शादी के कुछ महीने या साल बीतते ही एक सवाल बहुत से पति-पत्नी की जिंदगी का पीछा करने लगता है—“खुशखबरी कब दे रहे हो?” शुरुआत में यही सवाल मजाक या अपनापन लग सकता है, लेकिन जब यह बार-बार पूछा जाने लगे, इसके साथ सलाह, ताने, तुलना और किसी एक को जिम्मेदार ठहराना जुड़ जाए, तो यही बात पति-पत्नी के बीच तनाव की वजह बनने लगती है।
सबसे दुखद स्थिति तब बनती है जब जिस समय दोनों को एक-दूसरे का सबसे ज्यादा सहारा चाहिए, उसी समय वे एक-दूसरे से दूर होने लगते हैं। पत्नी सोचती है कि पति परिवार के सामने उसका साथ नहीं देता, वहीं पति को लग सकता है कि वह दोनों तरफ से दबाव में है। धीरे-धीरे बातचीत कम होती है, नाराजगी बढ़ती है और एक ऐसा रिश्ता, जिसकी शुरुआत साथ जीवन बिताने के वादे से हुई थी, केवल “संतान होगी या नहीं” के सवाल के इर्द-गिर्द सिमटने लगता है।
यहां एक बात बहुत संवेदनशीलता से समझनी जरूरी है—संतान परिवार का बेहद प्यारा और महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है, लेकिन पति-पत्नी के रिश्ते का अस्तित्व केवल संतान पर निर्भर नहीं होता। विवाह की पहली नींव दो इंसानों के बीच भरोसा, सम्मान, प्रेम, देखभाल और साथ है। यही नींव मजबूत रहे तो जीवन के मुश्किल दौर भी मिलकर पार किए जा सकते हैं।
समस्या हमेशा संतान न होना नहीं, उसके आसपास पैदा होने वाला दबाव होता है
कई बार पति-पत्नी अपनी स्थिति को लेकर आपस में उतने परेशान नहीं होते, जितना उन्हें आसपास के सवाल परेशान करने लगते हैं। किसी रिश्तेदार का पूछना—“अभी तक बच्चा क्यों नहीं हुआ?”, किसी का डॉक्टर या मंदिर सुझाना, किसी का दूसरी बहू या बेटी से तुलना करना और किसी का बिना चिकित्सकीय जानकारी के महिला को दोष दे देना मानसिक रूप से बेहद थकाने वाला हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में प्रजनन आयु के लगभग हर छह लोगों में से एक व्यक्ति अपने जीवन में infertility का अनुभव करता है। इसके कारण महिला, पुरुष, दोनों से जुड़े या कभी-कभी अस्पष्ट भी हो सकते हैं। इसके बावजूद सामाजिक स्तर पर दोष अक्सर महिला पर अधिक डाला जाता है। WHO भी बताता है कि infertility से जुड़े सामाजिक दबाव के कारण लोगों को stigma, emotional stress, anxiety और low self-esteem जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए किसी महिला से बार-बार यह पूछना कि “तुम मां कब बनोगी?” केवल एक सामान्य पारिवारिक सवाल नहीं रह जाता। कई परिस्थितियों में यह उसके भीतर चल रही ऐसी लड़ाई को और कठिन बना सकता है, जिसके बारे में परिवार को कुछ पता भी नहीं होता।
पति-पत्नी के बीच सबसे खतरनाक शब्द है—“तुम्हारी वजह से”
संतान को लेकर परेशानी का सामना कर रहे रिश्ते में सबसे ज्यादा नुकसान उस दिन शुरू होता है जब समस्या “हमारी” रहने के बजाय “तुम्हारी” बन जाती है।
“तुम्हारी रिपोर्ट में समस्या है।”
“मेरे घरवालों को तुमसे उम्मीद थी।”
“तुम्हारी वजह से मुझे लोगों की बातें सुननी पड़ती हैं।”
ऐसी बातें किसी व्यक्ति को केवल दुख नहीं पहुंचातीं, बल्कि उसके मन में यह डर बैठा सकती हैं कि शायद जीवनसाथी का प्यार भी किसी शर्त पर टिका था।
इसके विपरीत वही परिस्थिति बहुत अलग महसूस हो सकती है जब पति या पत्नी कहे—“रिपोर्ट किसी एक की हो सकती है, लेकिन यह सफर हम दोनों का है।”
