रिलेशनशिप

Laajo (Episode 02):  प्रेम की तलाश और लाजो की शरारत

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होली के उस दिन के बाद शाम ढल गई थी, लेकिन प्रेम के दिल में रंग अभी भी ताज़ा थे।

उसके सफेद कुर्ते पर लगा गुलाल अब हल्का पड़ने लगा था, मगर लाजो की मुस्कान की छाप उसके मन से मिटने का नाम ही नहीं ले रही थी।

वो बार-बार उसी गली की ओर देखता, जहाँ कुछ देर पहले एक चुलबुली लड़की ने उसके गाल पर गुलाल लगाकर जैसे उसकी ज़िंदगी में हल्की सी हलचल पैदा कर दी थी।

प्रेम को खुद समझ नहीं आ रहा था कि वो आखिर क्यों उस लड़की के बारे में इतना सोच रहा है।
नाम भी तो उसने बस एक बार ही सुना था — लाजो।

उसने धीरे-धीरे गली में कदम बढ़ाए।
गली अब पहले जैसी शोर-शराबे वाली नहीं रही थी।
रंगों की खुशबू हवा में अभी भी घुली हुई थी और कहीं-कहीं बच्चे अब भी पानी की पिचकारी से खेल रहे थे।

प्रेम की नज़र हर दरवाज़े पर जाती…
शायद कहीं लाजो फिर से दिख जाए।

यह “लाजो की प्रेम कहानी” श्रृंखला का दूसरा भाग है। अगर आपने पहला भाग नहीं पढ़ा है तो यहाँ पढ़ें – रंगों वाली पहली मुलाक़ात (Episode 1)।


Laajo (Episode 01): लाजो की रंगों वाली पहली मुलाक़ात

लाजो…एक चुलबुली, नटखट, मगर मन से बेहद साफ लड़की।
ना कोई बनावटीपन, ना कोई छल।
पीली कुर्ती, गुलाबी दुपट्टा, माथे पर छोटी सी बिंदी और मुस्कान ऐसी कि जैसे हर ग़म को रंग लगा दे।

वो अपने घर, अपनी छत, अपनी सहेलियों और अपनी मस्ती की दुनिया में ही खुश थी।


लाजो की दुनिया

उधर लाजो अपने घर के आँगन में बैठी थी।

उसकी सहेलियाँ अभी-अभी गई थीं और वो हाथ में पिचकारी घुमाते हुए मुस्कुरा रही थी।

उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था कि आज उसे इतनी हँसी क्यों आ रही है।

“अजीब लड़का था…”
वो धीरे से खुद से बोली।

जब उसने गुलाल लगाया था, तब उसके चेहरे पर जो हल्की सी मुस्कान आई थी, वही मुस्कान बार-बार लाजो को याद आ रही थी।

लेकिन अगले ही पल उसने सिर झटका —
“अरे लाजो, तू भी ना… किसी अजनबी के बारे में क्यों सोच रही है!”

इतना कहकर वो उठी और आँगन से बाहर झाँकने लगी।

प्रेम की तलाश

उधर प्रेम अभी भी उसी गली में घूम रहा था।

वो खुद से ही मुस्कुरा रहा था।
शायद वो उम्मीद कर रहा था कि लाजो फिर से कहीं अचानक सामने आ जाएगी… जैसे होली की सुबह आई थी।

अचानक उसके कानों में एक हल्की सी खिलखिलाहट सुनाई दी।

प्रेम ने पलटकर देखा।

गली के कोने पर वही गुलाबी दुपट्टा हवा में हल्का सा लहरा रहा था।

वो थी — लाजो।

फिर से शरारत

लाजो ने दूर से ही प्रेम को देख लिया था।

उसकी आँखों में फिर वही शरारत चमक उठी।

वो धीरे-धीरे उसके पास आई और मुस्कुराते हुए बोली —

“अरे प्रेम जी… अभी तक मोहल्ला घूम ही रहे हैं?”

प्रेम थोड़ा झेंप गया।

“नहीं… वो… मैं बस ऐसे ही…”

लाजो ने उसकी बात बीच में ही काट दी —

“किसी को ढूँढ रहे थे क्या?”

उसकी आँखों में हल्की सी शरारत थी, और होंठों पर वही मासूम मुस्कान।

प्रेम कुछ पल के लिए चुप रह गया।
उसे समझ नहीं आया कि क्या जवाब दे।

लाजो हँस पड़ी।

“देखिए… अगर किसी को ढूँढना है तो सीधे पूछ लीजिए।
हमारे मोहल्ले में लोग बहुत अच्छे हैं।”

एक छोटा सा भावनात्मक पल

प्रेम ने पहली बार लाजो की आँखों में थोड़ा गहराई से देखा।

वो मुस्कुराई जरूर थी, मगर उसकी आँखों में एक अलग ही सादगी थी।

जैसे वो सच में बहुत सरल और साफ दिल की लड़की हो।

प्रेम ने धीरे से कहा —

“असल में… मैं तुम्हें ढूँढ रहा था।”

लाजो कुछ पल के लिए चुप हो गई।

उसकी शरारती मुस्कान थोड़ी धीमी पड़ गई।

“मुझे?”
उसने हल्की हैरानी से पूछा।

प्रेम ने सिर हिलाया।

“हाँ… क्योंकि आज पहली बार लगा कि इस मोहल्ले में कोई है जो हर चीज़ को इतना खुश होकर जीता है।”

लाजो की आँखों में एक पल के लिए हल्की सी चमक आई।

लेकिन अगले ही पल वो फिर हँस पड़ी —

“अच्छा जी… तो अब आप दर्शन करने आए हैं?”

दिल में उतरती हुई हँसी

प्रेम भी अब मुस्कुरा दिया।

उसे लगने लगा था कि लाजो की हर बात में एक अलग ही जादू है।

कुछ देर दोनों गली के किनारे खड़े होकर बात करते रहे।

रंगों की खुशबू, ढलती हुई शाम और हवा में हल्की ठंडक…
सब कुछ जैसे उस पल को और खास बना रहा था।

लेकिन अचानक लाजो ने घड़ी की ओर देखा और बोली —

“अरे… मुझे घर जाना होगा।
अम्मा बुला रही होंगी।”

वो जाने के लिए मुड़ी… फिर एक पल के लिए रुकी।

और मुस्कुराकर बोली —

“कल शाम मंदिर के पास वाली गली में अक्सर मैं अपनी सहेलियों के साथ आती हूँ…”

फिर उसने शरारती अंदाज़ में कहा —

“अगर सच में मुझे ढूँढ रहे थे… तो शायद वहाँ मिल जाऊँ।”

और फिर वो हल्की दौड़ लगाते हुए अपने घर की ओर चली गई।

प्रेम वहीं खड़ा उसे जाता हुआ देखता रहा।

आज उसे पहली बार लगा कि शायद यह मुलाक़ात सिर्फ होली का एक संयोग नहीं थी…

शायद यह किसी नई कहानी की शुरुआत थी।


🌸 अगले एपिसोड में…

क्या प्रेम सच में अगले दिन मंदिर वाली गली में जाएगा?

और अगर गया…
तो क्या लाजो सच में वहाँ उसका इंतज़ार करेगी?

या फिर लाजो की शरारत एक नई गलतफहमी पैदा कर देगी?

Laajo (Episode 03): जब प्रेम बना राज और शुरू हुई चुलबुली छेड़खानी

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