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Laajo (Episode 03): जब प्रेम बना राज और शुरू हुई चुलबुली छेड़खानी

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अब तक आपने पढ़ा…

लाजो की चुलबुली और नटखट हरकतों के बीच होली के दिन उसकी मुलाक़ात प्रेम से हुई।
एक मासूम सी शरारत से शुरू हुई यह मुलाक़ात प्रेम के दिल में एक खास जगह बना गई।

Episode 2 में प्रेम बार-बार उसी गली में लाजो को ढूँढने आता है, और आखिरकार लाजो से उसकी दूसरी मुलाक़ात होती है।
दोनों के बीच हल्की छेड़खानी और प्यारी बातचीत शुरू होती है, जिससे यह साफ हो जाता है कि यह कहानी अब सिर्फ संयोग नहीं रही।

अगर आपने पहले के एपिसोड नहीं पढ़े हैं:

👉 Episode 1 – रंगों वाली पहली मुलाक़ात

एक चुलबुली, नटखट, मगर मन से बेहद साफ लड़की।
ना कोई बनावटीपन, ना कोई छल।
पीली कुर्ती, गुलाबी दुपट्टा, माथे पर छोटी सी बिंदी और मुस्कान ऐसी कि जैसे हर ग़म को रंग लगा दे। अब तक उसकी ज़िंदगी में कोई लड़का नहीं आया था।

👉 Episode 2 – प्रेम की तलाश

उसके सफेद कुर्ते पर लगा गुलाल अब हल्का पड़ने लगा था, मगर लाजो की मुस्कान की छाप उसके मन से मिटने का नाम ही नहीं ले रही थी।

उसने धीरे-धीरे गली में कदम बढ़ाए। प्रेम की नज़र हर दरवाज़े पर जाती…
शायद कहीं लाजो फिर से दिख जाए।

अब आगे…

जब प्रेम बना राज और शुरू हुई चुलबुली छेड़खानी

शाम की हल्की सुनहरी धूप गली में फैल रही थी।
प्रेम आज फिर उसी गली में आया था।

लेकिन आज उसके चेहरे पर हल्की घबराहट भी थी… और एक उम्मीद भी।

वो बार-बार उसी घर की तरफ देख रहा था जिसके दरवाज़े पर कल लाजो खड़ी थी।

आज दरवाज़ा बंद था।

प्रेम ने धीरे से खुद से कहा —
“शायद आज नहीं आएगी…”

इतना सोचकर वो वापस मुड़ने ही वाला था कि अचानक दरवाज़ा हल्का सा खुला।

और फिर वही आवाज…

“लगता है किसी को बहुत जल्दी थी जाने की…”

प्रेम पलटा। दरवाज़े की ओट से लाजो झाँक रही थी। उसकी आँखों में फिर वही शरारत थी।

लाजो ने मुस्कुराते हुए पूछा —

“वैसे एक बात पूछूँ?”

प्रेम थोड़ा हिचकते हुए बोला —
“हाँ…”

लाजो बोली —

“कल मोहल्ले की रीना बता रही थी कि तुम्हारा नाम प्रेम नहीं… राज है?”

प्रेम हल्का सा मुस्कुराया।

“असल में… घर वाले मुझे राज कहते हैं… और दोस्तों के बीच प्रेम।”

लाजो तुरंत बोली —

“अच्छा! तो दिल के मामलों में प्रेम… और बाकी दुनिया के लिए राज?”

प्रेम हँस पड़ा।

“शायद…”

लाजो ने मजाक में कहा —

“ठीक है… मैं तुम्हें राज ही बुलाऊँगी… क्योंकि अभी तो तुम बस गली में घूमने वाले पड़ोसी हो।”

🌸 शुरू हुई छेड़खानी

आज लाजो का मूड पूरी तरह शरारती था।

वो दरवाज़े के पास खड़ी होकर बोली —

“वैसे एक बात बताओ राज जी…
आप रोज़ यहाँ टहलने आते हैं या किसी खास वजह से?”

प्रेम ने पहली बार थोड़ा हिम्मत करके कहा —

“अगर कहूँ कि वजह तुम हो… तो?”

लाजो कुछ पल के लिए चुप हो गई।

फिर मुस्कुराकर बोली —

“इतनी जल्दी सच बोल दिया?
थोड़ा suspense तो रहने देते!”

🌸 दिल की धड़कन और मुस्कान

दोनों अब गली के किनारे खड़े थे।

हवा में रातरानी के फूलों की खुशबू घुल रही थी।

लाजो ने अचानक पूछा —

“तुम हमेशा इतने शांत रहते हो?”

प्रेम बोला —

“और तुम हमेशा इतनी बोलती रहती हो?”

लाजो हँस पड़ी।

“मैं ऐसी ही हूँ… बचपन से।”

फिर थोड़ी गंभीर होकर बोली —

“पर एक बात है…
जो लोग कम बोलते हैं ना… वो ज्यादा सच्चे होते हैं।”

प्रेम ने उसकी तरफ देखा।

“और जो लोग ज्यादा हँसते हैं… वो अंदर से बहुत साफ होते हैं।”

लाजो पहली बार थोड़ा शर्मा गई।

🌸 छोटी सी शरारत

अचानक लाजो ने पूछा —

“अच्छा सच बताओ…
तुम मुझे ढूँढने आए थे ना?”

प्रेम ने सिर हिलाया —

“हाँ।”

लाजो बोली —

“तो फिर एक काम करो।”

“क्या?”

“अगर सच में मुझसे बात करनी है… तो पहले मेरी एक शर्त माननी होगी।”

प्रेम चौक गया —

“क्या शर्त?”

लाजो बोली —

“कल मंदिर वाली गली में आना…
और मेरे लिए फूल लाना।”

प्रेम ने पूछा —

“कौन से फूल?”

लाजो मुस्कुराई —

“जो दिल से लाओगे… वही सही होंगे।”


🌸 दिल में उठती नई भावना

आज पहली बार प्रेम को लगा कि लाजो सिर्फ चुलबुली नहीं है…

वो दिल से बहुत गहरी लड़की है।

वो जाते-जाते बोली —

“और हाँ… अगर फूल नहीं लाए… तो मैं बात नहीं करूँगी।”

फिर वो हँसते हुए अंदर चली गई।

प्रेम वहीं खड़ा सोचता रहा। आज उसकी मुस्कान में एक नया confidence था। उसे लगा शायद यह कहानी अब सिर्फ मुलाक़ात की नहीं रही…


🌸 अगले एपिसोड में…

क्या प्रेम सच में फूल लेकर आएगा?

क्या लाजो सच में उसका इंतज़ार करेगी?

या लाजो की यह शरारत प्रेम के लिए एक परीक्षा है?

👉 Episode 4 – अगले रविवार

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