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विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने 180 छात्रों को दी स्कॉलरशिप, गांव पहुंचकर बढ़ाया बच्चों का हौसला

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने सरकारी स्कूलों के 180 छात्रों को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित किया

तेलुगु सिनेमा के लोकप्रिय कलाकार विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई फिल्म नहीं, बल्कि उनका सामाजिक काम है।

दोनों तेलंगाना के थुम्मनपेट गांव पहुंचे। यहां उन्होंने सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देकर सम्मानित किया। यह पहल द देवरकोंडा फाउंडेशन के जरिए की गई है।

थुम्मनपेट गांव पहुंचे विजय और रश्मिका

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना ने तेलंगाना के थुम्मनपेट गांव का दौरा किया। यह गांव विजय देवरकोंडा के पिता से जुड़ा बताया जाता है।

इस दौरान दोनों ने सरकारी स्कूलों के छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों से बात की और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।

44 सरकारी स्कूलों के 180 छात्रों को मिला सम्मान

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्कॉलरशिप पहल में अचमपेट मंडल के करीब 44 सरकारी स्कूल शामिल रहे। इन स्कूलों के 180 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया।

बताया जा रहा है कि इनमें कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्र शामिल थे। इन छात्रों ने पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया था।

बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाना भी मकसद

इस कार्यक्रम का मकसद केवल आर्थिक मदद देना नहीं था। इसका उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना भी था।

दरअसल, ग्रामीण इलाकों के कई बच्चे पढ़ाई में अच्छे होते हैं। फिर भी उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन नहीं मिल पाता। ऐसे में यह पहल उनके लिए बड़ी मदद बन सकती है।

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विजय देवरकोंडा ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बात कही

विजय देवरकोंडा ने इस स्कॉलरशिप कार्यक्रम को आगे भी जारी रखने की इच्छा जताई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि वह इस पहल को आने वाले समय में और बड़ा करना चाहते हैं।

फिलहाल यह कार्यक्रम स्थानीय सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए है। हालांकि, भविष्य में इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

शिक्षा को मजबूत आधार मानते हैं विजय

विजय देवरकोंडा पहले भी सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। इस बार उनका ध्यान शिक्षा पर रहा।

शिक्षा किसी भी बच्चे के भविष्य की सबसे मजबूत नींव होती है। इसलिए इस तरह की स्कॉलरशिप बच्चों को आगे बढ़ने में मदद कर सकती है।

रश्मिका मंदाना ने छात्रों को किया प्रेरित

कार्यक्रम में रश्मिका मंदाना ने भी बच्चों से बात की। उन्होंने छात्रों को मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

स्क्रीनशॉट में दिख रहे पोस्ट के अनुसार, रश्मिका ने बच्चों को जीत और हार दोनों से सीखने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने माता-पिता और शिक्षकों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कही।

सोशल मीडिया पर फैंस ने की तारीफ

सोशल मीडिया पर इस पहल की खूब चर्चा हो रही है। फैंस विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की तारीफ कर रहे हैं।

विजय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्कॉलरशिप के पहले साल में 45 स्कूलों के 180 छात्रों तक मदद पहुंची। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में स्कूलों की संख्या 44 बताई गई है। ऐसे में आधिकारिक आंकड़े का इंतजार किया जा सकता है।

फैंस को पसंद आया दोनों का अंदाज

रश्मिका मंदाना की प्रतिक्रिया भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रही। उन्होंने विजय के पोस्ट पर प्यार भरा जवाब दिया।

इसके बाद फैंस ने दोनों की इस पहल को और ज्यादा सराहा। कई लोगों ने लिखा कि जब सितारे समाज के लिए काम करते हैं, तो उनका प्रभाव और बड़ा हो जाता है।

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ग्रामीण छात्रों के लिए क्यों जरूरी है स्कॉलरशिप?

भारत के ग्रामीण इलाकों में कई बच्चे पढ़ाई में बेहतर होते हैं। लेकिन आर्थिक परेशानी और संसाधनों की कमी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते।

ऐसे में स्कॉलरशिप उनके लिए बड़ा सहारा बन सकती है। इससे बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। साथ ही, उन्हें यह भरोसा भी मिलता है कि उनकी मेहनत को पहचान मिल रही है।

सम्मान से बढ़ता है बच्चों का हौसला

जब किसी छात्र को सार्वजनिक मंच पर सम्मान मिलता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। वह खुद को केवल गांव या स्कूल तक सीमित नहीं मानता।

इसके बाद वह बड़े सपने देखने लगता है। यही कारण है कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के मन पर सकारात्मक असर डालते हैं।

निष्कर्ष

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की यह पहल केवल एक सेलिब्रिटी इवेंट नहीं है। यह शिक्षा के लिए एक सकारात्मक संदेश भी है।

180 छात्रों को स्कॉलरशिप देकर दोनों ने दिखाया कि समाज में बदलाव लाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना जरूरी है।

यह कार्यक्रम उन बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर ऐसी पहल आगे भी जारी रहती है, तो कई ग्रामीण छात्रों का भविष्य बेहतर हो सकता है।

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