किसी अनजान व्यक्ति के पसीने की गंध शायद आपको तुरंत नाक सिकोड़ने पर मजबूर कर दे, लेकिन वही बात अपने पार्टनर के मामले में अलग हो सकती है। कई लोगों को अपने साथी के बालों, कपड़ों, तकिए या शरीर की एक खास प्राकृतिक खुशबू अच्छी लगती है। कभी-कभी यह पसंद इतनी गहरी होती है कि लोग मजाक में इसे “उसकी खुशबू का नशा” तक कह देते हैं।
हाल में एक्ट्रेस गौहर खान और उनके पति जैद दरबार की बातचीत ने इसी विषय को चर्चा में ला दिया। एक शो में गौहर ने बताया कि जैद को उनके underarms सूंघने की आदत है और उन्हें लगता है कि वहां से अच्छी खुशबू आती है। यह बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे अजीब बताया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी व्यक्ति को अपने पार्टनर की natural body smell अच्छी लगना वास्तव में इतना अजीब है?
विज्ञान और मनोविज्ञान की नजर से देखें तो मामला सिर्फ “पसीने की गंध” का नहीं है। इसमें हमारी सूंघने की क्षमता, त्वचा के बैक्टीरिया, परिचित गंध, यादें, भावनाएं और रिश्ते से जुड़ी intimacy तक भूमिका निभा सकती है।

गौहर खान ने जैद की किस आदत का किया खुलासा?
आजतक की 14 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार गौहर खान और जैद दरबार ने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के शो ‘डबल डेट’ में अपनी शादी और एक-दूसरे की आदतों को लेकर बातचीत की।
इसी दौरान गौहर ने बताया कि जैद को उनके underarms सूंघने की आदत है। गौहर के मुताबिक जैद को लगता है कि उनके underarms हमेशा fresh रहते हैं और अच्छी खुशबू आती है। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
यह एक celebrity couple की निजी और हल्की-फुल्की बातचीत थी, लेकिन इससे एक दिलचस्प सवाल जरूर निकलता है—आखिर किसी इंसान को अपने पार्टनर के शरीर की प्राकृतिक गंध आकर्षित क्यों कर सकती है?
सबसे पहले समझिए—underarm की smell आती कहां से है?
आमतौर पर हम कहते हैं कि “पसीने से बदबू आ रही है”, लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है।
Underarm यानी बगल के हिस्से में apocrine glands सहित अलग-अलग glands के secretions और त्वचा पर रहने वाले microorganisms के बीच interaction होता है। शोध के अनुसार underarm odor पैदा करने में skin bacteria महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे गंधहीन या कम गंध वाले precursor compounds को ऐसे volatile compounds में बदल सकते हैं जिन्हें हमारी नाक आसानी से पहचानती है।
इसी वजह से हर व्यक्ति की body smell बिल्कुल एक जैसी नहीं होती।
त्वचा का microbiome, शरीर के secretions और दूसरे जैविक व बाहरी factors मिलकर किसी व्यक्ति की natural odor profile को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए किसी व्यक्ति की body smell को सिर्फ “पसीने की बदबू” समझना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
फिर पार्टनर की body smell अच्छी क्यों लग सकती है?
यहीं से psychology दिलचस्प हो जाती है।
हमारी नाक किसी गंध को पहचानती जरूर है, लेकिन उसका अनुभव केवल नाक तक सीमित नहीं रहता। गंध यादों और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को भी सक्रिय कर सकती है।
इसे रोजमर्रा के अनुभव से समझिए।
कभी कोई पुराना perfume अचानक आपको किसी व्यक्ति की याद दिला देता है। किसी घर की खास खुशबू आपको बचपन में ले जाती है। मां के कपड़ों की महक, पार्टनर का perfume या किसी अपने के कमरे की परिचित गंध उस व्यक्ति की अनुपस्थिति में भी उसकी याद पैदा कर सकती है।
इसी तरह लंबे समय तक साथ रहने वाले romantic partners एक-दूसरे की natural smell से भी परिचित हो सकते हैं।
एक अध्ययन में महिलाओं ने परिचित पुरुष—जिसमें romantic partner भी शामिल थे—की body odor को अनजान पुरुषों की तुलना में अधिक familiar और sexy माना। हालांकि परिचित व्यक्ति की odor को सबसे ज्यादा पसंद करने का परिणाम उतना सीधा नहीं था।
यानी familiarity महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसे “पार्टनर का पसीना हमेशा अच्छा ही लगता है” जैसे नियम में नहीं बदला जा सकता।
क्या पार्टनर की खुशबू सच में “नशा” बन सकती है?
