भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (Gaganyaan) को लेकर ISRO ने बड़ा अपडेट दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने कहा है कि गगनयान कार्यक्रम की पहली बिना अंतरिक्ष यात्रियों वाली यानी uncrewed mission को अगले चार महीनों के भीतर लॉन्च करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मिशन की तैयारियों के तहत अब तक करीब 8,000 परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।
यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गगनयान भारत का पहला ऐसा कार्यक्रम है, जिसके जरिए देश अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भारतीय लॉन्च व्हीकल और स्वदेशी तकनीक की मदद से अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है।
National Space Day पर ISRO चीफ ने दिया अपडेट
23 अगस्त को अहमदाबाद में आयोजित तीसरे National Space Day समारोह के दौरान डॉ. वी. नारायणन ने गगनयान की तैयारियों की जानकारी साझा की। उनके मुताबिक मिशन अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। पहले बिना क्रू वाली उड़ानों के जरिए पूरे सिस्टम को परखा जाएगा और उसके बाद ही अंतरिक्ष यात्रियों के साथ मिशन की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
दरअसल, मानव को अंतरिक्ष में भेजना सामान्य satellite launch से कहीं ज्यादा जटिल प्रक्रिया है। इसमें केवल रॉकेट को सही कक्षा तक पहुंचाना पर्याप्त नहीं होता। Crew Module, life-support system, navigation, communication, emergency escape system और पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी जैसी कई तकनीकों को बेहद भरोसेमंद होना जरूरी है।
इसी वजह से ISRO पहले uncrewed missions के जरिए उन परिस्थितियों को जांचना चाहता है जिनका सामना बाद में अंतरिक्ष यात्रियों को करना होगा।
National Space Day पर ISRO चीफ अपडेट: Gaganyaan-G1 Launch campaign commences
क्या होती है uncrewed Gaganyaan flight?
Uncrewed mission में अंतरिक्ष यान को लगभग उसी तरह लॉन्च किया जाता है जैसे मानव मिशन के दौरान किया जाएगा, लेकिन उसके अंदर अंतरिक्ष यात्री मौजूद नहीं होते। इससे वैज्ञानिक वास्तविक उड़ान के दौरान spacecraft और उसके अलग-अलग systems के व्यवहार को समझ सकते हैं।
इस तरह की उड़ान से launch vehicle, crew module और recovery system सहित कई महत्वपूर्ण प्रणालियों का परीक्षण वास्तविक परिस्थितियों में किया जा सकेगा। यदि किसी तकनीकी हिस्से में सुधार की जरूरत सामने आती है तो crewed flight से पहले उसे ठीक करने का समय भी मिल जाता है।
ISRO की ओर से पहले जारी जानकारी में भी कहा गया था कि गगनयान की पहली uncrewed mission अंतिम तैयारी के चरण में है और 8,000 से अधिक ground tests किए जा चुके हैं।
ISRO ने इस वित्त वर्ष के लिए भी रखा बड़ा लक्ष्य
गगनयान के अलावा ISRO ने अपने दूसरे अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर भी काम तेज किया है। डॉ. नारायणन के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में संगठन 12 satellites तैयार करने और आठ launch vehicle missions को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
वहीं, आने वाले वर्षों में भारत Chandrayaan के अगले missions, Venus mission और अपने space station जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर भी काम कर रहा है। ऐसे में गगनयान केवल एक मानव अंतरिक्ष उड़ान नहीं, बल्कि भारत के लंबे अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक अहम कड़ी बन जाता है।
गगनयान की पहली उड़ान क्यों है खास?
भारत पहले ही चंद्रयान-3 की सफलता और सूर्य के अध्ययन के लिए Aditya-L1 जैसे missions के जरिए अपनी अंतरिक्ष क्षमता दिखा चुका है। हालांकि मानव को अपने स्वयं के spacecraft से अंतरिक्ष में भेजना तकनीकी दृष्टि से एक अलग स्तर की चुनौती है।
इसलिए आने वाली पहली uncrewed flight पर वैज्ञानिकों के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यदि यह परीक्षण योजना के मुताबिक सफल रहता है तो भारत अपने पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन के एक और महत्वपूर्ण पड़ाव के करीब पहुंच जाएगा।

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