दिल्ली मध्य प्रदेश

H1N1 के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? भोपाल में भी निगरानी तेज, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

H1N1 के बढ़ते मामलों और लक्षणों को दर्शाती स्वास्थ्य जागरूकता फीचर इमेज

देश के कई हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों से सामने आ रहे आंकड़ों के बीच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी स्वास्थ्य विभाग मौसमी इन्फ्लुएंजा पर नजर बनाए हुए है। हालांकि राहत की बात यह है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने साफ किया है कि फिलहाल कोई नया या अधिक खतरनाक स्ट्रेन सामने नहीं आया है। वर्तमान में फैल रहा H1N1 pdm09 वही वायरस है जो अब seasonal influenza का हिस्सा बन चुका है।

भोपाल में भी सामने आए H1N1 के मामले

भोपाल में अगस्त के दौरान H1N1 के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य संस्थानों ने निगरानी बढ़ाई है। 24 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में एक सप्ताह के भीतर तीन नए H1N1 केस दर्ज हुए थे और अगस्त में कुल संख्या छह तक पहुंच गई थी। अस्पतालों को लंबे समय तक खांसी, सर्दी या सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की निगरानी करने के लिए कहा गया है।

AIIMS भोपाल और गांधी मेडिकल कॉलेज की State Virology Laboratory सहित मध्य प्रदेश की कुछ सरकारी प्रयोगशालाओं में संदिग्ध मामलों की जांच की सुविधा उपलब्ध है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षण बने रहें या गंभीर हों तो इलाज में देरी भी नहीं करनी चाहिए।

आखिर H1N1 के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

मानसून के दौरान तापमान और नमी में बदलाव के साथ respiratory infections का प्रसार बढ़ सकता है। बारिश के कारण लोग अधिक समय बंद या कम हवादार जगहों पर भी बिताते हैं, जिससे संक्रमित व्यक्ति से वायरस दूसरे लोगों तक आसानी से पहुंच सकता है।

बड़े शहरों में अधिक जनसंख्या घनत्व, स्कूल, दफ्तर, सार्वजनिक परिवहन और भीड़भाड़ भी संक्रमण के प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं। महाराष्ट्र में 21 अगस्त तक 1,109 H1N1 मामले दर्ज किए गए थे, जो पूरे 2025 में दर्ज 942 मामलों से अधिक हैं। इनमें मुंबई और पुणे की हिस्सेदारी काफी अधिक रही।

दिल्ली में भी Influenza-A के मामलों में H1N1 प्रमुख subtype के रूप में सामने आया है। हाल के आंकड़ों में 2,392 Influenza-A मामलों में 1,777 H1N1 बताए गए थे।

H1N1 के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

H1N1 के लक्षण कई बार सामान्य वायरल फ्लू की तरह ही शुरू होते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर यह तय करना संभव नहीं कि किसी व्यक्ति को H1N1 ही है।

आमतौर पर तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में तेज दर्द, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में सांस से जुड़ी परेशानी भी बढ़ सकती है।

अधिकांश स्वस्थ लोगों में बीमारी सामान्य इलाज और आराम से ठीक हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों या पहले से गंभीर बीमारी वाले लोगों में संक्रमण निमोनिया जैसी जटिलताओं तक पहुंच सकता है।

सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बिभु आनंद ने कहा कि स्वाइन फ्लू की जांच लगभग सभी अस्पतालों और जांच केंद्रों में आसानी से उपलब्ध है। उनके अनुसार, निजी अस्पतालों में इस जांच की लागत सामान्यतः 1,500 से 5,000 रुपये के बीच होती है, जबकि पूरी श्वसन जांच के लिए बायोफायर पैनल की कीमत 9,000 से 15,000 रुपये तक हो सकती है।

उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में यह जांच लगभग न के बराबर खर्च में उपलब्ध है। एच1एन1 के बढ़ते मामलों का असर दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थ के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाशनील भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में करीब पांच से छह की बढ़ोतरी हुई है, जो 22 से 25 प्रतिशत की वृद्धि के बराबर है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

यदि बुखार लगातार बना हुआ है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, सीने में दर्द या दबाव महसूस हो रहा है, ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, अत्यधिक कमजोरी या भ्रम जैसी स्थिति महसूस हो रही है या ठीक होने के बाद लक्षण दोबारा तेजी से बिगड़ रहे हैं तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बच्चों में सांस बहुत तेज चलना, अत्यधिक सुस्ती, पानी या दूध न पी पाना या हालत लगातार बिगड़ना भी चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है।

गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी क्यों?

गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, छोटे बच्चे और diabetes, heart disease, chronic respiratory disease या कमजोर immunity वाले लोगों में influenza के गंभीर रूप लेने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के Respiratory Medicine विशेषज्ञ डॉ. लोकेंद्र दवे ने भी उच्च जोखिम वाले लोगों को लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेने और self-medication से बचने की सलाह दी है।

बचाव के लिए क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी या फ्लू जैसे लक्षण हैं तो कुछ दिनों तक भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी रखना उपयोगी हो सकता है। खांसते और छींकते समय मुंह ढकें, हाथ नियमित रूप से साफ करें और जरूरत पड़ने पर भीड़ वाली बंद जगहों में मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सालाना influenza vaccination भी खासकर risk group के लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम कम करने का महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि H1N1 के बढ़ते मामलों को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। ICMR का कहना है कि फिलहाल कोई नया H1N1 strain नहीं मिला है। सतर्कता, समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से अधिकांश मामलों को संभाला जा सकता है।

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