यहां “नशा” शब्द को थोड़ा संभलकर इस्तेमाल करना चाहिए।
अगर कोई कहता है—
“मुझे उसकी खुशबू का नशा है”
तो इसका मतलब आमतौर पर medical addiction नहीं होता।
ऐसी पसंद को वास्तविक नशे या substance dependence जैसा मानने के पर्याप्त आधार नहीं हैं। इसके बजाय इसे attraction, familiarity, emotional association और sensory preference के रूप में समझना ज्यादा उचित है।
मान लीजिए किसी खास व्यक्ति की खुशबू आपके लिए बार-बार प्यार, गले मिलने, साथ सोने, सुरक्षा या सुखद पलों के साथ जुड़ती रही है। समय के साथ वही smell उस व्यक्ति की मौजूदगी की एक sensory पहचान बन सकती है।
यही वजह हो सकती है कि किसी को अपने partner की पहनी हुई T-shirt या pillow की smell अच्छी लगे।
वह व्यक्ति कपड़े की गंध से प्यार नहीं कर रहा होता; संभव है कि उसका दिमाग उस गंध को उस इंसान से जोड़ चुका हो।

क्या partner की smell comfort भी दे सकती है?
इस दिशा में भी research हुई है, लेकिन परिणाम एक जैसे नहीं हैं।
2018 के एक अध्ययन में partner की body odor के संपर्क में आने पर महिलाओं में perceived stress कम पाया गया, जबकि stranger की scent वाले समूह में cortisol response अधिक था।
एक अन्य छोटे अध्ययन में romantic partner की body odor को subjective discomfort में कमी से जोड़ा गया, खासकर अधिक secure attachment वाले participants में।
लेकिन science यहीं खत्म नहीं होती।
2026 में प्रकाशित 179 participants के एक अध्ययन में researchers को partner odor से cortisol में कमी नहीं मिली। उल्टा कुछ परिस्थितियों में partner की odor के subconscious exposure के दौरान subjective stress और heart rate बढ़े। Researchers ने इसके संभावित कारणों में attraction-related arousal जैसी व्याख्याओं पर चर्चा की।
इसलिए यह कहना कि “पार्टनर की खुशबू सूंघते ही शरीर stress-free हो जाता है” वैज्ञानिक रूप से सही निष्कर्ष नहीं होगा।
बेहतर निष्कर्ष यह है कि परिचित व्यक्ति की body odor हमारी emotional और physiological responses को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति और परिस्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
क्या इसके पीछे pheromones होते हैं?
Body smell और attraction की बात आते ही एक शब्द बहुत तेजी से सामने आता है—pheromones।
जानवरों की कई प्रजातियों में chemical signals के जरिए दूसरे जीवों के व्यवहार को प्रभावित करने के स्पष्ट उदाहरण मौजूद हैं। इंसानों में भी body odor के जरिए सामाजिक और भावनात्मक संकेतों पर काफी research हुई है।
उदाहरण के लिए fear, stress और anxiety से जुड़े human body-odor signals पर हुए अध्ययनों की meta-analysis में ऐसे chemosignaling effects के प्रमाण मिले हैं।
लेकिन इससे सीधे यह निष्कर्ष निकालना कि इंसानों में कोई एक निश्चित “love pheromone” है जो हमें सही partner की ओर खींचता है, अभी वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
इसलिए इंटरनेट पर मिलने वाले दावे जैसे—
“अगर किसी की body smell अच्छी लगती है तो वही आपका genetically perfect partner है”
या
“Underarm smell में मौजूद pheromone आपको प्यार में डाल देता है”
—इन बातों को स्थापित वैज्ञानिक तथ्य की तरह नहीं लेना चाहिए।
Perfume से अलग क्यों होती है natural body smell?
Perfume और deodorant की fragrance बाहर से शरीर पर लगाई जाती है। Natural body odor शरीर, त्वचा और उस पर रहने वाले microorganisms से बनने वाले कई compounds का मिश्रण होती है। Underarm odor में volatile fatty acids और thioalcohols जैसे compounds की भूमिका पर भी research हुई है।
इसीलिए दो लोग एक ही perfume लगा सकते हैं, फिर भी उनकी overall smell बिल्कुल एक जैसी महसूस नहीं होती।
और शायद यही कारण है कि हम कभी-कभी किसी परिचित व्यक्ति को उसकी fragrance से पहचान लेते हैं।
प्यार में smell की इतनी अहमियत क्यों हो सकती है?
