देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय बाद तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। नई दरें लागू होने के बाद कई शहरों में पेट्रोल की कीमतें फिर 100 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई हैं।
तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गईं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल अब करीब 97 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है।
आखिर क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
सरकार और तेल कंपनियों के सामने पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बड़ी चुनौती बनी हुई थीं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का असर सीधे ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। इसी वजह से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया।
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
Petrol Diesel Price Hike का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है। इसका असर फल, सब्जी, दूध और रोजमर्रा के दूसरे सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होती है। यही वजह है कि ईंधन दरों में बदलाव का असर धीरे-धीरे पूरे बाजार में दिखाई देता है।
आर्थिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है, खासकर अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं।
किन शहरों में कितना बढ़ा दाम?
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत सभी बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। अलग-अलग राज्यों में टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
मुंबई में पेट्रोल की कीमत में 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं कई शहरों में डीजल भी 90 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ सरकार ईंधन कंपनियों पर बढ़ते दबाव को संभालना चाहती है, वहीं दूसरी ओर महंगाई को नियंत्रण में रखना भी बड़ी चुनौती है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है।
हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह फैसला जरूरी हो गया था। ऊर्जा सुरक्षा और लगातार बढ़ती आयात लागत ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।
आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में ईंधन के दामों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि फिलहाल सरकार की नजर वैश्विक हालात और घरेलू महंगाई दोनों पर बनी हुई है। ऐसे में अगले कुछ सप्ताह ईंधन बाजार के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।
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