Fertility problems का सामना करने वाले couples पर हुई psychological research भी बताती है कि जब दोनों partners समस्या को मिलकर संभालते हैं और उनकी coping एक-दूसरे के अनुकूल होती है, तो communication बेहतर रह सकता है और कुछ couples में कठिन समय के बावजूद रिश्ता और मजबूत हो सकता है। वहीं अलग-अलग दिशाओं में तनाव संभालने से negative communication और relationship strain बढ़ सकता है।
यानी मुश्किल परिस्थिति अपने आप विवाह को नहीं तोड़ती। कई बार यह तय करता है कि उस परिस्थिति में दोनों एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होते हैं या एक-दूसरे के साथ।
भरोसा वह जगह है जहां जीवनसाथी बिना डर के अपना दर्द रख सके
पति-पत्नी के रिश्ते में भरोसे का अर्थ केवल fidelity नहीं है। भरोसा यह भी है कि मैं अपनी कमजोरी, डर और असफलता तुम्हारे सामने रख सकूं और मुझे यह डर न हो कि कल उसी कमजोरी का इस्तेमाल मेरे खिलाफ किया जाएगा।
किसी महिला को अगर यह डर हो कि fertility test में कोई समस्या निकली तो पति या ससुराल वाले उसे दोष देंगे, तो वह अपनी चिंता अकेले सह सकती है। इसी तरह पुरुषों में fertility से जुड़ी समस्या होने पर उन्हें भी शर्म, सामाजिक धारणा या masculinity से जुड़े दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे समय में जीवनसाथी का एक छोटा-सा व्यवहार बहुत बड़ी सुरक्षा देता है—डॉक्टर के पास साथ जाना, रिपोर्ट साथ समझना, किसी रिश्तेदार के अनुचित सवाल का जवाब खुद देना या बस यह कहना कि “जो भी होगा, हम दोनों मिलकर देखेंगे।”
कभी-कभी रिश्ते को बचाने के लिए बड़ी-बड़ी romantic बातों की जरूरत नहीं होती। यह भरोसा काफी होता है कि दुनिया मेरे बारे में कुछ भी कहे, घर लौटने पर मेरा साथी मेरे खिलाफ नहीं खड़ा होगा।
संतान महत्वपूर्ण है, लेकिन पति-पत्नी का रिश्ता केवल माता-पिता बनने के लिए नहीं बना
इस विषय पर बात करते समय यह कहना भी उचित नहीं होगा कि संतान का महत्व कम है। बहुत से couples माता-पिता बनने की गहरी इच्छा रखते हैं। बच्चे की चाह स्वाभाविक है और उसके पूरे न होने का दुख भी वास्तविक है।
लेकिन विवाह को केवल संतान प्राप्ति का माध्यम बना देना रिश्ते के साथ अन्याय है।
जिस स्त्री या पुरुष का हाथ आपने जीवनसाथी के रूप में पकड़ा था, वह केवल भविष्य के बच्चे की मां या पिता नहीं था। वह आपका दोस्त, साथी, विश्वासपात्र और जीवन के सुख-दुख का सहभागी भी था।
यही बात पारिवारिक दबाव के बीच अक्सर पीछे छूट जाती है। Couple डॉक्टर, जांच, ovulation dates, medicines, relatives और pregnancy expectations में इतना उलझ सकता है कि उसे याद ही नहीं रहता कि कभी दोनों बिना किसी उद्देश्य के साथ बैठते थे, घूमते थे, हंसते थे और भविष्य के हजार दूसरे सपने भी देखते थे।
माता-पिता बनना रिश्ते का एक खूबसूरत अध्याय हो सकता है, लेकिन वही पूरी किताब नहीं है।
जब पत्नी की कीमत उसके मां बनने से और पति की कीमत पिता बनने से तय होने लगे
किसी महिला का अस्तित्व उसकी fertility से तय नहीं होता। उसी तरह किसी पुरुष की पूर्णता उसकी पिता बनने की क्षमता से निर्धारित नहीं होती।
परिवारों में कभी-कभी अनजाने में ऐसी भाषा इस्तेमाल होने लगती है जिसमें व्यक्ति पीछे छूट जाता है और केवल संतान की संभावना दिखाई देने लगती है। “वंश कौन बढ़ाएगा?”, “घर का वारिस चाहिए”, “अब इलाज कब करा रहे हो?” जैसी बातें बोलने वाले को सामान्य लग सकती हैं, लेकिन उन्हें सुनने वाले couple के लिए यह लगातार psychological pressure बन सकता है।
