देशभर में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, कई राज्यों में बिगड़े हालात
देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश अब लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। केरल, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। कहीं लैंडस्लाइड ने लोगों की जान ले ली तो कहीं बादल फटने और अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों और यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। दूसरी ओर मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी मौसम खराब रहने की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
केरल में भारी बारिश और लैंडस्लाइड से 6 लोगों की मौत
सबसे अधिक असर केरल में देखने को मिला, जहां लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई स्थानों पर लैंडस्लाइड और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। इन घटनाओं में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। अब तक 65 राहत शिविर स्थापित किए जा चुके हैं, जहां 1,465 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन लगातार संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रहा है।
कर्नाटक के शिवमोग्गा में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत
इसी बीच कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में रविवार सुबह दर्दनाक हादसा हुआ। यहां पहाड़ी क्षेत्र में हुए लैंडस्लाइड की चपेट में एक मकान आ गया, जिसमें सो रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।
मृतकों में 35 वर्षीय मल्लिकार्जुन, उनकी 28 वर्षीय पत्नी नागवेणी और तीन वर्षीय पुत्र संतोष शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से अचानक आई बाढ़
वहीं जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के छतरू क्षेत्र में बादल फटने के बाद अचानक बाढ़ आ गई। तेज बहाव के कारण कई मकानों और दुकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि दो कारें पानी के साथ बह गईं। कई सड़कों पर भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई।
एहतियात के तौर पर प्रशासन ने किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों के सभी स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रहे हैं।
उत्तराखंड में बद्रीनाथ हाईवे धंसा, यमुनोत्री मार्ग भी प्रभावित
उत्तराखंड में भी लगातार बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर लैंडस्लाइड हुई, जबकि चमोली जिले के गौचर के पास कमेड़ा क्षेत्र में बद्रीनाथ हाईवे का लगभग 20 मीटर हिस्सा धंस गया।
इसके बाद प्रशासन ने यातायात को फिलहाल वन-वे कर दिया है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौसम विभाग के अनुसार 7 अगस्त तक प्रदेश में मौसम खराब रहने की संभावना है।
केरल के पांच प्रमुख बांधों पर रेड अलर्ट जारी
लगातार हो रही बारिश के कारण केरल के कई प्रमुख बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन ने मूझियार, कल्लारकुट्टी, एरट्टयार, लोअर पेरियार और पोरिंगलकुथु डैम पर रेड अलर्ट जारी किया है।
साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
तमिलनाडु में बारिश के लिए 2,000 लोगों ने की विशेष नमाज
एक ओर जहां देश के कई हिस्से भारी बारिश से जूझ रहे हैं, वहीं तमिलनाडु के कई जिले भीषण सूखे और जल संकट का सामना कर रहे हैं।
तिरुचिरापल्ली के थेन्नूर इलाके में मुस्लिम समाज के लगभग 2,000 लोगों ने बारिश के लिए विशेष नमाज (सलात अल-इस्तिस्का) अदा की। राज्य के कई जिलों में तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे जल संकट और गंभीर हो गया है।
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में बादल ज्यादा क्यों फटते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय इलाकों में बादल फटने की घटनाएं भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अधिक होती हैं।
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाएं हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से टकराकर तेजी से ऊपर उठती हैं। ऊंचाई पर पहुंचते ही हवा ठंडी हो जाती है और उसमें मौजूद नमी तेजी से बादलों में बदल जाती है।
इसके अलावा संकरी घाटियां और ऊंची चोटियां बादलों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं। परिणामस्वरूप एक सीमित क्षेत्र में अत्यधिक नमी जमा हो जाती है। जब बादल इतनी नमी को संभाल नहीं पाते, तब अचानक बहुत तेज बारिश होती है, जिसे आम भाषा में बादल फटना कहा जाता है।
इसी वजह से डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी, सोनमर्ग और कश्मीर घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलती हैं।
बादल फटना क्या होता है?
आम धारणा के विपरीत बादल वास्तव में फटता नहीं है। यह एक मौसम विज्ञान से जुड़ी घटना है, जिसमें बहुत छोटे क्षेत्र में बेहद कम समय के भीतर अत्यधिक वर्षा होती है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार यदि 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक घंटे या उससे कम समय में 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा दर्ज हो जाए, तो उसे बादल फटना (Cloudburst) कहा जाता है।
यह स्थिति विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों में अधिक बनती है, क्योंकि वहां पर्वत नमी वाली हवाओं को रोक देते हैं और अचानक अत्यधिक वर्षा होने लगती है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने भी नागरिकों से मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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