देशभर में मानसून अब लगभग पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और इसके साथ ही कई राज्यों में मौसम ने अलग-अलग रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। कहीं मूसलाधार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं तो कहीं भूस्खलन और जलभराव ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में अब भी सामान्य से कम बारिश की चिंता बनी हुई है।
हालांकि, मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून ने फिर से अच्छी गति पकड़ ली है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। यह खबर किसानों, यात्रियों, दफ्तर जाने वाले लोगों और व्यापारियों सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
3 दिन देरी से आया मानसून, लेकिन अब तेजी से बढ़ रहा आगे
इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सामान्य तिथि 1 जून के बजाय 4 जून को भारत में प्रवेश किया था। शुरुआती दिनों में इसकी रफ्तार कुछ धीमी रही और कई राज्यों में “ब्रेक मानसून” जैसी स्थिति भी देखने को मिली। इससे यह आशंका जताई जाने लगी थी कि पूरे देश में मानसून देर से पहुंचेगा।
हालांकि अब बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र और अनुकूल वातावरण के कारण मानसून ने दोबारा गति पकड़ ली है। मौसम विभाग के अनुसार अब यह सामान्य समय से पहले ही लगभग पूरे देश को कवर करने की स्थिति में पहुंच गया है।
गुजरात और महाराष्ट्र में भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात
पश्चिम भारत में इस समय सबसे अधिक असर गुजरात और महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है।
गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के मेंडरडा क्षेत्र के समधियाला गांव के पास अचानक आई बाढ़ में चार वाहन पानी में फंस गए। राहत एवं बचाव दल ने समय रहते 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
उधर महाराष्ट्र के भिवंडी में बाजार क्षेत्र में लगभग तीन फीट तक पानी भर गया। कई दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा जबकि लोग कमर तक पानी में चलकर सड़क पार करते दिखाई दिए। वसई-विरार के तुलिंज और अलायंस हॉस्पिटल रोड सहित कई आवासीय इलाकों में भी पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया।

मानसून की प्रगति: इस नक्शे में क्या दिखाया गया है?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के इस मानचित्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की देशभर में प्रगति दिखाई गई है। इसमें नीली रेखाएं वास्तविक (Actual) मानसून की प्रगति दर्शाती हैं, जबकि लाल रेखाएं सामान्य (Normal) तिथियां बताती हैं।
इस साल मानसून ने भारत में 4 जून 2026 को प्रवेश किया, जो सामान्य तिथि से लगभग 3 दिन देर थी। शुरुआत में इसकी रफ्तार कुछ धीमी रही, लेकिन जुलाई की शुरुआत में मानसून ने तेजी पकड़ ली।
मानचित्र से यह भी स्पष्ट होता है कि 3 जुलाई 2026 तक मानसून देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका था। केवल राजस्थान और गुजरात के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में ही इसका अंतिम चरण बाकी था।
IMD के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र और अनुकूल हवाओं के कारण मानसून ने दोबारा गति पकड़ी। इसी वजह से अब कई राज्यों में लगातार भारी बारिश और तेज वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
ध्यान दें: यह मानचित्र मानसून के सामान्य और वास्तविक आगमन की तुलना दिखाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में मानसून समय से पहले, समय पर या देरी से पहुंचा।
मध्य प्रदेश में बारिश तेज, उज्जैन में हादसा
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर सहित 26 से अधिक जिलों में पिछले दिनों अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार वर्षा के कारण कई छोटे पुल और नाले उफान पर आ गए।
उज्जैन जिले में एक युवक पुलिया पार करने का प्रयास कर रहा था, तभी तेज बहाव में वह मोटरसाइकिल सहित बह गया। प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि बारिश के दौरान किसी भी जलमग्न पुल या सड़क को पार करने की कोशिश न करें।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी बारिश का असर
जयपुर में तेज बारिश के बाद सवाई मानसिंह अस्पताल के माइनर ऑपरेशन थिएटर तक पानी पहुंच गया, जिसके कारण मरीजों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ा।
उत्तर प्रदेश में भी लगभग 20 जिलों में अच्छी बारिश हुई। कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में जलभराव होने से कई कारें और दोपहिया वाहन आधे तक पानी में डूब गए। वहीं मथुरा सहित कई शहरों में सड़कें पानी से भर गईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
पहाड़ी राज्यों में बढ़ा भूस्खलन का खतरा
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं।
जम्मू-कश्मीर के रामनगर-उधमपुर मार्ग पर कौघा क्षेत्र में बड़ा लैंडस्लाइड होने से सड़क पूरी तरह बंद करनी पड़ी। बड़े-बड़े पत्थर और मलबा हटाने का कार्य जारी है।
उत्तराखंड के देहरादून और बागेश्वर जैसे जिलों में भी कई सड़कें मलबा आने से प्रभावित हुई हैं। वहीं लद्दाख के द्रास क्षेत्र में उफनती नदी के कारण बचाव अभियान चलाना पड़ा। ऐसे मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
गुजरात के समुद्री तट पर विशेष अलर्ट
मौसम विभाग ने गिर सोमनाथ जिले के वेरावल बंदरगाह पर लोकल कॉशनरी सिग्नल नंबर-3 (LC-III) जारी किया है।
इसका अर्थ है कि समुद्र में तेज हवाएं, ऊंची लहरें और खराब मौसम की संभावना है। इसी कारण मछुआरों को अगले आदेश तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
हिमाचल और पंजाब में लगातार सक्रिय रहेगा मानसून
हिमाचल प्रदेश में मानसून की मजबूत एंट्री के बाद राज्य में सामान्य से काफी अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। पिछले तीन दिनों में सामान्य से लगभग दोगुनी वर्षा दर्ज हुई है।
दूसरी ओर पंजाब और चंडीगढ़ में भी मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कई दिनों तक गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
कुछ क्षेत्रों में अब भी कम बारिश की चिंता
जहां देश के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात हैं, वहीं कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश की चिंता भी बनी हुई है।
इसी कारण केंद्र सरकार ने स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित राज्यों को फसल प्रबंधन की सलाह देने को कहा है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार फसल चयन करने और कम पानी वाली फसलों पर भी विचार करने की सलाह दे रहे हैं, यदि उनके क्षेत्र में वर्षा सामान्य से कम बनी रहती है।
अगले दो दिनों का मौसम कैसा रहेगा?