और जब यह दबाव घर के भीतर पहुंच जाता है, तो पति-पत्नी एक-दूसरे से भी उसी भाषा में बात करने लग सकते हैं।
यहीं दोनों को खुद को याद दिलाने की जरूरत है—“हमारी शादी का मूल्य किसी medical report से तय नहीं होगा।”
एक-दूसरे की care fertility treatment से बाहर भी दिखाई देनी चाहिए
जब संतान की कोशिश लंबे समय तक चलती है, तो care भी केवल medicines, tests और doctor appointments तक सीमित होने लगती है। लेकिन एक relationship को बचाने वाली care इससे कहीं बड़ी है।
दिन कैसा रहा, खाना खाया या नहीं, आज मन परेशान क्यों है, किसी बात से दुख हुआ क्या—ये सामान्य सवाल फिर से रिश्ते में लौटने चाहिए।
कभी fertility की कोई बात किए बिना साथ चाय पीना, कहीं बाहर जाना, पुरानी पसंद की फिल्म देखना या बस थोड़ी देर बैठकर बात करना भी जरूरी है।
क्योंकि अगर पति-पत्नी की पूरी जिंदगी pregnancy की कोशिश में बदल जाए तो physical intimacy भी धीरे-धीरे भावनात्मक intimacy खो सकती है। सेक्स प्यार और नजदीकी की जगह केवल fertile window और conception का माध्यम महसूस होने लगता है।
रिश्ते को उस दबाव से बचाना भी उतना ही जरूरी है।
पति और पत्नी को परिवार के सामने एक टीम की तरह खड़ा होना होगा
भारतीय परिवारों में माता-पिता और बुजुर्गों की भावनाओं का सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि पति-पत्नी की सबसे निजी बातों पर हर व्यक्ति को सवाल करने का अधिकार मिल जाए।
Boundaries बनाना परिवार को तोड़ना नहीं है। कई बार boundaries ही परिवार को टूटने से बचाती हैं।
पति-पत्नी आपस में पहले तय कर सकते हैं कि कौन-सी medical information परिवार के साथ साझा करनी है और कौन-सी नहीं। यदि किसी रिश्तेदार के सवाल लगातार चोट पहुंचा रहे हों, तो दोनों में से किसी एक को दूसरे को अकेला छोड़ने के बजाय स्पष्ट लेकिन सम्मानजनक तरीके से बात रोकनी चाहिए।
उदाहरण के लिए इतना कहना पर्याप्त है—“हम दोनों इस विषय को समझदारी से संभाल रहे हैं। जरूरत होगी तो डॉक्टर की सलाह लेंगे। कृपया इस बारे में बार-बार पूछकर हम पर दबाव न बनाएं।”
कभी-कभी पत्नी के लिए पति का अपने परिवार से इतना कहना और पति के लिए पत्नी का अपने परिवार से यही सीमा बनाना रिश्ते में बहुत बड़ा विश्वास पैदा कर देता है।
अपनी पत्नी या पति को परिवार के सामने अकेला मत छोड़िए
रिश्ते में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जिन्हें इंसान वर्षों तक याद रखता है।
अगर किसी पारिवारिक कार्यक्रम में पत्नी से पूछा जाए—“अभी तक बच्चा क्यों नहीं हुआ?” और पति चुपचाप वहां से हट जाए, तो शायद सवाल से ज्यादा उसकी चुप्पी दर्द दे।
इसी तरह अगर किसी पुरुष की fertility report में समस्या आई हो और पत्नी परिवार के सामने उसका मजाक या उसकी निजी जानकारी साझा कर दे, तो वह बात भीतर तक चोट पहुंचा सकती है।
Life partner होने का अर्थ हर परिस्थिति में दूसरे की हर बात से सहमत होना नहीं है। लेकिन दुनिया के सामने उसके सम्मान की रक्षा करना रिश्ते की बुनियादी जिम्मेदारियों में से एक है।
मतभेद कमरे के भीतर हो सकते हैं, लेकिन अपमान भीड़ के सामने नहीं होना चाहिए।
जब दर्द बढ़ रहा हो तो इन पांच बातों पर पति-पत्नी एक समझौता कर सकते हैं
- दोष नहीं देंगे: medical problem किसी की भी हो, उसके लिए partner को शर्मिंदा नहीं करेंगे।
