श्री मलूक पीठ वृंदावन के वंशीवट मोहल्ला, यमुना पुलिन क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्राचीन आध्यात्मिक स्थल है। पहले इस स्थान को श्री मलूक दास जी अखाड़ा के नाम से जाना जाता था।
दरअसल, इस पवित्र स्थान पर संत-शिरोमणि संत श्री मलूक दास जी लगभग 2500 संतों के साथ निवास करते थे। उस समय यहां संतजन अपना जीवन ठाकुर सेवा, साधु सेवा और भजन-कीर्तन में समर्पित करते थे। यह स्थान आज भी उसी भक्ति और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
वर्तमान समय में श्री मलूक पीठ एक प्रतिष्ठित सनातन धर्म संस्था के रूप में कार्य कर रही है। इसका नेतृत्व परम पूज्य मलूक पीठाधीश्वर श्री जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में हो रहा है।
उनके सशक्त नेतृत्व में यहां कई धार्मिक और सामाजिक सेवाएं निरंतर संचालित की जा रही हैं।

श्री मलूक पीठ, वृंदावन में श्री देवादास जी महाराज “पहाड़ी बाबा” का चित्र
श्री मलूक पीठ में होने वाली प्रमुख सेवाएं और गतिविधियां
श्री मलूक पीठ में केवल धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं होते, बल्कि समाज सेवा के कई महत्वपूर्ण कार्य भी किए जाते हैं।
यहां नियमित रूप से निम्नलिखित सेवाएं संचालित की जाती हैं—
- ठाकुर (भगवान) सेवा और पूजा-अर्चना
- साधु-संत सेवा और सत्संग कार्यक्रम
- गुरुकुल शिक्षा कार्यक्रम, जहां विद्यार्थियों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा दी जाती है
- गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन सेवा
- मरीजों और जरूरतमंदों के लिए चिकित्सा सहायता
- भारतीय पारंपरिक संगीत प्रशिक्षण, जैसे—
- हारमोनियम सीखना
- तबला वादन
- भजन-कीर्तन का अभ्यास
इसके अलावा, यहां आने वाले विद्यार्थियों और भक्तों को भारतीय संस्कृति और भक्ति संगीत की शिक्षा भी दी जाती है। इससे नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में मदद मिलती है।




श्री मलूक पीठ गौशाला की विशेषताएं
श्री मलूक पीठ गौशाला मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर चार संप्रदाय आश्रम मार्ग पर स्थित है।
यह गौशाला भारतीय वैदिक गायों की सेवा और संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में गायों की देखभाल अत्यंत प्रेम और श्रद्धा से की जाती है।
गौशाला में उत्पादित दूध और उससे बने पदार्थ—
जैसे घी, मठा (छाछ) और दही— ठाकुर सेवा और प्रसाद के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
इसके साथ ही, गायों के लिए उचित भोजन की भी विशेष व्यवस्था की जाती है। प्रतिदिन उनके लिए हरा चारा, दलिया और गुड़ ट्रॉलियों के माध्यम से लाया जाता है।
यदि किसी गाय को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है, तो उसके उपचार के लिए भी उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
श्रीमलूकपीठ द्वारा प्रकाशित प्रमुख ग्रन्थ
श्रीमलूकपीठ द्वारा अनेक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं भक्ति संबंधी ग्रन्थ प्रकाशित किए गए हैं, जिनमें उपासना दर्पण, श्री भक्तमाल, श्री भक्तमाल (भक्तवल्लभा टिप्पणी), नित्य उपासना एवं दैनिक स्तुति संग्रह, भक्त चरित्र भावना गुरु, श्री सदगुरु चरितामृतम् तथा श्रीसदगुरु चरितामृतम् (सागुणवाद) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त परमार्थ के पत्र पुष्प, गवर्धन प्रयोग, श्री मूलक वाणी, गो भक्तमाल, महात्मा श्री बवेरिक का उपाख्यान और भागवत नाम माहात्म्य जैसे ग्रन्थ भी प्रकाशित किए गए हैं, जो साधकों एवं भक्तों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन और भक्ति ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
जाखोदेर गोधाम (Jadkhor Godham) और गौसंरक्षण कार्य
परम पूज्य श्री राजेंद्र दास जी महाराज ने राजस्थान के भरतपुर जिले में श्री ब्रज कामद सुरभि वन एवं शोध संस्थान (जाखोदेर गोधाम) की स्थापना की है।
यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण, अपने बड़े भाई बलराम जी और मित्रों के साथ गाय चराने (गोचारण) के लिए आते थे।
इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने यह संकल्प लिया था कि वे ब्रजभूमि को कभी नहीं छोड़ेंगे।
वर्तमान समय में जाखोदेर गोधाम में 9000 से अधिक गायें सुरक्षित और आरामदायक वातावरण में रह रही हैं। इनमें से अधिकांश गायों को कसाइयों और बूचड़खानों से बचाकर यहां लाया गया है।
राजेंद्र दास जी महाराज अपनी प्रत्येक कथा में गौसेवा और गौसंरक्षण का संदेश अवश्य देते हैं।
इसके अलावा, भविष्य में यहां एक आधुनिक गौ अस्पताल (Cow Hospital) स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है, जहां बीमार गायों का उपचार किया जाएगा।

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