भोपाल, 25 अगस्त 2026। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन फैसलों का कुल वित्तीय आकार करीब ₹10,630 करोड़ बताया गया है।
कैबिनेट के फैसलों में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए बड़े निवेश और वित्तीय व्यवस्था के साथ सिवनी-बालाघाट फोरलेन परियोजना, निर्धन एवं कमजोर वर्गों की 19 सामाजिक योजनाएं, उज्जैन के मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के लिए नए पद और राज्य की साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए MP-CERT योजना प्रमुख हैं।
इस बैठक की खास बात यह है कि सरकार ने केवल नई निर्माण परियोजनाओं को ही मंजूरी नहीं दी, बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा, डिजिटल सुरक्षा, सामाजिक सहायता और भूमि अधिग्रहण व्यवस्था जैसे लंबे समय तक असर डालने वाले प्रशासनिक क्षेत्रों पर भी निर्णय लिए हैं।
सड़क कनेक्टिविटी पर सबसे बड़ा फोकस, ₹4,600 करोड़ के ऋण की सरकारी गारंटी
प्रदेश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम यानी MPRDC को NABARD Infrastructure Development Assistance के माध्यम से ₹4,600 करोड़ का ऋण लेने के लिए राज्य सरकार की गारंटी देने की मंजूरी दी गई है।
यहां यह समझना महत्वपूर्ण है कि ₹4,600 करोड़ सीधे राज्य सरकार द्वारा निर्माण एजेंसी को दिए जाने वाला अनुदान नहीं है। यह MPRDC द्वारा लिए जाने वाले ऋण के लिए सरकार की गारंटी है।
इस वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से भोपाल-विदिशा मार्ग, पूर्वी भोपाल बायपास, इंदौर-देपालपुर मार्ग और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित अन्य महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण और उन्नयन का रास्ता साफ होगा।
इसके अलावा राज्य की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व भी MPRDC को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है। इन मार्गों से होने वाली टोल और अन्य आय को निगम की आय माना जाएगा तथा इसी व्यवस्था का उपयोग ऋण और ब्याज भुगतान के लिए किया जा सकेगा।
सरकार ने परियोजना राशि के उपयोग में ‘Just in Time’ यानी JIT व्यवस्था अपनाने की बात कही है। इसका मतलब है कि स्वीकृत ऋण की पूरी राशि एक साथ निकालने के बजाय आवश्यकता के अनुसार राशि का उपयोग किया जाएगा।
सिवनी-बालाघाट फोरलेन के लिए ₹3,960 करोड़ की मंजूरी
कैबिनेट का दूसरा बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर फैसला 91.64 किलोमीटर लंबे सिवनी-बालाघाट मार्ग को फोरलेन बनाने से जुड़ा है। इस परियोजना और इससे संबंधित कार्यों के लिए कुल ₹3,960 करोड़ 9 लाख मंजूर किए गए हैं।
इसमें परियोजना और वित्तीय लागत ₹3,458.93 करोड़ है, जबकि भूमि अधिग्रहण, निर्माण से पहले के कार्य और supervision charges के लिए ₹501.16 करोड़ मंजूर किए गए हैं। परियोजना Hybrid Annuity Model यानी HAM के आधार पर विकसित की जाएगी।
यह सड़क सिर्फ सिवनी और बालाघाट को जोड़ने वाली स्थानीय सड़क नहीं है। इसका संपर्क NH-44 और NH-543 जैसे राष्ट्रीय राजमार्गों से भी है। इसके अलावा मलाजखंड तांबा परियोजना, भरवेली मैंगनीज माइंस, कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व तथा छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाली कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकारी आकलन के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र की लगभग 8 से 10 लाख आबादी को लाभ मिल सकता है। कृषि, खनिज परिवहन, स्थानीय कारोबार और पर्यटन के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है।
गरीब और कमजोर वर्गों की 19 योजनाओं के लिए ₹1,740 करोड़
कैबिनेट ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की 19 योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026 से 2031 तक जारी रखने के लिए ₹1,740 करोड़ मंजूर किए हैं।
इन योजनाओं का दायरा काफी व्यापक है। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, निराश्रित लोगों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, कन्या विवाह एवं निकाह सहायता, नशा पीड़ित लोगों और अन्य जरूरतमंद वर्गों से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।
यानी कैबिनेट का यह फैसला किसी एक नई योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से चल रही कई welfare schemes की वित्तीय निरंतरता सुनिश्चित करने से जुड़ा है।
यह अंतर पाठकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ₹1,740 करोड़ को किसी एक योजना या तत्काल होने वाले एकमुश्त भुगतान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह 2026 से 2031 की अवधि में 19 योजनाओं को जारी रखने की स्वीकृति है।
धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय उज्जैन में 244 पदों को मंजूरी
स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के प्रभावी संचालन के लिए कुल 244 पदों और मानव संसाधन की व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।
इनमें 154 नियमित पद, एक संविदा पद और 89 पदों पर आउटसोर्स माध्यम से कर्मचारियों की व्यवस्था शामिल है।
इस विश्वविद्यालय की भूमिका केवल उज्जैन तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार के अनुसार इंदौर, उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम और चंबल संभाग के 31 जिलों के स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षण संस्थानों के लिए संबद्धता, निरीक्षण, परीक्षा और अन्य विश्वविद्यालयीन सेवाओं की अलग प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।
