोनों के बीच एक खामोशी थी…
जो शब्दों से ज्यादा बोल रही थी।
लाजो ने धीरे से कहा —
“मुझे अब घर जाना चाहिए…”
प्रेम कुछ नहीं बोला।
बस उसे देखता रहा।
लाजो मुड़ी… और धीरे-धीरे चलने लगी।
लेकिन शायद इस बार प्रेम खुद को रोक नहीं पाया।
“लाजो…”
उसने धीमी आवाज में पुकारा।
लाजो रुक गई।
प्रेम उसके पास आया… और अचानक उसे अपने गले से लगा लिया।

पहला आलिंगन… पहली स्वीकारोक्ति
लाजो एक पल के लिए हैरान रह गई। लेकिन उसने खुद को अलग नहीं किया। कुछ पल बाद उसकी आँखें बंद हो गईं। जैसे वो भी उसी एहसास में खो गई हो।
प्रेम धीरे से बोला —
“पता नहीं क्यों…
पर तुम्हें खोने का डर अभी से लगने लगा है।”
लाजो ने पहली बार उसके कंधे पर सिर रख दिया।
धीरे से बोली —
“तो खोने मत देना…”
प्रेम ने पूछा —
“और तुम?”
लाजो ने हल्की मुस्कान के साथ कहा —
“मैं…
शायद पहली बार खुद को रोक नहीं पा रही हूँ।”
दोनों कुछ देर वैसे ही खड़े रहे।
ना कोई जल्दी…
ना कोई शब्द…
बस दो दिल…
जो अब शायद एक दूसरे के आदी हो चुके थे।
एक नई शुरुआत
लाजो ने धीरे से खुद को अलग किया।
“अब सच में जाना होगा…”
प्रेम ने सिर्फ सिर हिलाया।
लाजो जाते-जाते बोली —
“प्रेम…”
“हाँ?”
“आज अगर मैं नहीं रुकती…
तो शायद कभी समझ नहीं पाती…
कि तुम्हारी खामोशी में इतना प्यार है।”
और फिर वो चली गई।
इस बार प्रेम ने उसे रोका नहीं।
क्योंकि अब उसे यकीन था…
यह कहानी अब रुकने वाली नहीं।
अगले एपिसोड में…
- क्या यह प्यार अब खुलकर सामने आएगा?
- क्या लाजो अपने दिल की बात घर पर बता पाएगी?
- या उनकी मोहब्बत के रास्ते में आएगी कोई नई मुश्किल?
Episode 5 – अगले रविवार

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