- बिना अनुमति निजी जानकारी नहीं बताएंगे: reports और treatment की बातें couple की सहमति से ही परिवार तक जाएंगी।
- परिवार की बात सीधे रिश्ते में नहीं लाएंगे: “मम्मी ने कहा…”, “लोग क्या कहेंगे…” को हर बहस का आधार नहीं बनाएंगे।
- रिश्ते के लिए अलग समय रखेंगे: ऐसा समय जिसमें बच्चा, इलाज और reports चर्चा का विषय न हों।
- मदद लेने में देर नहीं करेंगे: लगातार झगड़ा, दूरी, anxiety या emotional breakdown होने लगे तो qualified couple counsellor या mental-health professional की सहायता लेने को रिश्ते की कमजोरी नहीं मानेंगे।
इलाज भी दोनों का सफर होना चाहिए, केवल महिला का नहीं
हमारे समाज में pregnancy से जुड़ी लगभग हर जिम्मेदारी महिला पर डाल देने की आदत रही है, जबकि medical science ऐसा नहीं कहती। Infertility महिला या पुरुष reproductive system से जुड़े कारणों, दोनों से संबंधित कारणों या कभी-कभी unexplained कारणों से हो सकती है।
इसलिए केवल महिला को बार-बार जांच करवाने भेज देना सही approach नहीं है। चिकित्सकीय जरूरत होने पर evaluation दोनों partners की होनी चाहिए और निर्णय qualified doctor की सलाह से लिए जाने चाहिए।
WHO सामान्य रूप से infertility को 12 महीने या उससे अधिक समय तक नियमित unprotected sexual intercourse के बावजूद pregnancy न होने की स्थिति के रूप में परिभाषित करता है। हालांकि उम्र, medical history या अन्य परिस्थितियों के आधार पर डॉक्टर इससे पहले भी evaluation की सलाह दे सकते हैं।
और शायद इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इलाज के परिणाम चाहे जो हों, partner को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह केवल तभी स्वीकार्य है जब treatment सफल हो।
“अगर हमारे बच्चे नहीं हुए तो?”—इस सवाल से भागना नहीं, साथ बैठकर बात करना जरूरी है
यह सवाल बहुत भारी है, इसलिए कई couples इसे पूछने से बचते रहते हैं। लेकिन कभी-कभी अनिश्चितता डर को और बढ़ाती है।
ऐसी बातचीत किसी झगड़े के बीच नहीं होनी चाहिए। शांत समय में दोनों अपनी इच्छाओं और डर के बारे में बात कर सकते हैं—हम treatment को लेकर कहां तक सहज हैं? कितना emotional और financial pressure स्वीकार कर सकते हैं? अगर रास्ता लंबा हुआ तो हम अपने रिश्ते को कैसे बचाएंगे?
हर couple का उत्तर अलग होगा और वही ठीक है।
महत्वपूर्ण यह है कि फैसला किसी रिश्तेदार की समय-सीमा, सामाजिक तुलना या डर से न लिया जाए।
एक बच्चा रिश्ते में खुशी जोड़ सकता है, लेकिन टूटे हुए रिश्ते को अपने आप नहीं जोड़ सकता
कई परिवारों में यह उम्मीद दिखाई देती है कि “एक बच्चा हो जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा।”
लेकिन जिस रिश्ते में पहले से गहरा अविश्वास, अपमान, हिंसा या लगातार emotional neglect है, वहां केवल बच्चे के आने से मूल समस्याएं खत्म हो जाएंगी, यह मानना सुरक्षित नहीं है।
इसके विपरीत बच्चे के पालन-पोषण से नई जिम्मेदारियां, कम नींद, आर्थिक दबाव और समय की कमी भी जुड़ सकती है।
इसलिए माता-पिता बनने से पहले ही पति-पत्नी के बीच सम्मान, communication और emotional safety महत्वपूर्ण हैं।
बच्चे को मजबूत परिवार देने की शुरुआत भी मजबूत पति-पत्नी के रिश्ते से होती है।
अगर रिश्ते में दूरी बहुत बढ़ चुकी है तो शुरुआत कहां से करें?
