भोपाल। मध्य प्रदेश में त्योहारों से पहले दूध, पनीर, मावा, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध और अमानक खाद्य सामग्री जब्त की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई से 20 अगस्त 2026 के बीच करीब 1,17,367 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹5.61 करोड़ है।
त्योहारी सीजन के दौरान दूध से बनने वाले उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मावा, पनीर, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी भी बढ़ाई गई है। हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि विभाग द्वारा किसी खाद्य पदार्थ को संदेह के आधार पर जब्त किया जाना और उसका प्रयोगशाला जांच में मिलावटी या असुरक्षित साबित होना दो अलग बातें हैं।
एक महीने में लिए गए 4,642 नमूने
20 जुलाई से 20 अगस्त के बीच चले अभियान में खाद्य विभाग ने प्रदेशभर में 2,605 कानूनी नमूने और 2,037 सर्विलांस नमूने लिए। इस तरह कुल 4,642 नमूने जांच प्रक्रिया का हिस्सा बने।
इसी अवधि में 172 प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, जबकि 18 दुकानों के लाइसेंस या पंजीयन निलंबित किए गए। रिपोर्ट के अनुसार सात प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई भी हुई।
कार्रवाई का मुख्य फोकस ऐसे खाद्य पदार्थों पर रहा जिनकी मांग त्योहारों के आसपास तेजी से बढ़ती है। इनमें दूध, पनीर, मावा, घी और मिठाइयां प्रमुख हैं।
भोपाल में भी संदिग्ध पनीर पर हुई कार्रवाई
प्रदेशव्यापी अभियान का असर राजधानी भोपाल में भी दिखाई दिया। 19 अगस्त को खाद्य सुरक्षा विभाग ने भोपाल के सोनागिरि क्षेत्र स्थित एक डेयरी से 60 किलो संदिग्ध पनीर जब्त किया था।
अधिकारियों को सूचना मिली थी कि सीहोर से पनीर बिक्री के लिए भोपाल लाया गया है और इसके एनालॉग पनीर होने की आशंका है। इसके बाद टीम ने पनीर का नमूना लेकर उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा और पूरा स्टॉक जब्त कर लिया। विभाग ने स्पष्ट किया था कि लैब रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।
इस कार्रवाई के दौरान भोपाल के दूसरे खाद्य प्रतिष्ठानों से केक और अन्य खाद्य उत्पादों के नमूने भी लिए गए थे।
मध्य प्रदेश में Analogue Paneer पर भी सख्ती
हाल के दिनों में Analogue Paneer भी खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का बड़ा मुद्दा बना है। यह पारंपरिक दूध से बनने वाले पनीर जैसा दिखने वाला उत्पाद हो सकता है, जिसमें दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति वसा अथवा दूसरे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने अगस्त में analogue paneer, analogue khoya, analogue milk और इसी तरह के कुछ imitation dairy products के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया। इसके बाद अलग-अलग जिलों में छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई की गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिबंध के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों से 10,464 किलो analogue paneer जब्त किया गया था।
भोपाल, इंदौर, सीहोर, उज्जैन, भिंड, रतलाम और धार जैसे जिलों में भी इस तरह की कार्रवाई सामने आई है।
पहले भी सामने आए थे फेल सैंपल
यह अभियान केवल अगस्त के अंतिम दिनों में शुरू नहीं हुआ है। 20 जुलाई से 10 अगस्त के बीच की विभागीय कार्रवाई में दूध और दुग्ध उत्पादों के 2,234 नमूने लिए गए थे।
इनमें दूध के 849, मावा के 106, पनीर के 296 और घी के 601 नमूने शामिल थे। उस समय उपलब्ध जांच रिपोर्ट में 73 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे थे, जबकि करीब ₹2.73 करोड़ मूल्य की 44 हजार किलो से अधिक सामग्री जब्त की गई थी।
इसके अलावा लापरवाही के मामलों में तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निलंबित करने और कई अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने की कार्रवाई भी सामने आई थी।
जनवरी से जुलाई तक 11 हजार से ज्यादा कानूनी नमूने
सिर्फ त्योहारों के विशेष अभियान को देखें तो आंकड़े बड़े दिखाई देते हैं, लेकिन पूरे साल की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश में 11,215 कानूनी खाद्य नमूने लिए गए। इनमें 870 नमूने अमानक या असुरक्षित पाए जाने की रिपोर्ट है और 922 प्रकरण दर्ज किए गए। इस अवधि में अदालतों के आदेश के तहत करीब ₹3.50 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से लगभग ₹1.39 करोड़ की वसूली होने की जानकारी दी गई है।
मध्य प्रदेश सरकार भी विधानसभा में बता चुकी है कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, नमूना संग्रह, प्रयोगशाला परीक्षण, Risk-Based Inspection System, मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब और उल्लंघन मिलने पर कानूनी कार्रवाई जैसे उपाय किए जाते हैं।
त्योहार पर दूध-पनीर खरीदते समय ग्राहक क्या देखें?
त्योहारों में मांग बढ़ने के साथ बाजार में बड़ी मात्रा में दूध से बने उत्पाद पहुंचते हैं। इसलिए ग्राहक केवल कम कीमत देखकर पनीर, मावा या घी खरीदने के बजाय दुकान और उत्पाद की विश्वसनीयता पर भी ध्यान दें।
पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय FSSAI licence/registration number, निर्माण और expiry date, ingredient list तथा पैकेज की seal देखना उपयोगी है। खुला पनीर या मावा खरीदते समय असामान्य गंध, रंग या खराब storage दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।
सिर्फ किसी घरेलू परीक्षण के आधार पर किसी खाद्य पदार्थ को नकली घोषित करना भी सही नहीं है। खाद्य पदार्थ मिलावटी, अमानक या असुरक्षित है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण अधिकृत प्रयोगशाला जांच से होता है।
मिलावट के खिलाफ अभियान जारी रहने के संकेत
त्योहारी सीजन आगे बढ़ने के साथ खाद्य विभाग की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है। विशेष रूप से दूध, पनीर, मावा, घी और मिठाई बनाने तथा बेचने वाले प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रभारी नियंत्रक मनोज पुष्प के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई कर रहा है और मिलावट के मामलों में अभियान जारी रहेगा।
उपभोक्ताओं के लिए इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि त्योहारों के समय खाद्य पदार्थ खरीदते वक्त कीमत के साथ गुणवत्ता, पैकेजिंग, लाइसेंस और विक्रेता की विश्वसनीयता को भी प्राथमिकता दें।

Comments