5 जुलाई का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार 5 जुलाई को छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, केरल, गोवा, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश की संभावना है।
इसके अलावा बिहार में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, ओडिशा और तमिलनाडु के कई हिस्सों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
6 जुलाई का पूर्वानुमान
6 जुलाई को आंध्र प्रदेश, झारखंड और ओडिशा में भारी वर्षा का दौर जारी रह सकता है।
वहीं असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई हिस्सों में भी तेज बारिश की संभावना है। गोवा, तेलंगाना, सिक्किम और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
किसानों के लिए क्या है सबसे जरूरी सलाह?
बारिश का यह दौर खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है, लेकिन अत्यधिक वर्षा नुकसान भी पहुंचा सकती है। इसलिए किसानों को कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।
- खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ताकि धान छोड़कर अन्य फसलों में पानी लंबे समय तक जमा न रहे। लगातार जलभराव से जड़ें सड़ सकती हैं और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान को देखकर ही बुवाई, खाद डालने या कीटनाशक छिड़काव का निर्णय लें। भारी बारिश की संभावना हो तो ऐसे कार्य कुछ समय के लिए टाल देना बेहतर रहेगा।
- बिजली गिरने की चेतावनी के दौरान खेतों में काम करने से बचें। यदि अचानक मौसम खराब हो जाए तो किसी मजबूत भवन में शरण लें और खुले मैदान या पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
- पशुओं के लिए सूखे और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था रखें तथा चारे को बारिश से बचाकर रखें ताकि नुकसान न हो।
रोजाना काम पर जाने वालों के लिए जरूरी सुझाव
बारिश के मौसम में छोटी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
- घर से निकलने से पहले अपने शहर का मौसम अपडेट जरूर देख लें और यदि भारी बारिश की चेतावनी हो तो अतिरिक्त समय लेकर निकलें।
- जलभराव वाली सड़कों या तेज बहाव वाले पुलों को पार करने का जोखिम बिल्कुल न लें। कई दुर्घटनाएं इसी कारण होती हैं।
- दोपहिया वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें और ब्रेक की स्थिति पहले से जांच लें। बारिश में सड़क फिसलन भरी हो जाती है।
- मोबाइल फोन, जरूरी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान को वाटरप्रूफ बैग में रखें ताकि बारिश से नुकसान न हो।
मौसम पर लगातार नजर रखना क्यों जरूरी है?
मानसून का मौसम तेजी से बदलता है। कई बार कुछ घंटों के भीतर ही सामान्य बारिश मूसलाधार वर्षा या तेज आंधी में बदल सकती है। इसलिए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी अलर्ट पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। ऐसे में जहां किसानों को खेती से जुड़े निर्णय मौसम के अनुसार लेने चाहिए, वहीं आम लोगों को भी यात्रा, कार्यालय और दैनिक कार्यों की योजना मौसम पूर्वानुमान देखकर ही बनानी चाहिए।
निष्कर्ष
देशभर में मानसून अब अपने पूरे प्रभाव में दिखाई दे रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र में बाढ़ जैसे हालात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में तेज बारिश, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और पूर्वोत्तर में लगातार वर्षा यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
यदि आप किसान हैं, नियमित यात्रा करते हैं या रोजाना दफ्तर जाते हैं, तो मौसम विभाग के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें और किसी भी चेतावनी को हल्के में न लें। थोड़ी-सी सावधानी न केवल आपकी यात्रा को सुरक्षित बना सकती है, बल्कि खेती और दैनिक जीवन में होने वाले बड़े नुकसान से भी बचा सकती है।

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