कभी-कभी नाराजगी इतनी जमा हो जाती है कि दोनों के लिए सामान्य बातचीत भी मुश्किल लगती है। ऐसे में एक ही दिन में पुराने सारे विवाद हल करने की कोशिश जरूरी नहीं।
शुरुआत केवल इतनी-सी बात से हो सकती है—
“हम दोनों इस परिस्थिति से परेशान हैं। मैं नहीं चाहता/चाहती कि इस परेशानी के कारण हम एक-दूसरे को खो दें।”
यह एक वाक्य समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन लड़ाई की दिशा बदल सकता है। सामने वाला दुश्मन नहीं बल्कि उसी मुश्किल सफर का साथी दिखाई देने लगता है।
इसके बाद जरूरत हो तो couple counselling ली जा सकती है। यदि infertility treatment चल रहा हो और उससे बहुत अधिक anxiety, sadness या relationship distress पैदा हो रहा हो, तो fertility counselling या qualified mental-health professional से बात करना भी मददगार हो सकता है। Infertility और psychological distress के बीच जटिल संबंध को medical literature में भी अच्छी तरह पहचाना गया है।
मेरी अपनी कहानी: संतान न होने का दुख था, लेकिन हमने एक-दूसरे को नहीं खोया
मेरी शादी को आज लगभग 12 साल हो चुके हैं। शादी के शुरुआती करीब पांच साल हमारे लिए इलाज, जांच, डॉक्टर और उम्मीदों के बीच गुजर गए। हर बार लगता था कि शायद इस बार कोई अच्छी खबर मिलेगी। उसके बाद के लगभग दो वर्षों में वह उम्मीद भी धीरे-धीरे कम होने लगी। सच कहूं तो इलाज की थकान से ज्यादा मुश्किल लोगों के सवाल और ताने थे। किसी शादी, पारिवारिक कार्यक्रम या रिश्तेदार के घर जाते तो कभी सीधे और कभी घुमा-फिराकर वही सवाल सामने आ जाता—“अभी तक बच्चे नहीं हुए?” कई बार लोगों को शायद अंदाजा भी नहीं होता था कि उनका एक सामान्य-सा सवाल हमारे भीतर कितनी पुरानी बातों को फिर से जगा देता है।
धीरे-धीरे इसका असर हमारी सामाजिक जिंदगी पर पड़ा। रिश्तेदारों के यहां जाना कम होता गया। आज भी हम किसी बहुत बड़े पारिवारिक कार्यक्रम में ही ज्यादातर जाते हैं, वरना अपनी जिंदगी में रहना हमें ज्यादा अच्छा लगता है। बाहर से देखने वाले इसे लोगों से दूरी मान सकते हैं, लेकिन हमारे लिए यह अपने मानसिक सुकून को बचाने का एक तरीका बन गया। एक समय ऐसा भी था जब इन सब बातों का तनाव हमारे रिश्ते में आया। करीब तीन-चार साल ऐसे जरूर रहे जब मन में निराशा, इलाज की थकान और समाज की बातें बहुत भारी लगती थीं।
लेकिन उसी समय हमने एक बात धीरे-धीरे समझी—अगर संतान की चाह में हम अपना रिश्ता ही खो देंगे, तो हमारे पास बचेगा क्या?