हम अक्सर attraction को केवल चेहरे, आवाज, personality और touch से जोड़ते हैं। लेकिन इंसान का sensory experience इससे कहीं बड़ा है।
हम किसी अपने को उसकी—
आवाज,
स्पर्श,
चलने के अंदाज,
perfume,
बालों की खुशबू,
और natural body odor
से भी पहचानना सीख सकते हैं।
रिश्ता लंबा होने पर इनमें से कुछ संकेत उस व्यक्ति की “पहचान” का हिस्सा बन सकते हैं।
इसलिए किसी partner की natural smell का पसंद आना जरूरी नहीं कि कोई विचित्र fetish या बीमारी हो। कई मामलों में यह familiarity और attraction से जुड़ी एक व्यक्तिगत sensory preference हो सकती है।
हालांकि यदि किसी व्यवहार से दूसरे partner को असहजता होती है तो उसकी personal boundary का सम्मान करना जरूरी है। किसी भी intimate व्यवहार में दोनों लोगों की सहजता महत्वपूर्ण है।
क्या हर natural body smell को सामान्य मान लेना चाहिए?
नहीं।
Natural body odor और अचानक पैदा हुई असामान्य या बहुत तेज गंध को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।
शरीर की गंध hygiene, diet, medicines और कई अन्य factors से बदल सकती है। यदि किसी व्यक्ति की body odor अचानक बहुत बदल जाए, लंबे समय तक असामान्य रहे या उसके साथ त्वचा में infection, rash, pain या दूसरे symptoms हों तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
यानी romantic attraction की चर्चा अपनी जगह है और स्वास्थ्य से जुड़ा बदलाव अपनी जगह।

गौहर-जैद की बात पर लोगों को अजीब क्यों लगा?
क्योंकि underarm smell को हमारी social conditioning अक्सर “बदबू” और hygiene से जोड़ती है।
हम deodorant लगाते हैं ताकि यह smell छिप जाए। विज्ञापन हमें underarm odor से बचने के तरीके बताते हैं। ऐसे में जब कोई खुले तौर पर कहता है कि उसे partner के underarms की smell पसंद है तो वह हमारी सामान्य social expectation के उलट लगता है।
लेकिन attraction हमेशा social rules की सूची देखकर काम नहीं करता।
किसी को अपने partner के बालों की smell पसंद है, किसी को उसकी T-shirt की, किसी को perfume की और किसी को उसकी natural body scent।
इसलिए गौहर खान और जैद दरबार की बातचीत को केवल “अजीब आदत” कहकर छोड़ देने के बजाय यह समझना ज्यादा दिलचस्प है कि हमारे रिश्तों में खुशबू भी एक खामोश sensory language हो सकती है।
निष्कर्ष
गौहर खान का जैद दरबार को लेकर किया गया खुलासा सोशल मीडिया के लिए भले ही मजेदार या चौंकाने वाला हो, लेकिन इसके पीछे का विषय दिलचस्प है।
Underarm odor केवल पसीने की कहानी नहीं है। इसमें शरीर के secretions, त्वचा पर मौजूद microorganisms और कई volatile compounds शामिल होते हैं। वहीं किसी खास व्यक्ति की smell को पसंद करने में familiarity, memory, emotional association और attraction की भूमिका हो सकती है।
इसीलिए कभी किसी अपने की छोड़ी हुई शर्ट उसकी अनुपस्थिति में भी उसकी मौजूदगी का अहसास करा देती है।
शायद प्यार सिर्फ दिखाई और सुनाई ही नहीं देता—कभी-कभी उसकी एक अपनी, बेहद परिचित खुशबू भी होती है।
FAQ
क्या अपने partner की underarm smell पसंद करना सामान्य है?
किसी partner की natural body odor पसंद आना अपने-आप में बीमारी या addiction का प्रमाण नहीं है। Familiarity और attraction इसमें भूमिका निभा सकते हैं।
क्या पसीना ही underarm की बदबू पैदा करता है?
सीधे तौर पर केवल पसीना नहीं। Underarm secretions के components पर त्वचा के microorganisms की गतिविधि odor-producing volatile compounds बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
क्या partner की body smell से stress कम होता है?
कुछ पुराने अध्ययनों में partner odor के साथ perceived stress या discomfort में कमी देखी गई है, लेकिन 2026 की एक बड़ी study में cortisol कम नहीं हुआ और कुछ stress responses बढ़े। इसलिए इसका एक सार्वभौमिक प्रभाव मानना सही नहीं है।
क्या body smell में human pheromones होते हैं?
मानव body odor chemical information दे सकती है, लेकिन किसी निश्चित human “love pheromone” को लेकर लोकप्रिय दावे वैज्ञानिक प्रमाणों से कहीं ज्यादा मजबूत भाषा में किए जाते हैं। इसे attraction का सिद्ध कारण नहीं मानना चाहिए।
क्या partner की smell पसंद होना नशा है?
आमतौर पर नहीं। बोलचाल में इसे “खुशबू का नशा” कहा जा सकता है, लेकिन यह medical addiction के बराबर नहीं है। इसे familiarity, emotional association और attraction के संदर्भ में समझना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों की व्याख्या के उद्देश्य से है। इसे किसी बीमारी के निदान या चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें।

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