अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा: ट्रम्प की कड़ी चेतावनी, तेहरान ने ठुकराया सीजफायर प्रस्ताव

iran-us-isreal-war-trump-image

अमेरिका की कड़ी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस मुद्दे पर गंभीर हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिका और सख्त कार्रवाई करेगा। इससे संकेत मिलता है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।

ईरान ने ठुकराया सीजफायर प्रस्ताव

ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह ट्रम्प प्रशासन की शर्तों पर युद्ध खत्म नहीं करेगा। उसे अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर भरोसा नहीं है।

बातचीत की संभावना कम

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अभी कोई असली बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि कुछ देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं माना जा सकता। इससे साफ है कि फिलहाल शांति की उम्मीद कम है।

अमेरिका की प्रमुख शर्तें

अमेरिका ने ईरान के सामने कई शर्तें रखी हैं। उसने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाने को कहा है। साथ ही परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी मांगी है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन कम करे या बंद करे। वह चाहता है कि ईरान अपना स्टॉक IAEA को सौंप दे।

मिसाइल और सैन्य गतिविधियों पर दबाव

अमेरिका ने ईरान से उसके मिसाइल प्रोग्राम पर नियंत्रण की मांग की है। उसने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों को सीमित करने को कहा है।

साथ ही ईरान से कहा गया है कि वह क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां कम करे। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने सहयोगी मिलिशिया को समर्थन भी घटाए।

होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा फैसला

अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की मांग की है। वह चाहता है कि वैश्विक शिपिंग के लिए रास्ता सुरक्षित रहे।

इसी बीच ईरान ने भारत समेत कई देशों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी है। इसमें चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं।

भारत को क्या फायदा होगा

होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को बड़ी राहत मिलेगी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत तेल आयात करता है। इसमें से 55 से 60 प्रतिशत तेल खाड़ी देशों से आता है।

भारत हर दिन करीब 50 लाख बैरल तेल इस्तेमाल करता है। ऐसे में यह समुद्री रास्ता बहुत अहम है। रास्ता खुला रहने से सप्लाई जारी रहेगी। हाल के तनाव के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। अब कीमतों में स्थिरता आ सकती है।

इसके अलावा जहाजों का इंश्योरेंस भी महंगा हो गया था। अब लागत कम होने की उम्मीद है। मिडिल ईस्ट से भारत आने वाले जहाज 5 से 10 दिनों में पहुंच सकते हैं। इससे सप्लाई चेन बेहतर होगी।

Comments

Related News