हमने किसी एक को जिम्मेदार ठहराने के बजाय खुद को और एक-दूसरे को समझना शुरू किया। हमने स्वीकार किया कि जिंदगी हर इंसान को उसकी इच्छा के अनुसार नहीं मिलती, लेकिन जो हमारे पास है उसकी कीमत भी कम नहीं है। मेरे लिए मेरी पत्नी केवल मेरे होने वाले बच्चे की मां नहीं थी, वह मेरी जीवनसाथी थी। और इसी तरह हमारे रिश्ते की पहचान केवल इस बात से नहीं हो सकती थी कि हमारे यहां संतान हुई या नहीं।
आज हम दोनों एक-दूसरे के साथ खुश हैं। शायद उतने ही खुश, जितने शादी के शुरुआती एक-दो वर्षों में थे। फर्क सिर्फ इतना है कि तब हमारी खुशी में नए रिश्ते का उत्साह था और आज उसमें एक-दूसरे को इतने वर्षों तक समझने का भरोसा भी जुड़ गया है।
समय के साथ हमारी सोच भी बदल गई। आज कई बार हमें लगता है कि ईश्वर ने हमारे लिए जो जीवन चुना, शायद उसमें भी कोई अच्छाई रही होगी। यह हमारी व्यक्तिगत भावना है; हर दंपति का अनुभव अलग हो सकता है। लेकिन हम जिस स्वतंत्रता और सहजता के साथ आज अपना जीवन जी रहे हैं, संभव है माता-पिता बनने के बाद हमारी जिंदगी बिल्कुल अलग होती। अब हम इस बात को कमी की तरह नहीं देखते। हमने अपनी जिंदगी को उस एक अधूरी इच्छा के आसपास रोककर नहीं रखा।
सबसे बड़ी बात यह है कि हमने यह सीख लिया कि सुखी विवाह की परिभाषा केवल संतान से पूरी नहीं होती। पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करें, साथ बैठकर हंस सकें, एक-दूसरे की चिंता करें, मुश्किल समय में साथ खड़े रहें और घर लौटकर एक-दूसरे में सुकून महसूस करें—यह भी अपने आप में एक पूरा परिवार है।
आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि उन वर्षों ने हमें तोड़ा कम, समझाया ज्यादा। संतान न होने की परिस्थिति हमने नहीं चुनी थी, लेकिन उसके बाद एक-दूसरे के साथ खुश रहना हमने जरूर चुना।
और शायद इसी अनुभव से मैं उन पति-पत्नी से एक बात कहना चाहूंगा जो आज इसी दौर से गुजर रहे हैं—इलाज जरूर कराइए, उम्मीद रखिए, लेकिन इस कोशिश में अपने जीवनसाथी को मत खोइए। लोग कुछ समय सवाल पूछेंगे और फिर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाएंगे, लेकिन आपका साथी वही व्यक्ति है जो अंत में आपके साथ रहेगा।
परिवार से पहले पति-पत्नी को यह याद रखना होगा—हम दोनों एक-दूसरे का घर हैं
संतान की इच्छा रखना गलत नहीं। अपने बच्चे को गोद में लेने का सपना बेहद खूबसूरत हो सकता है। और अगर वह सपना देर से पूरा हो रहा हो या उसका रास्ता मुश्किल हो, तो उसका दुख भी कम करके नहीं देखा जाना चाहिए।
लेकिन इसी दुख के बीच उस व्यक्ति को मत खो दीजिए जिसके साथ आपने वह सपना देखा था।
जब दुनिया सवाल करे तो एक-दूसरे से सवाल मत कीजिए।
जब परिवार दोष ढूंढे तो एक-दूसरे में दोष मत ढूंढिए।
जब कोई एक टूटने लगे तो दूसरा यह हिसाब न लगाए कि गलती किसकी है—बस उसका हाथ पकड़ ले।
क्योंकि संतान आने के बाद पति-पत्नी माता-पिता जरूर बनते हैं, लेकिन वे पति-पत्नी होना बंद नहीं करते। और यदि किसी कारण जीवन उनकी कल्पना से अलग रास्ता चुन ले, तब भी दो इंसानों के बीच प्रेम, सम्मान और साथ का महत्व खत्म नहीं हो जाता।
एक मजबूत विवाह की पहचान केवल यह नहीं कि उस घर में कितने बच्चे हैं। उसकी पहचान यह भी है कि कठिन समय में दो लोग एक-दूसरे के साथ कितनी मजबूती से खड़े रहे।
और शायद किसी टूटते हुए रिश्ते में सबसे जरूरी बात यही है—
“मुझे संतान की इच्छा है, लेकिन उस इच्छा को पूरा करने की कोशिश में मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता/चाहती। पहले हम एक-दूसरे के साथी हैं। बाकी हर रास्ता हम साथ मिलकर तय करेंगे।”
नोट: यह लेख relationship awareness के उद्देश्य से है। Fertility या infertility से जुड़ी व्यक्तिगत medical concerns के लिए gynecologist, fertility specialist या संबंधित qualified medical professional से सलाह लें। यदि पारिवारिक दबाव के कारण रिश्ता गंभीर तनाव में हो, तो qualified couple counsellor या mental-health professional से मदद लेना उचित हो सकता है।

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