अगर यह व्यवस्था योजना के अनुसार लागू होती है तो परीक्षा, परिणाम, प्रमाण-पत्र, संस्थानों के निरीक्षण और स्वास्थ्य शिक्षा से संबंधित प्रशासनिक काम अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो सकते हैं।
MP-CERT के लिए ₹80 करोड़, सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर जोर
डिजिटल होती सरकारी सेवाओं के बीच साइबर सुरक्षा अब केवल IT विभाग का तकनीकी विषय नहीं रह गया है। नागरिकों से जुड़े पोर्टल, डिजिटल भुगतान, सरकारी डेटा, cloud infrastructure और विभागीय सूचना प्रणालियां लगातार साइबर जोखिमों के दायरे में रहती हैं।
इसी को देखते हुए कैबिनेट ने State Computer Security Incident/Response Operation Centre से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹80 करोड़ मंजूर किए हैं।
MP-CERT यानी Madhya Pradesh Computer Emergency Response Team का उद्देश्य साइबर सुरक्षा घटनाओं की पहचान, incident response, risk reduction, forensic investigation और महत्वपूर्ण सरकारी digital infrastructure की सुरक्षा को मजबूत करना है।
इसके लिए 25 नए पदों की व्यवस्था भी मंजूर की गई है। साथ ही हर साल प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से इंजीनियरिंग स्नातकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है। चयनित 10 प्रशिक्षुओं को एक वर्ष के लिए ₹25,000 प्रतिमाह training allowance देने का प्रावधान रखा गया है।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य सरकार की अधिकतर citizen services अब digital platforms और databases पर निर्भर हैं। ऐसे में cyber incident होने पर त्वरित response की क्षमता सीधे सरकारी सेवाओं और नागरिक डेटा की सुरक्षा से जुड़ जाती है।
मध्यप्रदेश भवन और अतिथि गृह के लिए ₹250.67 करोड़
कैबिनेट ने नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन, अतिथि गृह और इससे संबंधित कार्यालयों के संचालन एवं उन्नयन के लिए ₹250 करोड़ 67 लाख मंजूर किए हैं।
यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए राजस्व और पूंजीगत मद में स्वीकृत की गई है। इसमें मध्यप्रदेश भवन के संचालन के साथ प्रस्तावित मध्यांचल भवन के विस्तार निर्माण और अन्य परिसंपत्तियों के रखरखाव से संबंधित राशि भी शामिल है।
किसानों और भूमि मालिकों के लिए भूमि क्रय नीति में बदलाव
कैबिनेट बैठक का एक और महत्वपूर्ण फैसला आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति में संशोधन है।
नई व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र की निजी कृषि भूमि के मामले में निर्धारित पुनर्वास अनुदान के अतिरिक्त लागू collector guideline के अनुसार गणना किए गए भूमि मूल्य से दोगुनी राशि पुनर्वास अनुदान के रूप में दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
इसके पीछे उद्देश्य सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज करना और लंबे भू-अर्जन मामलों में लगने वाले समय को कम करना है।
हालांकि किसी भी वास्तविक भूमि सौदे में मिलने वाली अंतिम राशि भूमि की श्रेणी, guideline value और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगी। इसलिए इसे सभी किसानों के लिए सीधे “चार गुना भुगतान” जैसे सरल दावे के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
EOW को भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप अधिकार
भारतीय दंड संहिता 1860 की जगह लागू भारतीय न्याय संहिता 2023 के बाद कानूनी धाराओं में हुए बदलाव को देखते हुए कैबिनेट ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW को नई धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत करने संबंधी अधिसूचना में संशोधन को भी मंजूरी दी है।
यह मूल रूप से कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था को नए आपराधिक कानून के अनुरूप अपडेट करने का फैसला है।
दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए ₹78 लाख
कैबिनेट ने महिला T20 ब्लाइंड वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय टीम की स्वर्ण पदक जीत में योगदान देने वाली मध्य प्रदेश की तीन खिलाड़ियों और तीन प्रशिक्षकों को दी गई कुल ₹78 लाख की प्रोत्साहन राशि की कार्योत्तर स्वीकृति भी दी है।
नर्मदापुरम की सुनीता सराठे, बैतूल की दुर्गा येबले और दमोह की सुषमा पटेल को 25-25 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है। तीन प्रशिक्षकों के लिए एक-एक लाख रुपये की राशि का प्रावधान है।
आम लोगों के लिए इन कैबिनेट फैसलों का क्या मतलब है?
25 अगस्त की कैबिनेट बैठक को देखें तो सरकार का सबसे बड़ा वित्तीय फोकस सड़क और परिवहन कनेक्टिविटी पर है। सिवनी-बालाघाट फोरलेन जैसी परियोजना का सीधा संबंध यात्रा समय, माल परिवहन, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से है।
इसके साथ ही सामाजिक क्षेत्र में ₹1,740 करोड़ की योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की मंजूरी कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विश्वविद्यालय में नए पदों और MP-CERT में निवेश का असर तुरंत सड़क निर्माण की तरह दिखाई नहीं देगा, लेकिन दोनों निर्णय राज्य की संस्थागत क्षमता से जुड़े हैं। एक तरफ स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने की कोशिश है, वहीं दूसरी तरफ तेजी से बढ़ती डिजिटल सरकारी सेवाओं को cyber threats से सुरक्षित रखने की तैयारी दिखाई देती है।
इसलिए ₹10,630 करोड़ के कैबिनेट पैकेज को सिर्फ एक बड़े आंकड़े के रूप में देखने के बजाय सड़क, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा और डिजिटल सुरक्षा में अलग-अलग किए गए निवेश और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के रूप में समझना अधिक उपयोगी होगा।
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