तमिलनाडु की राजनीति में इस समय C. Joseph Vijay एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं। Madras High Court में दायर अलग-अलग याचिकाओं में TVK प्रमुख विजय पर चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों का इस्तेमाल करने, चुनावी हलफनामे में कथित आय और संपत्ति छुपाने तथा वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई शुरू कर दी है और कई मामलों में जवाब भी मांगा है।
बच्चों के इस्तेमाल को लेकर PIL पर हाई कोर्ट सख्त
हाल ही में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया कि 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान TVK ने वोट मांगने और प्रचार गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल किया। याचिकाकर्ता ने इसे चुनावी आचार संहिता और बाल अधिकारों के खिलाफ बताया।
मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने चुनाव प्रचार में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर चिंता जताई है।
विजय पर आय छुपाने और वित्तीय अनियमितता के आरोप
दूसरे मामले में विजय के चुनावी हलफनामों में कथित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में दाखिल हलफनामों में संपत्ति का आंकड़ा अलग-अलग बताया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार एक हलफनामे में विजय की संपत्ति लगभग ₹115 करोड़ दिखाई गई, जबकि दूसरे में यह आंकड़ा ₹220 करोड़ से अधिक बताया गया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि “₹100 करोड़ से अधिक की जानकारी का खुलासा नहीं किया गया, यह एक अनियमितता प्रतीत होती है।”

FIR और PMLA जांच की मांग
एक अन्य याचिका में विजय के खिलाफ FIR दर्ज करने और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय लेनदेन और आय से जुड़ी जानकारियां पूरी तरह सामने नहीं रखी गईं।
मद्रास हाई कोर्ट ने रजिस्ट्री को इस याचिका को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है ताकि इसकी सुनवाई की जा सके।
राजनीतिक असर भी बढ़ा
TVK की चुनावी सफलता के बाद विजय की राजनीतिक छवि लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही है। ऐसे में हाई कोर्ट में चल रहे ये मामले विपक्ष को भी सरकार और TVK पर हमला करने का मौका दे रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी मामले में कोर्ट ने विजय को दोषी नहीं ठहराया है और सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
क्या आगे हो सकता है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि अदालत को प्रारंभिक जांच में पर्याप्त आधार मिलता है, तो आयकर विभाग, चुनाव आयोग या अन्य एजेंसियों की विस्तृत जांच शुरू हो सकती है। वहीं बच्चों के इस्तेमाल वाले मामले में चुनावी नियमों और बाल संरक्षण कानूनों के तहत भी कार्रवाई संभव मानी जा रही है।

Comments